तेलगी मर गया और दफ़न हो गए अनसुलझे सवाल...

icon कुलदीप सिंह | 1
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| अक्टूबर 26 , 2017 , 19:15 IST

उसने कर्नाटक में एक रेलवे स्टेशन पर छोटे से वेंडर के तौर पर अपना करियर शुरु किया था और देखते ही देखते कुछ सालों में वो देश की अर्थव्यवस्था को हिलाने वाला ताकतवर शख्स बन गया। उसके माता-पिता रेलवे में छोटी नौकरी करते थे लेकिन उसके दिमाग में रातोंरात अमीर बनने का जुनून सवार था और वो बना भी बहुत अमीर ...एक ज़माने में देश का सबसे बड़ा घोटालेबाज भी वही था। 

20 हज़ार करोड़ से ज्यादा के स्टॉम्प पेपर घोटाले का मुख्य आरोपी अब्दुल करीम तेलगी मर गया। 26 अक्टूबर 2017 को हुई उसकी मौत के साथ ही कई राज़ भी हमेशा के लिए दफ्न हो गए। 17 जनवरी 2006 को देश के तब के सबसे बड़े घोटालों में से एक के मुख्य आरोपी अब्दुल करीम तेलगी को अदालत ने 30 साल की सज़ा सुनाई थी, मामले से जुड़े एक और केस में भी उसे 13 साल की सज़ा सुनाई गई थी। तेलगी पिछले 11 साल से बेंगलुरू की जेल में था, दो दिन पहले ही ख़बर आई थी कि उसे मस्तिष्क ज्वर की वजह से वेंटीलेटर पर शिफ्ट किया गया और बाद में ख़बर आई कि शरीर के कई अंगो के काम बंद कर देने की वजह से तेलगी की मौत हो गई।

लेकिन ये तो सिर्फ तेलगी की मौत की ख़बर भर है, उसके कारनामे से जुड़े कई सवाल पिछले 11 साल से बस सवाल ही हैं।

कौन था अब्दुल करीम तेलगी?

एक ज़माना था जब तेलगी पूरे देश में फर्ज़ी स्टॉम्प पेपर का धंधा धड़ल्ले से चला रहा था, उसने बकायदा 350 लोगों की टीम की नियुक्ति की थी जो फर्ज़ी स्टॉम्प छापकर देश भर में फैलाती थी। मामले की जांच में पुलिस और एंजेसियों को पता चला कि तेलगी पुलिस और भ्रष्ट सरकारी अधिकारियों की मदद से शहर-शहर, कस्बे-कस्बे फर्ज़ी स्टॉम्प पेपर पहुंचा रहा था। कहते हैं साल 1992 से लेकर साल 2002 तक तेलगी ने देश के 12 राज्यों में अपना नेटवर्क फैलाया और फर्ज़ी स्टॉम्प छाप-छापकर ऐसे पहुंचाए जैसे सरकारें पीडीएस सिस्टम के तहत गरीबों के लिए राशन की दुकानों पर अनाज पहुंचाती थी। तेलगी भारत में फैले भ्रष्टतंत्र की पैदाइश थी उसका नेटवर्क इतना तगड़ा था कि 1992 से लेकर 2002 के बीच अकेले महाराष्ट्र में उसके खिलाफ 12 केस रजिस्टर्ड हुए, देश के अलग अलग इलाकों में उसके खिलाफ 15 केस रजिस्टर्ड हुए लेकिन कभी भी कोई भी पुलिसवाला या अधिकारी उसका बाल भी बांका नहीं कर पाया। बहुत कम लोग जानते हैं कि भारत के सबसे बड़े स्टॉम्प पेपर घोटाले को अंजाम देने वाला तेलगी एड्स से भी पीड़ित था उसने एक बार सजा से बचने के लिए कोर्ट को बताया कि वो HIV पॉजिटिव है।     

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मुंबई में छपते थे फर्ज़ी स्टॉम्प पेपर

दक्षिण मुंबई के फोर्ट एरिया की मिंट बैक रोड पर ट्रांसपोर्ट और कस्टम क्लीयरिंग की तीन छोटी फर्मों वाले एक छोटे व्यावसायिक केंद्र को देखकर किसी को यह सपने में भी गुमान नहीं हो सकता था कि यही वह जगह थी जहां से देश की अर्थव्यवस्था में एक बड़ी सेंध लगाई जा रही थी। अपनी इसी खूबी के चलते ही 450 वर्ग फुट का यह इलाका सरकारी तंत्र को लगभग 20 हजार करोड़ का चूना लगाने वाले अब्दुल करीम तेलगी की काले साम्राज्य की राजधानी बना हुआ था। यहीं तेलगी की वह प्रिंटिंग प्रेस थी, जहां से देश के 12 राज्यों में बेचने के लिए भेजे गए फर्जी स्टांप पेपर छापे जाते थे। यहां दिन में तो दिखावे के तौर पर तेलगी कैलेंडर और डायरियां छापता था, मगर रात के अंधेरे में अपने काले साम्राज्य के संचालन के लिए फर्जी स्टांप पेपर तैयार करवाता था। तेलगी बैंकों, बीमा कंपनियों और ब्रोकरेज फर्मों को फर्ज़ी स्टॉम्प बेचता था 

 के साथ वो राज भी दफ़्न हो गए

नेताओं और अफसरों की शह से हुआ स्टॉम्प पेपर घोटाला 

2006 में समाचार चैनलों ने देश के सामने तेलगी के नार्को टेस्ट का फुटेज उजागर किया। फुटेज में तेलगी नार्को टेस्ट के दौरान बार बार एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार का नाम ले रहा था, तेलगी ने नार्को टेस्ट में महाराष्ट्र के दिग्गज नेता और उपमुख्यमंत्री रहे छगन भुजबल का नाम भी लिया था। तेलगी के इस खुलासे से पूरे देश में हड़कंप मच गया था। भुजबल सफाई देते घूम रहे थे कि तेलगी झूठ बोल रहा है, देश के कृषि मंत्री रहे शरद पवार भी अवाक थे कि आखिर तेलगी ने नार्को टेस्ट में उनका नाम कैसे ले लिया। सीबीआई ने साल 2004 में केस को टेकओवर किया और चार्जशीट भी फाइल की , इस केस में मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्वर आर एस शर्मा और नेता अनिल गोटे को आरोपी बनाया गया था लेकिन शरद पवार और भुजबल को नहीं। दरअसल ना्र्को टेस्ट के बाद तेलगी ने महाराष्ट्र में चीफ ज्यूडीशियल मजिस्ट्रेट के सामने इकबालिया बयान दिया और बड़े नेताओं का नाम नहीं लिया। बाद में तेलगी ने कहा कि नार्को टेस्ट में सच बोलने वाले सीरम के दुष्प्रभाव के चलते उसने शरद पवार और छगन भुजबल का नाम लिया था, उसके मुताबिक सीरम के इफेक्ट की वजह से उसके मुंह से झूठ निकला था। 

वैसे नार्को टेस्ट को किसी भी केस को मुकाम तक पहुंचाने में बहुत ज्यादा महत्तव नहीं दिया जाता लेकिन ये अजीब बात थी कि तेलगी ने शरद पवार और भुजबल का नाम लिया लेकिन बाद में पलट गया। दिलचस्प बात है कि मामले की जांच कर रही सीबीआई ने भी छगन भुजबल से पूछताछ की और बाद में उन्हें क्लीन चिट दे दी। साल 2009 में शिवसेना ने आरोप लगाया कि शरद पवार ने तेलगी से पांच करोड़ रुपए लिए थे और पवार की उपर तक पहुंच की वजह से उनका कोई कुछ नहीं कर पाया। तेलगी का नार्को टेस्ट साल 2003 में बेंगलुरु में किया गया था जिसमें तेलगी ने शरद पवार और छगन भुजबल के अलावा लोकसभा स्पीकर पी ए संगमा, महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री विलासराव देशमुख, कर्नाटक के नेता रोशन बेग और छगन भुजबल के भतीजे समीर भुजबल का नाम लिया था। तेलगी ने अपने नार्को टेस्ट में स्टॉम्प पेपर घोटाले की पूरी modus operandi यानी कार्यशैली और तरीका बताया था। न जाने ऐसा क्यों लगता है कि तेलगी कुछ बड़े नामों को बचाने के चक्कर में बलि का बकरा बन गया। हालांकि इस बात के पुख्ता सुबूत जांच एंजेसियां नहीं जुटा पाई कि शरद पवार और छगन भुजबल एंड पार्टी का स्टॉम्प पेपर घोटाले से सीधा तालुक्क था लेकिन फिर भी तेलगी का नार्को टेस्ट एक पहेली ही है। ये तेलगी ही था जो शायद मरने से पहले इस बारे में कुछ और बता सकता था लेकिन वो तो मर गया और साथ ही दफ़्न हो गए स्टॉम्प पेपर घोटाले से जुड़े अनसुलझे सवाल ... 


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कुलदीप सिंह

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