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मुस्लिम महिला ने उर्दू में लिखी रामायण, कायम की गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल

दीपक गुप्ता, न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| जून 30 , 2018 , 20:19 IST

यूपी के कानपुर में एक मुस्लिम महिला ने गंगा-जमुनी तहजीब की एक अनौखी मिसाल कायम की है। कानपुर की रहने वाली डॉ. माही तलत सिद्दीकी ने रामायण को उर्दू में लिखकर आपसी भाई-चारे का परिचय दिया है।

इस सोच ने किया प्रेरित

डॉ. माही तलत सिद्दीकी का कहना है कि उन्होंनें रामायण को उर्दू में इसलिए लिखा कि सभी समुदायों में आपसी मेल-जोल की भावना रहे। उनका कहना है कि वह चाहती थीं कि हिंदू समुदाय के अलावा मुस्लिम समुदाय को भी रामायण की अच्छी बातों के बारे में पता चले, इसी वजह से उन्होंने रामायण को उर्दू में लिखने की सोची।

2 साल पहले रामायण मिली रामायण

डॉ. माही तलत सिद्दीकी ने बताया कि 2 साल पहले कानपुर के बद्री नारायण तिवारी ने मुझे रामायण की एक प्रति दी थी। इसी के बाद उन्होंने रामायण को उर्दू भाषा में लिखने की ठान ली। डॉ. तलत ने रामायण के बारे में बताते हुए कहा कि बाकी धर्मग्रन्थों के पवित्र शब्दों की तरह रामायण भी हमें शांति और भाईचारे का संदेश देता है। यह बहुत ही खूबसूरत तरीके से लिखा गया है। इसे उर्दू में लिखने के बाद मुझे तनाव से मुक्ति और शांति का अहसास हो रहा है। डॉ. माही तलत का कहना है कि रामायण को हिंदी से उर्दू में लिखने के दौरान उन्हें डेढ़ साल से ज्यादा का वक्त लगा। हिंदी से उर्दू अनुवाद के दौरान उन्होंने इस बात का भी ध्यान रखा कि कहीं से भी हिंदी भाषा वाले रामायण के भावार्थ से छेड़छाड़ न हो।

हिंदी साहित्य में एमए हैं डॉ. माही

डॉ. माही ने हिंदी साहित्य में MA की डिग्री हासिल की है। उनका कहना है कि आगे भी वह अपनी लेखनी के जरिए समाज में परस्पर सौहार्द्र को बनाए रखने का काम करती रहेंगी। उनका कहना है, 'समाज में कुछ लोग धार्मिक मुद्दों को भड़काकर हिंसा फैलाते हैं लेकिन कोई भी धर्म हमें एक-दूसरे से नफरत करना नहीं सिखाता है। सभी धर्मों के लोगों को प्यार, सद्भाव और भाईचारे के साथ रहना चाहिए और एक-दूसरे के धर्म का सम्मान करना भी जरूरी है।'


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