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केरल में निपाह वायरस की वजह से 2 और मौतें, अब तक 15 लोगों ने तोड़ा दम

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| मई 31 , 2018 , 08:30 IST

केरल में निपाह वायरस की पकड़ में आकर मरने वालों की संख्या लगातार बढ़ती ही जा रही है। बुधवार को यहां दो और लोगों की मौत के बाद निपाह वायरस से मौत का आंकड़ा 15 हो गया। कोझिकोड डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में पेशे से वकील 55 साल के पी. मधुसूदन और 28 वर्षीय अखिल अलग-अलग अस्पताल में भर्ती थे और दोनों ने आखिरकार दम तोड़ दिया।

अधिकारियों के लिए परेशानी की बात यह है कि अखिल निपाह से पीड़ित इलाके के नहीं थे। ऐसे में उनकी मौत ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। अभी 9 और लोग निपाह से संक्रमित हैं और उन्हें अस्पतालों में भर्ती कराया गया है।

फौजी की मौत का वजह बना निपाह वायरस-:

इधर, कोलकाता के फोर्ट विलियम में तैनात केरल के एक सैनिक की संदिग्ध निपाह वायरस के संक्रमण से मौत हो गई। रक्षा प्रवक्ता ने बताया कि 28 वर्षीय सैनिक को कमान अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां पांच दिन बाद उसकी मौत हो गई।

पलक्कड़ जिले के रहने वाले सीनू प्रसाद का शव केरल नहीं लाया गया और कोलकाता में ही उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया।

प्रवक्ता ने बताया कि सैनिक के अभिभावक और पत्नी अंतिम संस्कार में शामिल हुए। वह केरल में एक महीने की छुट्टी पर आया था और उन्होंने 13 मई को ड्यूटी ज्वाइन की थी। हालांकि, आर्मी अब टिश्यू रिपोर्ट का इंतजार कर रही है, जिससे यह पता लगाया जा सके कि क्या वास्तव में उस फौजी की मौत निपाह वायरस से हुई।

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बांग्लादेश में हैं निपाह वायरस की जड़ें-:

इस बीच नैशनल इंस्टिट्यूट ऑफ वायरॉलजी (एनआईवी) ने पुष्टि की है कि केरल में जिस निपाह वायरस ने हाहाकार मचाया है और लोगों की जानें ली हैं, उसकी जड़ें बांग्लादेश में हैं। वायरस से पीड़ित मरीजों के बलगम की जांच के दौरान यह सामने आया कि केरल में बांग्लादेश टाइप के निपाह वायरस ने लोगों को अपनी गिरफ्त में लिया।

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दरअसल निपाह वायरस को दो भागों में बांटा गया है। एक प्रकार है मलयेशिया (NiVM) और दूसरा है बांग्लादेश पैटर्न (NiVB)। वैज्ञानिकों के मुताबिक, ये दोनों पैटर्न ही निपाह वायरस के सबसे खतरनाक प्रकार हैं, और इनकी मृत्यु दर 60 फीसदी से 85 फीसदी तक है।

क्या है निपाह वायरस...?

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ) के मुताबिक, निपाह वायरस चमगादड़ से फलों में और फलों से इंसानों और जानवरों पर आक्रमण करता है। 
1998 में पहली बार मलेशिया के कांपुंग सुंगई निपाह में इसके मामले सामने आए थे। इसीलिए इसे निपाह वायरस नाम दिया गया।

पहले इसका असर सुअरों में देखा गया। 2004 में यह बांग्लादेश में इस वायरस के प्रकोप के मामले सामने आए थे। बताया जा रहा है कि केरल में यह पहली बार फैला है।

कैसे पहचाने लक्षण...?

इस वायरस से प्रभावित शख्स को सांस लेने की दिक्कत होती है।

वायरस के प्रभाव से दिमाग में जलन महसूस होती है।

वायरस के प्रभाव से तेज बुखार आता है।

वक्त पर इलाज नहीं मिलने पर मौत हो जाती है।


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