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हांगकांग में छिपा है नीरव मोदी, सरकार ने तत्काल गिरफ्तारी का किया अनुरोध

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| अप्रैल 6 , 2018 , 08:38 IST

पीएनबी घोटाले का मुख्य आरोपी नीरव मोदी हांगकांग में छिपा है। विदेश मंत्रालय ने नीरव मोदी की अस्थायी गिरफ्तारी के लिए हांगकांग की सरकार से अनुरोध किया है। राज्यसभा में विदेश राज्य मंत्री वीके सिंह ने यह जानकारी दी है।

ताजा लोकेशन हांगकांग से मिली है

14,400 करोड़ के पीएनबी घोटाले का मुख्य आरोपी नीरव मोदी की ताजा लोकेशन हांगकांग में मिली है। वीके सिंह ने बताया कि इस जानकारी के बाद पिछले माह यानी 23 मार्च 2018 को नीरव मोदी की अस्थायी गिरफ्तारी के लिए हांगकांग की सरकार को लिखित में अनुरोध किया था।

इंटरपोल से भारत सरकार ने मांगी मदद

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने नीरव मोदी और उसके परिवार को ढूंढने के लिए इंटरपोल से मदद मांगी है। सूत्रों के मुताबिक, एजेंसी ने मार्च में ही इंटरपोल से नीरव मोदी को ढूंढने और उसे गिरफ्तार करने का अनुरोध किया था, जो जनवरी के पहले हफ्ते से ही अपने परिवार के साथ देश से फरार है। इसके कुछ ही हफ्तों बाद केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को इस घोटाले की सूचना दी गई थी, जो इस मामले में आपराधिक कदाचार की जांच कर रहा है।

नीरव और मेहुल के खिलाफ सीबीआई कर रही जांच

पीएनबी को धोखा देने के मामले में गीतांजलि समूह के प्रमुख नीरव मोदी और उसके व्यापारिक सहयोगी और मामा मेहुल चौकसी के खिलाफ ईडी और सीबीआई की जांच चल रही है, जिसके तहत यह कदम उठाया गया है। 16 फरवरी को विदेश मंत्रालय ने मोदी और मेहुल चोकसी को कारण बताओ नोटिस जारी किया था।

पीएनबी का 13,500 करोड़ लेकर फरार है नीरव मोदी

2013 से ही नीरव मोदी के समूह की कंपनियों- डायमंड आर यूएस, स्टीलर डायमंड और सोलर एक्सपोर्ट्स और अन्य के समृद्ध और जानेमाने भारतीय खरीदार रहे हैं। पीएनबी ने नीरव मोदी और उसके समूह की कंपनियों द्वारा 13,500 करोड़ रुपये के घोटाले की सूचना दी थी, जिसमें देश के बैंकिंग प्रणाली में बड़े पैमाने पर उथल-पुथल मचा दी है।

सीबीआई ने भी नीरव मोदी को ढूंढने के लिए फरवरी में इंटरपोल से संपर्क किया था। नीरव मोदी की पत्नी अमी एक अमेरिकी नागरिक है, जिसने 6 जनवरी को देश छोड़ दिया था और नीरव मोदी के मामा चोकसी ने 4 जनवरी को देश छोड़ दिया था।
सीबीआई को दी गई विभिन्न शिकायतों में पीएनबी ने दावा किया है कि उसके अधिकारियों को नीरव मोदी को कई लेटर ऑफ अंडरटेकिंग (एलओयू) जारी किए गए, जिससे बैंक को भारी नुकसान हुआ है। एलओयू एक बैंक की शाखा द्वारा अन्य बैंकों को जारी किया जाता है, जिसके आधार विदेशी शाखाओं द्वारा खरीदार को कर्ज दिया जाता है, जिसकी जिम्मेदारी एलओयू जारी करनेवाले बैंक की होती है।


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