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आज से शुरू हुआ महापर्व नवरात्र, जानें कलश स्थापना मुहूर्त और पूजन विधि

icon अमितेष युवराज सिंह | 0
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| सितंबर 21 , 2017 , 10:18 IST

नवरात्रि हिन्दुओं का एक प्रमुख त्योहार है। साल में दो बार ये पूरे भारत में मनाया जाता है। इस बार शारदीय नवरात्र 21 सितंबर से शुरू हो रहे हैं। नौ दिनों तक चलने वाले इस महापर्व का आख‍िरी उपवास यानी नवमी 29 सितंबर को होगी।

इस दौरान मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है, नवरात्री के पहले दिन मां 'शैलपुत्री' की पूजा की जाती है। पर्वतराज हिमालय के घर पुत्री रूप में उत्पन्न होने के कारण इनका नाम 'शैलपुत्री' पड़ा। दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा-अर्चना की जाती है। नवरात्रि उपासना में तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा की जाती है । चौथे दिन कूष्माण्डा देवी और पांचवाें दिन स्कंदमाता की उपासना की जाती है। छठवें दिन देवी कात्यायनी की पूजा की जाती है। दुर्गापूजा के सातवें दिन मां कालरात्रि की उपासना का विधान है। दुर्गापूजा के आठवें दिन महागौरी और सिद्धयात्री मां की पूजा की जाती है।

नवरात्र के पहले दिन करें मां शैलपुत्री की पूजा-

शारदीय नवरात्र के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा होती है। माना जाता है कि देवी के इस रूप का नाम शैलपुत्री इसलिए पड़ा क्योंकि उनका जन्म हिमालय के यहां हुआ था। मां शैलपुत्री को अखंड सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है। अगर हमारे जीवन में स्थिरता और शक्ति की कमी है तो मां शैलपुत्री की पूजा अवश्य करनी चाहिए। महिलाओं के लिए तो मां शैलपुत्री की पूजा काफी शुभ मानी गई है। नवरात्र के पहले दिन घट स्थापना करें और उस दिन व्रत करने का संकल्प लें। घट स्थापना प्रतिपदा तिथि को की जाती है। घट यानि कलश..इसे भगवान गणेश का रूप माना जाता है और किसी भी तरह की पूजा में सबसे पहले पूजा जाता है।

कलश स्‍थापना का मुहूर्त -

नवरात्रों में कलश स्‍थापना का व‍िशेष महत्‍व है। कलश की स्‍थापना करने से परेशानियां दूर होती हैं और घर में खुशहाली व संपन्‍नता आती है। कलश स्‍थापना के साथ ही नवरात्र के व्रत की शुरुआत होती है। इस बार कलश स्‍थापना का शुभ मुहूर्त 21 सितंबर की सुबह 6 बजकर 3 मिनट से 8 बजकर 22 मिनट तक रहेगा। वैसे कलश स्‍थापना का दूसरा शुभ मुहूर्त भी है। आप 21 सितंबर की सुबह 11 बजकर 36 मिनट से 12 बजकर 24 मिनट तक भी कलश स्‍थापना कर सकते हैं। इस दिन चाहे कलश में जौ बोकर मां का आह्वान करें या नौ दिन के व्रत का संकल्प लेकर ज्योति कलश की स्थापना करें।

कलश स्‍थापना के लिए जरूरी सामान-

मां दुर्गा को लाल रंग खास पसंद है इसलिए लाल रंग का ही आसन खरीदें. इसके अलावा कलश स्‍थापना के लिए मिट्टी का पात्र, जौ, मिट्टी, जल से भरा हुआ कलश, मौली, इलायची, लौंग, कपूर, रोली, साबुत सुपारी, साबुत चावल, सिक्‍के, अशोक या आम के पांच पत्ते, नारियल, चुनरी, सिंदूर, फल-फूल, फूलों की माला और श्रृंगार पिटारी भी चाहिए।

ऐसे करें कलश स्‍थापना-

कलश स्थापना के लिए सबसे पहले एक पाटे पर लाल कपड़ा ब‍िछाकर थोड़े से चावल रखें। ये चावल गणेश जी के प्रतीक स्‍वरूप होते हैं। इसके बाद मिट्टी, तांबा, पीतल, सोना या चांदी जिस का भी संभव हो उसका कलश रखें। उस कलश में मिट्टी भरें और साथ ही उसमें थोड़े से समूचे जौ भी डाल दें। इसके बाद कलश पर रोली से स्वास्तिक बना कर मौलि यानी क‍ि रक्षा सूत्र से बांध दें। फ‍िर नार‍ियल व आम के पत्‍ते रखते हुए कलश के ढक्कन को चावल से भर दें। इसके बाद उस पर फल, म‍िठाई पान, सुपारी, पैसे आद‍ि चढ़ाकर दीप जलाएं।

देवी पूजन का शुभ मुहूर्त-

संकल्‍प लेने के बाद नौ दिन तक रोजाना मां दुर्गा का पूजन और उपवास करें। इस बार अभिजीत मुर्हूत सुबह 11 बजकर 36 मिनट से शुरू होकर 12 बजकर 24 मिनट तक है। आपको बता दें कि ज्योतिष शास्त्र के अनुसार अभिजीत मुहूर्त दिन का सबसे शुभ मुहूर्त माना जाता है। प्रत्येक दिन का आठवां मुहूर्त अभिजीत मुहूर्त कहलाता है। सामान्यत: यह 45 मिनट का होता है। मान्‍यता है कि अगर अभिजीत मुहूर्त में पूजन कर कोई भी शुभ मनोकामना की जाए तो वह निश्चित रूप से पूरी होती है। वहीं, देवी बोधन 26 सितंबर को होगा और इसी दिन मां दुर्गा के पंडालों के पट खोले जाएंगे।

भूलकर भी नवरात्र में न करें ये काम -

- नवरात्रि का व्रत रखने वालों को इस दौरान न ही अपने बाल कटवाने चाहिए और शेविंग भी नहीं करवानी नहीं चाहिए।
- यदि आप इस दौरान कलश की स्‍थापना करते हैं और अखंड ज्योति जला रहे हैं तो इस समय घर को खाली छोड़कर कहीं भी न जाएं।
- नवरात्रि में नॉन वेज, प्याज, लहसुन आदि की मनाही होती है।
-नवरात्रि के पूरे नौ दिन तक नींबू काटना अशुभ माना जाता है। 
- नवरात्रि के इन नौ दिनों में दोपहर के समय सोना नहीं चाहिए।


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अमितेष युवराज सिंह

लेखक न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में असिस्टेंट एग्जीक्यूटिव एडिटर हैं

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