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'सर्वश्रेष्ठ सांसद' सोमनाथ चटर्जी के लिए राष्ट्रहित हमेशा रहा सर्वोपरि, जानें कुछ अनसुनी बातें

आशुतोष कुमार राय, न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
2019
| अगस्त 13 , 2018 , 14:33 IST

प्रखर वक्ता, उत्कृष्ट सांसद और मजबूत नेता सोमनाथ चटर्जी का 89 साल की उम्र में निधन हो गया। किडनी की बीमारी के चलते लंबे समय से अस्पताल में भर्ती सोमनाथ चटर्जी डायलिसिस पर उनका शरीर टिका था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कांग्रेस अध्‍यक्ष राहुल गांधी ने सोमनाथ चटर्जी के निधन पर शोक जताया है।

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(File photo)

सोमनाथ चटर्जी के लिए राष्ट्रहित रहा सर्वोपरि-:

सोमनाथ चटर्जी के लिए राष्‍ट्रहित सर्वोपरि रहा। उन्‍होंने दलगत राजनीति का हिस्‍सा होते हुए भी इसे अपने ऊपर कभी हावी नहीं होने दिया। वह जब तक लोकसभा के स्‍पीकर रहे, सदैव संसद की गरिमा को बनाए रखने के लिए प्रयासरत रहे।

श्रमिक नेता ने कैम्ब्रिज में भी की थी पढ़ाई-:

सोमनाथ चटर्जी का जन्म असम के तेजपुर में 25 जुलाई, 1929 को हुआ था। वह मशहूर वकील और हिंदू महासभा के संस्थापक अध्यक्ष निर्मलचंद्र चटर्जी के पुत्र थे। उनकी शुरुआती पढ़ाई कोलकाता और उच्‍च शिक्षा कैम्ब्रिज विश्‍वविद्यालय में हुई। श्रमिक नेता और वकील सोमनाथ जी प्रभावशाली वक्ता हैं। वह 1989 से 2004 तक लोकसभा में सीपीएम संसदीय दल के नेता रहे। 2004 में वह सर्वसम्मति से लोकसभा के स्पीकर चुने गए थे।

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सोमनाथ चटर्जी से जुड़ी कुछ विशेष बातें-:

-: सोमनाथ चटर्जी का जन्म 25 जुलाई 1929 को असम के तेजपुर में हुआ था. उनके पिता का निर्मल चंद्र चटर्जी और मां का नाम वीणापाणि देवी था। सोमनाथ चटर्जी के पिता अखिल भारतीय हिंदू महासभा के संस्थाकों में से थे एक थे और पेश से वकील थे।

-: सोमनाथ चटर्जी ने कोलकाता और ब्रिटेन में पढ़ाई की। ब्रिटेन के मिडिल टैंपल से लॉ की पढ़ाई करने के बाद कलकत्ता हाईकोर्ट वकील हो गये। लेकिन इसके बाद उन्होंने राजनीति में आने का फैसला किया। वह एक प्रखर वक्ता के तौर पर लोगों की नजरों में आ चुके थे।

-: सोमनाथ चटर्जी का राजनीतिक जीवन विरोधाभाषों के साथ शुरू हुआ। उनके पिता जहां दक्षिणपंथी राजनीति से थे तो सोमनाथ ने करियर की शुरुआत सीपीएम के साथ 1968 में की।

-: 1971 में पहली बार वह सांसद चुने गये और फिर 10 बार लोकसभा के सांसद बने. राजनीति में सोमनाथ चटर्जी एक बहुत ही सम्मान नेता के तौर पर देखा जाता है।

-: सोमनाथ चटर्जी की पत्नी का नाम रेणु चटर्जी है। उनके परिवार में एक पुत्र और दो पुत्रियां हैं।

-: 1971 से सांसद चुने जाने के बाद वह हर लोकसभा के लिये चुने गये। साल 2004 में वह 10वीं बार लोकसभा के लिये चुने गये।

-: उन्होंने 35 सालों तक सांसद के तौर पर देश की सेवा की और 1996 में उन्हें सर्वश्रेष्ठ सांसद के पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

-: साल 2004 में 14वीं लोकसभा के लिये उन्हें सभी दलों की सहमति से लोकसभा का अध्यक्ष चुना गया।

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विदेश दौरे पर अपने जेब से उठाते थे परिवार का खर्च-:

सोमनाथ चटजी उसूलों के पक्‍के और बेहद ईमानदार शख्‍स थे। जब उनका सरकारी कामों के लिए विदेश जाना होता था, तो वह अपने परिजन का पूरा खर्च अपनी जेब से देते थे। इतना ही नहीं स्पीकर की जिम्मेदारी संभालते समय भी उन्होंने अपने सरकारी आवास पर पहले से हो रहे कुछ गैर जरूरी सरकारी खर्चों में कटौती कर दी थी। देशहित में सोचने वाले ऐसे नेता बेहद कम हैं।

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पार्टी लाइन से भी अलग-:

जब सोमनाथ चटर्जी ने लोकसभा के स्पीकर पद से इस्तीफा देने के पार्टी के निर्देश को मानने से इनकार कर दिया तो पॉलित ब्यूरो ने 2008 में सोमनाथजी को सीपीएम से निकाल दिया। याद रहे कि भारत-अमेरिका न्यूक्लियर समझौता विधेयक के विरोध में सीपीएम ने मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार से समर्थन वापस ले लिया था। तब पार्टी ने उन्हें स्पीकर पद छोड़ने को कहा।

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पद नहीं छोड़ने के चटर्जी साहब के अपने तर्क थे। याद रहे कि वह दस बार लोक सभा के सदस्य चुने गये थे। वह संभवतः स्पीकर के पद को वह ऐसा नहीं मानते थे जिस पर किसी पार्टी का आदेश चले। सोमनाथजी सिर्फ एक बार 1984 के लोस चुनाव में ममता बनर्जी से हारे थे।

अंतिम इच्छा-:

सोमनाथ चटर्जी को भले पार्टी ने निकाल दिया, पर उनका सीपीएम से भावनात्मक संबंध बना रहा। एक बार उन्होंने कहा था कि मेरी इच्छा है कि मेरी अंतिम यात्रा लाल झंडे के साथ ही पूरी हो। जानकार सूत्रों के अनुसार कुछ औपचारिकताएं पूरी नहीं होने के कारण ऐसा नहीं हो पा रहा है।


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