नेशनल

अयोध्या विवाद पर एक और नई तारीख, 29 जनवरी को अगली सुनवाई

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
1700
| जनवरी 10 , 2019 , 11:20 IST

सुप्रीम कोर्ट की 5 जजों की संविधान पीठ गुरुवार से अयोध्या में राम जन्म भूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद मामले की सुनवाई करेगी। इस बेंच का नेतृत्व चीफ जस्टिस रंजन गोगोई करेंगे। उनके अलावा इस पीठ में 4 अन्य जज भी शामिल होंगे। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई के अलावा जस्टिस एस.ए. बोब्डे, जस्टिस एन.वी. रमन्ना, जस्टिस यू.यू. ललित और जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ इस मामले पर आज से सुनवाई शुरू करेंगे। बता दें कि 6 जनवरी को अदालत ने इस मसले पर सुनवाई करते हुए इसके लिए बेंच गठित करने की बात कही थी।

जब यह मामला 4 जनवरी को सुनवाई के लिए आया था तो इस बात का कोई संकेत नहीं था कि भूमि विवाद मामले को संविधान पीठ को भेजा जाएगा क्योंकि शीर्ष अदालत ने बस इतना कहा था कि इस मामले में गठित होने वाली उचित बेंच 10 जनवरी को अगला आदेश देगी।

सुनवाई से सियासी बयानबाजी तेज

श्रीराम जन्मभूमि और बाबरी मस्जिद जमीन विवाद पर सुप्रीम सुनवाई से पहले बयानाबाजी भी शुरु हो गई है। अनेक हिंदू संगठन विवादित स्थल पर राम मंदिर का जल्द निर्माण करने के लिए अध्यादेश लाने की मांग कर रहे हैं। वहीं, बीजेपी के सहयोगी और केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान ने गुरुवार को राम मंदिर मुद्दे पर अध्यादेश का विरोध किया। उन्होंने कहा कि मामले में सुप्रीम कोर्ट का निर्णय अंतिम होना चाहिए।

न्यायिक प्रक्रिया के बाद अध्यादेश

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा था कि अयोध्या में राम मंदिर के मामले में न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही अध्यादेश लाने के बारे में निर्णय किया जा सकता है। प्रधानमंत्री मोदी के इस बयान के बाद संघ, विहिप, शिवसेना समेत तमाम हिंदू संगठनों ने कहा कि अयोध्या में राम मंदिर ही बनेगा, सरकार राम मंदिर पर अध्यादेश लाकर मंदिर का निर्माण कराए।

इलाबाहाद हाईकोर्ट का फैसला

बता दें कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सितंबर 2010 में अपने फैसले में 2.77 एकड़ भूमि का सुन्नी वक्फ बोर्ड, निर्मोही अखाड़ा और राम लला के बीच समान रूप से बंटवारा करने का आदेश दिया था।

सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल 29 अक्टूबर को कहा था कि यह मामला जनवरी के प्रथम सप्ताह में उचित पीठ के समक्ष सूचीबद्ध होगा, जो इसकी सुनवाई का कार्यक्रम निर्धारित करेगी। बाद में अखिल भारत हिन्दू महासभा ने एक अर्जी दायर कर सुनवाई की तारीख पहले करने का अनुरोध किया था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने ऐसा करने से इंकार कर दिया था।


कमेंट करें