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नीतीश के 'सुशासन' में बालिका गृह को यातना गृह बनाने वाला ब्रजेश ठाकुर कौन है? ये है पूरी कुंडली

अमितेष युवराज सिंह | न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 34
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| अगस्त 2 , 2018 , 21:03 IST

बिहार के मुजफ्फरपुर में हुए बालिका गृह यौन शोषण कांड को लेकर पूरा देश शर्मसार है। इस बालिका गृह में जिस तरीके से बेटियों की अस्मत का सौदा किया गया उससे हर कोई हैरतअंगेज है। इस पूरे कांड का मास्टरमाइंड ब्रजेश ठाकुर है। ब्रजेश ठाकुर अपने कुकृत्य की वजह से देशभर में चर्चा में है। आखिर कौन है यह ब्रजेश ठाकुर जिसने बेटियों को बालिका गृह से यातना गृह में पहुंचा दिया।

ब्रजेश ठाकुर मूल रूप से मुजफ्फरपुर जिले के पचदही गांव का रहने वाला है। पचदही गांव मुजफ्फरपुर शहर से करीब 15 किलोमीटर की दूरी पर है। ब्रजेश ठाकुर बालिका गृह की आड़ में लड़कियों के शोषण का जो खेल खेल रहा था उसमें उसके एनजीओ का बड़ा हाथ था। उसके एनजीओ सेवा संकल्प एवं विकास समिति को बालिका गृह चलाने का जिम्मा बिहार सरकार ने सौंपा था।

ब्रजेश की दिली तमन्ना तो वैसे सफल राजनेता बनने की थी लेकिन वह बन नहीं पाया। राजनीति में असफल रहने के बाद ब्रजेश ठाकुर के सितारे बहुत तेजी से चमके। ब्रजेश ने तीन समाचार पत्र शुरू किए और अपने बेटे तथा बेटी को इसका संपादक बना दिया। पांच साल पहले उसने एनजीओ की दुनिया में कदम रखा और सरकारी ठेके तथा विज्ञापन  हथिया कर मुजफ्फरपुर और पटना में अपना वर्चस्‍व स्‍थापित किया।

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(फाइल फोटो)

दरअसल, ब्रजेश ठाकुर के पिता राधामोहन ठाकुर ने 1982 में मुजफ्फरपुर से हिंदी अखबार 'प्रत्यय कमल' (आज का प्रात: कमल) शुरू किया था। इससे राधामोहन ठाकुर की पत्रकारों के बीच अच्छी पहुंच थी। राधामोहन ठाकुर ने इससे खूब पैसे बनाए और फिर उसे रियल स्टेट में लगा दिया। जब पिता राधामोहन ठाकुर की मौत हो गई तो विरासत संभालने का जिम्मा ब्रजेश ठाकुर के कंधों पर आया। पैसे पहले से ही थे और पिता का रसूख भी। इसलिए ब्रजेश के हाथ में कमान आते ही उसने कारोबार से एक कदम आगे बढ़कर राजनीति में हाथ आजमाना शुरू कर दिया।

ब्रजेश ठाकुर के इतिहास पर नजर डालें तो पता चलता है कि 1993 में जब बिहार के चर्चित नेता आनंद मोहन ने जनता दल से अलग होकर अपनी पार्टी बिहार पीपल्स पार्टी बनाई तो ब्रजेश ठाकुर उसमें शामिल हो गया। 1995 में बिहार में विधानसभा के चुनाव हुए, तो ब्रजेश कुढ़नी विधानसभा सीट से बिहार पीपल्स पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ा, लेकिन उसे जीत नहीं मिली। साल 2000 के विधानसभा चुनाव में भी ब्रजेश फिर से कुढ़नी से ही चुनाव लड़ने उतरा लेकिन वो इस बार भी वो जीत नहीं सका।

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(फाइल फोटो)

ब्रजेश ठाकुर चुनाव जरूर हार गया लेकिन उसकी सत्ता के गलियारों में पहुंच बन गई और इसी रसूख के दम पर वो आगे बढ़ता गया। ब्रजेश के सियासी रसूख का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि प्रात: कमल जैसे छोटे अखबार को भारी सरकारी विज्ञापन मिलने लगे और उसे बिहार सरकार की ओर से मान्यता प्राप्त पत्रकार होने का तमगा भी मिल गया।

बाद में ब्रजेश ठाकुर ने अपने अखबार प्रात: कमल का मालिक और संपादक अपने बेटे राहुल आनंद को बना दिया। कागज़ात के मुताबिक ब्रजेश खुद उस अखबार में सिर्फ पत्रकार है। ब्रजेश ठाकुर ने अपने बेटे राहुल आनंद को 2016 में जिला परिषद के चुनाव में सकरा से मैदान में उतारा लेकिन चुनाव में बेटे को भी हार का सामना करना पड़ा।

साल 2013 में ब्रजेश ने अपना एनजीओ सेवा संकल्‍प और विकास समिति शुरू किया और उसे मुजफ्फरपुर में बिहार सरकार की ओर से संचालित चाइल्‍ड शेल्‍टर होम को संचालित करने का ठेका मिल गया। इसी बालिका गृह में 34 बच्चियों के साथ यौनशोषण होने की पुष्टि हुई है।

कैसे हुआ 'पाप' का खुलासा

फरवरी 2018 में टाटा इंस्टिट्यूट ऑफ सोशल साइंस (टिस) ने बिहार के बालिका गृहों की स्थिति की ऑडिट रिपोर्ट राज्य के समाज कल्याण विभाग को सौंपी थी, जिसमें लड़कियों के साथ यौन शोषण होने की जानकारी दी थी। इसके बाद पूरे मामले का भंडाफोड़ हुआ और मामला सीबीआई जांच तक पहुंच गया।


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