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मानव सेवा को ही अपना धर्म मानती थी मदर टेरेसा: जन्मदिन विशेष

icon अमितेष युवराज सिंह | 1
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| अगस्त 26 , 2018 , 09:51 IST

आज दुनिया में खास तौर से भारतीय उपमहाद्वीप में शायद ही कोई ऐसा हो जो मदर टेरेसा को न जानता हो। 26 अगस्त 1910 को मेसिडोनिया की राजधानी स्कोप्जे शहर में जन्मी मदर टेरेसा आज भी अपनी मिशनरीज ऑफ चैरिटी संस्था के रूप में लोगों के बीच जीवंत मानी जाती हैं। आज पूरा देश ही नहीं बल्कि दुनिया मदर टेरेसा की 108वीं जयंती मनाकर उन्हें याद कर रही है।

उनका असली नाम अग्नेसे गोंकशे बोजिशयु था जिसे बाद में बदल का कर उन्होंने अपना नाम टेरेसा रख लिया था। बाद में लोगो ने उन्हें आदर से मदर टेरेसा कहना शुरू कर दिया था। बचपन से ही उनका झुकाव समाज सेवा की ओर था, जिस कारण उन्होंने बहुत कम उम्र में रोमन कैथोलिक नन बनने का फैसला कर लिया।

मात्रा 18 साल की उम्र में ही उन्होंने कैथोलिक चर्च ज्वाइन कर लिया था जिसके बाद से वे कभी अपने घर नहीं लौटी। इटली में जन्मी मदर टेरेसा ने भारत को अपनी कर्मभूमि चुना और 1950 में कोलकाता में मिशनरीज अॅाफ चैरिटी की स्थापना की। इस संस्था को सुरु करने का उनका मकसद यही था कि इसक्वे जरिये वो गरीबों, बीमार और अनाथ लोगों की मदद कर सके।

उन्होंने कुष्ठ रोगियों को भी शरण दी जिन्हें समाज ठुकरा चुका था। इसके साथ ही उन्होंने टीबी के मरीजों की भी बहुत सेवा की थी। मदर टेरेसा को सामाजिक कार्यों की वजह से उन्हें 1979 में नोबल शांति पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चूका है। उन्हें कई अन्य पुरस्कारों से भी सम्मानित किया जा चूका है।

मदर टेरेसा का नाम कुछ विवादों से भी जुड़ा था। उनके विरोधियों ने उनपर यह आरोप लगाए थे कि उनकी मानव सेवा के पीछे धर्मांतरण का उद्देश्य छिपा है। हालांकि उन्होंने इस बारे में कभी कुछ नहीं कहा। मदर टेरेसा की मृत्यु 5 सितंबर 1997 को हार्ट अटैक की वजह से हुई थी।


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अमितेष युवराज सिंह

लेखक न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में असिस्टेंट एग्जीक्यूटिव एडिटर हैं

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