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Good Friday: आज ही के दिन प्रभु यीशु ने दिया था प्राणों का बलिदान, जान‍ें पूरा इतिहास

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| मार्च 30 , 2018 , 13:38 IST

आज पूरे देश-विदेश में गुड फ्राइडे का पर्व मनाया जा रहा है। ईसाई धर्म में गुड फ्राइडे का विशेष महत्‍व है। गुड फ्राइडे को होली फ्राइडे, ब्‍लैक फ्राइडे या ग्रेट फ्राइडे के नाम से भी जाना जाता है। माना गया है कि इसी दिन ईसाइयों के प्रभु यीशु ने मानवता की रक्षा के लिए अपने प्राणों का बलिदान दिया था। गुड फ्राइडे हर साल अप्रैल या मई महीने में मनाया जाता है। इस दिन ईसाई धर्म को मानने वाले चर्च जाकर प्रभु यीशु को याद करते हैं।

क्‍या है गुड फ्राइडे?

ईसाई धर्म ग्रंथों के अनुसार यीशु को बिना किसी दोष, क्रॉस पर लटका कर मारने का दंड दिया गया था। अपने हत्‍यारों की उपेक्षा करने के बजाए यीशु ने उनके लिए प्रार्थना करते हुए कहा था, 'हे ईश्‍वर! इन्‍हें क्षमा कर क्‍योंकि ये नहीं जानते कि ये क्‍या कर रहे हैं’। जिस दिन ईसा मसीह की हत्या की गई थी उस दिन फ्राइडे यानी कि शुक्रवार था, तब से उस दिन को गुड फ्राइडे कहा जाता है। ये भी माना जाता है कि क्रॉस पर लटकाए जाने के तीन दिन बाद रविवार को ईसा मसीह ने फिर से जन्म लिया था। इस दिन को ईस्‍टर संडे कहा जाता है।

 

कैसे मनाते हैं गुड फ्राइडे?

गुड फ्राइडे की तैयारी प्रार्थना और उपवास के रूप में 40 दिन पहले ही शुरू हो जाती है। गुड फ्राइडे के दिन ईसाई धर्म को मानने वाले अनुयायी गिरजाघर जाकर प्रभु यीशु को याद करते हैं। इस दिन लोग उपवास के साथ प्रार्थना और मनन करते हैं। चर्च और घरों से सजावट की वस्तुएं हटा ली जाती हैं।

ईसा मसीह को क्रॉस पर क्‍यों लटकाया गया?

ईसाई धर्म के अनुसार ईसा मसीह परमेश्वर के पुत्र थे। उन्‍हें मृत्‍यु दंड इसलिए दिया गया था क्‍योंकि वो अज्ञानता के अंधकार को दूर करने के लिए लोगों को शिक्षित और जागरुक कर रहे थे, उस वक्‍त यहूदियों के कट्टरपंथी रब्‍बियों यानी धर्मगुरुओं ने यीशु का विरोध किया था। धर्मगुरुओं ने उस समय के रोमन गवर्नर पिलातुस से यीशु की शिकायत की थी, जिसके कारन पिलातुस ने यीशु को क्रॉस पर लटकाकर जान से मारने का आदेश दिया था। 

मौत से पहले यीशु को ढेरों यातनाएं दी गईं, उनके सिर पर कांटों का ताज रखा गया। इसके बाद यीशु को गोल गोथा नाम की जगह ले जाकर सलीब पर चढ़ा दिया गया। प्राण त्‍यागने से पहले यीशु ने कहा था, 'हे ईश्‍वर! मैं अपनी आत्‍मा को तेरे हाथों में सौंपत हूं’।


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