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हर्षवर्धन की दमदार एक्टिंग लेकिन फुस निकली 'भावेश जोशी सुपरहीरो'की कहानी

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| जून 1 , 2018 , 18:02 IST

सोनम कपूर की वीरे दी वेडिंग के साथ उनके भाई हर्षवर्धन कपूर की दूसरी फिल्म भावेश जोशी सुपरहीरो भी आज शुक्रवार को रिलीज़ हुई है। फ़िल्म वैसे तो पहले रिलीज़ होनी थी लेकिन उसको आगे बढ़ा दिया। फ़िल्म अनुराग कश्यप की कंपनी द्वारा बनाई गई है और इसका निर्देशन किया है विक्रमादित्य मोटवाने ने जो इससे पहले राजकुमार राव के साथ ट्रैप्ड फ़िल्म बना चुके है। फिल्म में हर्षवर्धन कपूर लीड भूमिका में हैं, जिनकी ये दूसरी फिल्म है। जानते है कैसी है ये फिल्म...

कहानी:

फिल्म की कहानी मुंबई में शुरू होती है, जहां के मलाड इलाके में सिकंदर खन्ना (हर्षवर्धन कपूर) अपने दो दोस्तों भावेश जोशी और रजत के साथ रहता है। यह तीनों दोस्त समाज से बुराइयों को दूर करने के मिशन पर लग जाते हैं और एक-एक करके भ्रष्टाचार मिटाने का काम करते रहते हैं। कभी वह सिग्नल जंप करने के लिए, कभी गंदगी फैलाने वालों के लिए मुहिम में जाते हैं तो वहीं दूसरी तरफ सच की राह पर चलने का पूरा प्रयास करते हैं।

इसी बीच पानी के माफियाओं से निपटने का काम भी करने का प्रयास करते हैं। इस दौरान भावेश जोशी के ऊपर तरह-तरह के इल्जाम भी लगाए जाते हैं। कॉरपोरेटर पाटिल और मिनिस्टर राणा (निशिकांत कामत) भी इस काम में सम्मिलित रहते हैं और इनका एक ही मकसद होता है भावेश जोशी का सफाया करना। क्या भावेश जोशी अपने मंसूबों में कामयाब हो पाता है और क्या वह कुरीतियों को मिटा पाने में सक्षम होता है, यह सब कुछ जानने के लिए आपको फिल्म देखनी पड़ेगी।

एक्टिंग -

हर्षवर्धन कपूर की यह दूसरी फिल्म है, लेकिन वह किसी भी तरह से आकर्षित कर पाने में सक्षम नजर नहीं आते. हालांकि उन्होंने प्रयास काफी अच्छा किया है जो काबिले तारीफ है.हर्षवर्धन कपूर की एक्टिंग अच्छी है। उन्होंने अपने किरदार के साथ इंसाफ किया है। उन्होंने अपनी पहली फिल्म 'मिर्जिया' की तरह निराश नहीं किया है। प्रियांशु पेनयुली का किरदार भी दमदार है। उन्होंने फिल्म में एक सच्चे देशभक्त का रोल प्ले किया है। एक्ट्रेस श्रेया सबरवाल के लिए फिल्म में ज्यादा कुछ करने के लिए नहीं था। पेनयुली की परफॉर्मेंस के अलावा बाइक स्क्वेंस भी बेहतरीन दिखाया गया है।

डायरेक्शन -

डायरेक्टर विक्रमादित्य मोटवानी ने फिल्म में कुछ रियल इश्यू उठाए हैं। फिल्म की कहानी मोटवानी, अनुराग कश्यप और अभय कोर्ने ने मिलकर लिखी है। फिल्म में उन्होंने जो सुपरहीरो दिखाए हैं, वो साधारण लोग ही हैं। इनके पास अलग से कोई पावर नहीं होती है, लेकिन फिर भी ये इंसाफ के लिए लड़ते हैं। पहले हाफ में फिल्म असलियत के करीब लगती है लेकिन जिस तरह से कहानी आगे बढ़ती है वो निराश करती है। फिल्म आम आदमी की कहानी है, लेकिन आम आदमी से कनेक्ट नहीं कर पाती है। फिल्म में विलेन के रूप में निशिकांत कामत हैं, लेकिन काफी कमजोर दिख रहे हैं। डायलॉग्स काफी लंबे हैं, जो बोर करते हैं। फिल्म का क्लाइमेक्स भी कमजोर है।

क्या है ख़ामियां-

फ़िल्म की सबसे बड़ी ख़ामी है इसका स्क्रीन्प्ले और स्क्रिप्ट का कुछ भाग। ये फ़िल्म वास्तविकता का जामा ओढ़े शुरू होती है और फिर कहीं-कहीं काल्पनिकता की ओर रूख कर लेती है। स्क्रीनप्ले में लंबे चेजिंग और मार्शल आर्ट ट्रेनिंग सीन्स फ़िल्म को खींचकर बोरिंग कर देते हैं।

फ़िल्म के शुरुआत में ट्रीटमेंट और मुद्दे वास्तविक हैं पर बाद में ये थोड़ी मसाला बॉलीवुड जैसी लगने लगती है और फ़िल्म का सुर भटक जाता है। साथ ही कई जगह पर कुछ दृश्य और बैकग्राउंड स्कोर आपको एक कमर्शियल बॉलीवुड फ़िल्म का अहसास दिलाने लगते हैं। जिसमें मुझे बुराई सिर्फ़ इतनी नज़र आती है कि फ़िल्म का सुर एक जैसा होने चाहिए। अगर कोई और सुर लग गया तो फ़िल्म बेसुरी हो जाती है। सिकंदर का किरदार कर रहे हर्षवर्धन ने अपने अभिनय से मुझे बिलकुल प्रभावित नहीं किया। एक दो दृश्य जहां वो अपना हुनर दिखा सकते थे, वहां वो बिल्कुल फुस्स साबित हुए। एक और बात गानों के शब्दों में ना जाने क्यूं आजकल बाम और शक्तिवर्धक औषधियों का चलन हो गया अगर इसकी वजह मुन्नी बदनाम का हिट होना है तो फ़िल्मकारों को ये याद रखना चाहिए की हर बार एक जैसा मसाला नहीं चलता और ये क्लीशे लगने लगता है। मैं यह बात चवनप्राश वाले गाने की कर रहा हूं।

क्यों देखें फिल्म:

फिल्म का बैकग्राउंड स्कोर अच्छा है और साथ ही हर्षवर्धन कपूर के दोस्त के रूप में दोनों एक्टर्स ने बढ़िया काम किया है।


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