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दुनिया के सबसे बड़े मुस्लिम देश की आत्मा है हिन्दू परंपरा

icon कुलदीप सिंह | 0
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| अक्टूबर 20 , 2017 , 19:34 IST

दुनिया के सबसे बड़े मुस्लिम आबादी वाले देश की आत्मा में हिन्दुत्व है। जी हां वहां 90 फीसदी लोग मुसलमान हैं लेकिन वहां सबसे ज्यादा प्रचलित हैं हिन्दू देवी देवताओं के नाम। हम बात कर रहे हैं इंडोनेशिया की जो शरिया कानून और इस्लाम की मान्यताओं को लेकर अक्सर सुर्खियों में रहता है, लेकिन इस देश में आज भी लोग बच्चों के नाम हिंदू देवताओं या पौराणिक चरित्रों के नाम रखते हैं।

इंडोनेशिया में हिंदू नामों की वर्तनी कुछ अलग हैं, लेकिन उनका मूल मतलब एक ही है। जिसे हम कृष्ण के तौर पर जानते हैं, उसे इंडोनेशिया में कृसना कहा जाता है।

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इंडोनेशिया में इस्लाम के प्रसार से पहले हिंदू और बौद्ध धर्म प्रचलित थे। आज भी हिंदू नाम और संस्कृति दिखती है. इसीलिए आज भी रामा या कहें राम वहां एक प्रचलित नाम है।

सीता भी इंडोनेशिया में रखे जाने वाले पसंदीदा नामों में से एक है। राम की पत्नी और राजा जनक की बेटी सीता रामायण के सबसे अहम किरादारों में से एक हैविसनु यानी विष्णु। इस नाम वाले लोग भी आपको इंडोनेशिया में खूब मिलेंगे।अरकी डिकानिया विसनु नाम के एक नामी अमेरिकी-इंडोनेशिया बास्केट बॉल खिलाड़ी हैं।

लक्ष्मी नाम जितना प्रचलचित भारत में है, उतना ही इंडोनेशिया में भी है। हिंदू धर्म में लक्ष्मी को धन और समृद्धि की देवी के तौर पर पूजा जाता है।

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ज्ञान की देवी मानी जाने वाली सरस्वती भी नाम भी इंडोनेशिया में बहुत जाना माना नाम है। 2013 में इंडोनेशिया की सरकार को 16 फीट ऊंची सरस्वती की एक प्रतिमा अमेरिका को भेंट की थी

सत्यवान नाम आपको भारत में आजकल शायद ही सुनने को मिलता है, लेकिन सत्यवान-सावित्री की पौराणिक कथा से निकले इस नाम को आज भी इंडोनेशिया में शौक से रखा जाता है।

हिंदू पौराणिक कथा के अनुसार सावित्री यमराज से अपने पति सत्यावान की जिंदगी को वापस ले आयी थी। सावित्री भी इंडोनेशिया में एक प्रचलित नाम है।2011_04_19_15_07_57

इंडोनेशिया में आपको बहुत से लोग मिल जाएंगे जिनके नाम देवा या देवी होते हैं। स्वाभाविक रूप से देवा पुरुष तो देवी एक महिला नाम है।

महाभारत और रामायण इंडोनेशिया में अब भी प्रचलित संस्कृति का हिस्सा है। महाभारत में धर्मराज कहे जाने वाले युधिष्ठिर का नाम भी इसीलिए आपको इंडोनेशिया में खूब मिलता है। 

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अर्जुना भी इंडोनेशिया में एक लोकप्रिय नाम है। महाभारत में श्रेष्ठ धनुर्धर होने के साथ साथ अर्जुन उस गीता उपदेश प्रकरण का भी हिस्सा रहे हैं जो हिंदू दर्शन के बड़े आधारों में से एक है।

भीम दूसरे नंबर पर आते थे और बहुत बलशाही थे। उन्हीं के नाम पर इंडोनेशिया में बीमा या भीमा नाम रखा जाता है।

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पौराणिक कथाओं के अनुसार पार्वती शिव की पत्नी हैं। यह नाम भी इंडोनेशिया में प्रचलित उन नामों से एक है, जिनका मूल हिंदू धर्म से जुड़ा है।

इंद्र भी इंडोनेशिया में एक प्रचलित नाम है। देवराज के नाम से जाने जाने वाले इंद्र को वर्षा का देवता कहा जाता है। उनके दरबार की अप्सराओं और उनके गुस्से को लेकर कई कहानियां हैं।

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गनेसा नाम हिंदू देवता गणेश के नाम का इंडोनेसियाई संस्करण है। इंडोनेशिया के बांडुंग शहर में मशहूर तकनीकी शिक्षण संस्थान आईटीबी में गनेशा कैंपस बहुत मशहूर है। वहां गणेश की बहुत ही प्रतिमाएं भी हैं।

गरुणा इंडोनेशिया की सरकारी एयरलाइन कंपनी है जिनका नाम गरुण से प्रेरित है। हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार गरुण पक्षी भगवान विष्णु की सवारी है।

सूर्य नाम अब भारत में नई पीढ़ी के बीच पहले जितना प्रचलित नहीं है, लेकिन इंडोनेशिया में अब भी आपको बहुत से लोग मिल जाएंगे जिनका नाम सूर्या है।

अटूट है भारतीय संस्कृति और इंडोनेशिया का रिश्ता 

90 फीसदी मुस्लिम आबादी वाले इंडोनेशिया पर रामायण की गहरी छाप है। हिंदी के प्रसिद्ध विद्वान फादर कामिल बुल्के ने 1982 में अपने एक लेख में कहा था,

‘35 वर्ष पहले मेरे एक मित्र ने जावा के किसी गांव में एक मुस्लिम शिक्षक को रामायण पढ़ते देखकर पूछा था कि आप रामायण क्यों पढ़़ते हैं? उत्तर मिला, ‘मैं और अच्छा मनुष्य बनने के लिए रामायण पढ़ता हूं’

दरअसल रामकथा इंडोनेशिया की सांस्कृतिक विरासत का अभिन्न हिस्सा है। बहुत से लोग हैं जिन्हें यह देखकर हैरानी होती है, लेकिन सच यही है कि दुनिया में सबसे ज्यादा मुस्लिम आबादी वाला यह देश रामायण के साथ जुड़ी अपनी इस सांस्कृतिक पहचान के साथ बहुत ही सहज है। जैसे वह समझता हो कि धर्म बस इंसान की कई पहचानों में से एक पहचान है। रामायण को वहां रामायण ककविन (काव्य) कहा जाता है। भारत दौरे पर आए अनीस बास्वेदन का भी कहना था,

‘रामायण के चरित्रों का इस्तेमाल हम अपने स्कूलों में शिक्षा देने के लिए भी करते हैं’

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इस बारे में एक दिलचस्प किस्सा भी सुनने को मिलता है. बताया जाता है कि इंडोनेशिया के पहले राष्ट्रपति सुकर्णो के समय में पाकिस्तान का एक प्रतिनिधिमंडल इंडोनेशिया की यात्रा पर था। इसी दौरान उसे वहां पर रामलीला देखने का मौका मिला। प्रतिनिधिमंडल में गए लोग इससे हैरान थे कि एक इस्लामी गणतंत्र में रामलीला का मंचन क्यों होता है। यह सवाल उन्होंने सुकर्णो से भी किया। उन्हें फौरन जवाब मिला कि ‘इस्लाम हमारा धर्म है और रामायण हमारी संस्कृति’

इतिहास बताता है कि रामायण का इंडोनेशियाई संस्करण सातवीं सदी के दौरान मध्य जावा में लिखा गया था. तब यहां मेदांग राजवंश का शासन था। लेकिन रामायण के इंडोनेशिया आने से बहुत पहले रामायण में इंडोनेशिया आ चुका था। ईसा से कई सदी पहले लिखी गई वाल्मीकि रामायण के किष्किंधा कांड में वर्णन है कि कपिराज सुग्रीव ने सीता की खोज में पूर्व की तरफ रवाना हुए दूतों को यवद्वीप और सुवर्ण द्वीप जाने का भी आदेश दिया था। कई इतिहासकारों के मुताबिक यही आज के जावा और सुमात्रा हैं।

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इंडोनेशियाई रामायण के भारत में मंचन पर संस्कृति मंत्री महेश शर्मा का कहना था कि यह बढ़िया प्रस्ताव है। उन्होंने इस पर आगे बढ़ने की बात भी कही। एक अखबार से बात करते हुए उनका कहना था,

‘रामायण और रामलीला हमारी विरासत और पहचान के अभिन्न तत्व हैं। अगर हम दूसरे देशों के लोगों के साथ उसकी समृद्धता साझा करेंगे तो इससे अपने देश के बारे में हमारी समझ समृद्ध होगी’ हालांकि करीब एक साल होने को है और इस पर अभी तक कुछ हुआ नहीं है।


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कुलदीप सिंह

Executive Editor - News World India. Follow me on twitter - @KuldeepSingBais

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