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पड़ताल : क्या है समंदर के भीतर 5000 साल पुराने हिन्दू मंदिर का सच?

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| मार्च 26 , 2018 , 16:04 IST

इंडोनेशिया के बाली द्वीप में समंदर के भीतर एक हिन्दू मंदिर इन दिनों दुनियाभर के लिए चर्चा का सबब बना हुआ है। इंडोनेशिया दुनिया में सबसे ज्यादा मुस्लिम आबादी वाला देश है। पर यहां के बाली आइलैंड में 90 फीसदी रहने वाले हिंदू हैं। ऐसा माना जाता है कि 13वीं और 16वीं सदी में मुस्लिमों के आने से पहले यहां ज्यादातर हिंदू ही रहा करते थे। यहां के बाली में सबसे ज्यादा और बेहद अनोखे मंदिर हैं। इन्हीं में से एक है पानी के अंदर मौजूद विष्णु देव का मंदिरये नॉर्थ वेस्ट बाली के पेमुतेरान बीच में समुद्र की सतह से 90 फीट नीचे मौजूद है। 

बाली के हिन्दू मंदिर का रहस्य क्या है?

1991 में एक ऑस्ट्रेलियाई आदमी क्रिस ब्राउन ने स्थानीय लोगों की मदद से समुद्री वनस्पति और जीव के संरक्षण के लिए काम शुरू किया था। उन्होंने प्रवाल भित्तियों (कोरल रीफ )की सुरक्षा के लिए रीफ गार्डन रिजर्व प्रोजेक्ट शुरू किया था। अधिक से अधिक लोगों को गहरे पानी की खोज में रुचि मिले इसलिए उन्होंने स्कूबा डाइविंग प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू कर दिया। पानी को साफ करते ही , स्थानीय मछली पकड़ने के व्यवसाय को कामयाबी मिली ।

संरक्षण का कार्य प्रगति पर था, जब क्रिस ब्राउन को यह लगा की मानव को अपने आध्यात्मिक पक्ष के साथ संपर्क में रहने के लिए पानी के नीचे एक मंदिर बनाने का फैसला किया। इसलिए एक पानी के नीचे मंदिर गार्डन बनाया गया जिसमे देवताओं और बुद्ध, सरस्वती और गणेश की पत्थर की मूर्तिया है। रंग बिरंगी समुद्री पौधे और पत्थरो से यह बगीचा सज्जित है।

यह मंदिरपानी के नीचे ३० मीटर गहरी है और ऑक्सीजन इस गहराई में बहुत तेजी से शेष हो जाता है। इसलिए, यहाँ अनुभवी स्कूबा गोताखोर द्वारा ही पहुँचा जा सकता है। हालांकि, हाल ही में एक और मंदिर में 15 मीटर की गहराई पर भी निर्माण किया गया है। इस क्षेत्र को उपयुक्त रूप से "देवताओं के गार्डन (बगीचा)" कहा जाता है। 

इस मंदिर को लेकर देश की राजधानी जर्काता के कुछ इंटरनेट पोर्टल्स और टीवी स्टेशन ने इस अमेजिंग साइट की न्यूज दिखानी शुरू कर दी थी। इतना ही नहीं इस जगह को मंदिर का प्राचीन खंडहर होने का दावा करने लगे थे। जब इसके बारे में जानकारी इंडोनेशियन मिनिस्ट्री ऑफ कल्चर और टूरिज्म के पास पहुंचीं, तो एक्वेटिक आर्कियोलॉजी डिपार्टमेंट के डायरेक्टर सूर्या हेल्मी ने इसके बारे में जानकारी पब्लिश कराकर अफवाह दूर करने की कोशिश की।

 


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