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नेस्ले के वकील ने सुप्रीम कोर्ट में कबूला, मैगी नूडल्‍स में लेड था

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| जनवरी 4 , 2019 , 15:22 IST

मैगी को लेकर विवाद एक बार फिर गरमा गया है। गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट मे सुनवाई को दौरान नेस्ले के वकील ने पहली बार माना कि 2015 में मैगी में लेड यानि सीसा की मात्रा तय सीमा से ज्यादा थी। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को तीन साल बाद इस मामले में फिर से कार्रवाई की इजाज़त भी सरकार को दी है। जिससे नेस्ले को बड़ा झटका लगा है। अब एक बात साफ है कि 2015 में इस पूरे विवाद को उठाने और नेस्ले पर हर्जाना मांगने वाली सरकार एक बार फिर नेस्ले से दो-दो हाथ के पूरे मूड में है। एक बार फिर सरकार और नेस्ले आमने-सामने होगी।

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न्यायमूर्ति धनंजय वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति हेमंत गुप्ता की पीठ ने कहा कि इस मामले में केंद्रीय खाद्य प्रौद्योगिकीय अनुसंधान संस्थान (सीएफटीआरआई) मैसूरू की रिपोर्ट कार्यवाही का आधार होगी। इसी संस्थान में मैगी के नमूनों की जांच की गई थी। सीएफटीआरआई मैसूरू में मैगी की जांच में लेड की मात्रा अधिक पाई गई थी।

क्या है पूरा मामला

मैगी पर पूरा विवाद 2015 में सामने आया था जब उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने नेस्ले इंडिया के खिलाफ एनसीडीआरसी में शिकायत की थी और 640 करोड़ रुपए का हर्जाना भी मांगा था। लेकिन सरकार के इस शिकायत पर नेस्ले इंडिया ने आपत्ति जताई और उसके वकीलों का कहना था कि मैगी में तय मानक से ज्यादा लेड मौजूद नहीं है।

नेस्ले ने माना मैगी में ज़रूरत से ज्यादा लेड

तब सुप्रीम कोर्ट ने एनएसडीआरसी की ओर से की जा रही सुनवाई पर रोक लगाई थी। हलांकि इस दौरान मैगी का पूरे देश में भारी विरोध हुआ था। धीरे धीरे नेस्ले ने दोबारा उपभोक्ताओं को विश्वास में लिया था लेकिन अब वकीलों ने साफ मान लिया है कि उस वक्त मैगी में ज़रूरत से ज्यादा लेड मौजूद था।


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