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बुतपरस्तों का बुत तोड़ना और भारत माता की जय...

icon कुलदीप सिंह | 0
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| अप्रैल 9 , 2018 , 23:09 IST

त्रिपुरा में लेनिन की मूर्ति को बुलडोजर से गिराकर भारत माता की जय चिल्लाने वालों ने देश के सामने नया संकट खड़ा कर दिया है। ये संकट है कि किताबों में मौजूद और चौराहों पर खड़े महापुरुषों को कैसे बचाया जाए? त्रिपुरा में मार्क्सवाद के जनक लेनिन की मूर्ति ढहाए जाने को लेकर अजीब से बयान सामने आ रहे हैं। कई अज्ञानी लेनिन को स्टालिन समझकर गालियां भी दे रहे हैं।

त्रिपुरा के गर्वनर तथागत रॉय के मुताबिक जब दिल्ली में इंडिया गेट से ब्रिटिश दासता के प्रतीक किंग जार्ज V और कोलकाता से क्वीन विक्टोरिया की मूर्तियां हटाई जा सकती है तो लेनिन की मूर्ति हटाने पर आपत्ति क्यों है? बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव राम माधव ने भी मूर्ति तोड़ने को ट्वीट करके सही ठहराया और विवाद गहराने पर डिलीट कर दिया। लेनिन की मूर्ति तोड़ी गई तो कोलकाता में उसका बदला श्यामाप्रसाद मुखर्जी की प्रतिमा पर कालिख़ पोतकर लिया गया, एक दक्षिण भारतीय नेता ने वैसे ही महान विचारक और समाज सुधारक पेरियार की मूर्ति को तोड़े जाने की संभावना जताई तो सच में ही कुछ लोगों ने उनकी मूर्ति खंडित कर दी। इतना ही नहीं शरारती तत्वों ने मेरठ में अंबेडकर की मूर्ति को ही तोड़ डाला। ज़रा सोचिए देश में नई जंग छिड़ गई है, ये जंग विकास के रास्ते आगे जाने की नहीं बल्कि इतिहास को मिटाकर नई ईबारत लिखने की सनक बन गई है।

कुछ दक्षिणपंथी कट्टर किस्म के लोगों को लगता है कि बुतों के रूप में चौराहों पर सजे अंबेडकर, लेनिन का नामोनिशान मिटा देने से देश में नए युग की शुरुआत हो जाएगी। वो किताबों से गांधी को भी मिटा देना चाहते हैं उनके हत्यारों को महिमामंडित करना चाहते हैं, लेकिन सवाल ये है कि देश के 85 फीसदी भूभाग पर सत्ता हासिल कर चुकी बीजेपी क्या सचमुच ऐसा चाहती है? देश के प्रधानमंत्री इन ओछी हरकतों पर क्या राय रखते हैं? पीएम ने सीधे तौर पर तो कुछ नहीं कहा लेकिन पीआईबी की एक रिलीज़ के ज़रिए मूर्ति तोड़ने को सधे हुए अंदाज में गलत बताया है।

वैसे मूर्ति तोड़ने की घटनाओं पर बीजेपी अध्यक्ष ने मौका देखकर अपनी बात रख दी है, उन्होने ताकीद की है कि त्रिपुरा की घटना में कोई कार्यकर्ता शामिल पाया गया तो कड़ी कार्रवाई होगी। बीजेपी के कुछ नेताओं ने कहा कि वो Vendetta Politics (बदले की राजनीति) में यकीन नहीं रखते, लेकिन ये कहने में शायद देर हो गई। खुद को सहिष्णु बताने वाले देश की खूब फजीहत हो रही है।

त्रिपुरा की घटना की तुलना अफगानिस्तान से की जा रही है। अफगानिस्तान के बामियान में बुद्ध की मूर्तियों का तोड़ा जाना याद है आपको? साल 2001 में तालिबान कमांडर मुल्ला उमर के आदेश पर चौथी और पांचवी शताब्दी में बनाई गई महात्मा बुद्ध की दुर्लभ प्रतिमाओं को डायनामाइट से उड़ा दिया गया। इस घटना की पूरी दुनिया में निंदा की गई क्योंकि बुद्ध अहिंसा का उपदेश देते थे और इतिहास को मिटा देने की तालिबान की सनक से कोई भी इत्तेफाक नहीं रखता था। इस्लाम धर्म में बुतपरस्ती (मूर्ति पूजा) को हराम माना गया है लेकिन कट्टर जिहादी गुटों की हरकत पर आज भी लानत भेजी जाती है। भारत उन देशों में शरीक था जिनकी चुनी हुई सरकारों ने बुद्ध की मूर्तियां गिराए जाने की आधिकारिक निंदा की थी लेकिन त्रिपुरा के संदर्भ में ऐसा होना बेहद मुश्किल है। यहां तो बीजेपी के महासचिव और खुद त्रिपुरा के राज्यपाल घटना को सामान्य बताने पर आमादा हैं। कहा जा रहा है कि 25 साल तक त्रिपुरा में कम्यूनिस्ट शासन से लोग बेहद नाराज़ थे इसीलिए वो प्रतीकों को हटाकर अपना गुस्सा प्रदर्शित कर रहे हैं।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि मूर्तियां तोड़ने की सबसे पहली मिसाल सन् 1357 की एक घटना में मिलती है, जब इटली के टोस्काना सूबे के सिएना शहर में बीच चौराहे पर लगी वीनस की मूर्ति को लोगों ने हटा दिया था। वीनस रोम के लोगों की देवी थी। उसे ख़ूबसूरती और सेक्स की देवी मानकर पूजा जाता था। वीनस का बेहद ख़ूबसूरत बुत सिएना में एक फव्वारे पर लगा था। स्थानीय लोग इसे बहुत पसंद करते थे लेकिन एक जंग में हारने के बाद उन्हें लगा कि इस नग्न मूर्ति के चलते ही भगवान उनसे नाराज़ हो गए और उन्हें हार का सामना करना पड़ा। खास बात ये है कि 13वीं शताब्दी में बुतपरस्तों के बुत तोड़ने से कुछ भी हासिल नहीं हुआ। आज भी वीनस इतिहास में जिंदा है। वैसे ही लेनिन की मूर्ति तोड़ने से भी कुछ हासिल नहीं होने वाला। लेनिन दुनियाभर में विचार और विलुप्त होती विचारधारा के प्रतीक के तौर पर आगे भी जाने जाएंगे। बात समझने और समझाने की है ...बीजेपी के महासचिव और त्रिपुरा के राज्यपाल ये समझ लें लेनिन की मूर्ति गिर जाने से भारत माता की जय कभी नहीं होगी....ये भारत माता का अपमान है भारत की वसुधैव कुटुम्बकम की भावना पर सीधी चोट है .. किसी के मूर्तियां गिराने से भारत असहिष्णु (Intolerant ) नहीं होने वाला ।


Raju

Nice story