राजनीति

लोकसभा में मोदी सरकार की पहली परीक्षा आज, TDP-YSR लाएगी अविश्वास प्रस्ताव

icon अमितेष युवराज सिंह | 0
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| मार्च 19 , 2018 , 08:23 IST

नरेंद्र मोदी सरकार के खिलाफ वाईएसआर कांग्रेस और तेलगु देशम पार्टी आज लोकसभा में अपना अविश्वास प्रस्ताव लाने पर एक बार फिर जोर देगी। वाईएसआर कांग्रेस के वाईवी सुब्बा रेड्डी ने लोकसभा सचिवालय को सोमवार की वर्क लिस्ट उनका नोटिस रखने के लिए पत्र लिखा है। वहीं टीडीपी ने भी मोदी सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव के लिए अलग से नोटिस दिया है। हालांकि इस बीच संसद की कार्यवाही में गतिरोध दूर होने का कोई संकेत नजर नहीं आ रहा।

ये लड़ाई आंध्र प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा न देने से शुरू हुई। जब ये मांग पूरी न होने पर चंद्रबाबू नायडू की टीडीपी के कोटे से केंद्र में दोनों मंत्रियों ने इस्तीफा दे दिया। इसके बाद से वो लगातार संसद में मोदी सरकार का विरोध कर रहे हैं। अब जब टीडीपी ने मोदी सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की तैयारी की तो उसे विरोधी वाईएसआर कांग्रेस समेत कांग्रेस, आरजेडी और लेफ्ट का भी समर्थन मिल गया।

इससे पहले शुक्रवार को दोनों दलों के अविश्वास प्रस्ताव सदन सही तरीके से नहीं चलने की वजह से पेश नहीं हो सके थे। उस दिन तेलंगाना राष्ट्र समिति, अन्नाद्रमुक सहित कई दलों के सांसद स्पीकर के आसन के पास आकर हंगामा कर रहे थे।

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बजट सत्र के अंतिम चरण का पहला दो हफ्ता बीत चुका है, हालांकि सरकार कई महत्वपूर्ण विधेयक लाने और बिना चर्चा के ध्वनिमत के जरिए बजट पारित कराने में कामयाब रही। इस बार विधायी कार्यों पर सरकार के साथ अक्सर सहयोग करने वाली तेलंगाना राष्ट्र समिति और एआईएडीएमके कई मुद्दों पर विरोध कर रही है, इसलिए इस पर अनिश्चितता ही है कि आज संसद में कोई व्यवस्था बन पाएगी।

2014 में मोदी के सत्ता में आने के बाद पहली बार कोई पार्टी सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाई है। अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस टीडीपी के टी. नरसिम्हन और वाईएसआर कांग्रेस के वाई वी सुब्बा रेड्डी ने दिया था। शुक्रवार को इसे स्पीकर सुमित्रा महाजन ने स्वीकार नहीं किया और सदन की कार्यवाही दिन भर के लिए स्थगित कर दी थी। सुमित्रा महाजन ने कहा था- "प्रस्ताव को सदन के समक्ष रखने के लिए वह बाध्य है, लेकिन इसके लिए सदन को व्यवस्थित होना चाहिए। सदन का जो माहौल है, उसमें उनके लिए प्रस्ताव का समर्थन और विरोध करने वाले सदस्यों की गिनती करना संभव नहीं है।"

क्यों लाया जा रहा है?

टीडीपी आंध्र प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा देने की मांग कर रही है। केंद्र सरकार का कहना है कि वह विशेष पैकेज देने को तैयार है। इसी से नाराज टीडीपी केंद्र सरकार और एनडीसे अलग हो गई है।

उधर, वाईएसआर कांग्रेस राज्य में अपनी साख बनाने के लिए पहले ही अविश्वास प्रस्ताव लाने की कोशिश में है।

क्या है अविश्वास प्रस्ताव के नियम-

तेदेपा और वाईएसआर के राजग सरकार के खिलाफ सोमवार को अविश्वास प्रस्ताव लाने के नियमों की बात की जाए तो इसके समर्थन में कम से कम 50 सदस्यों के हस्ताक्षर होना जरूरी है, जिसके बाद इस प्रस्ताव पर चर्चा की जा सकती है, लेकिन लोकसभा में पहले से ही भाजपानीत राजग का संख्या बल पर्याप्त है। इसलिए चर्चा के बाद मत विभाजन में यह प्रस्ताव गिरना तय है। भाजपा ने पहले से ही पार्टी सांसदों के लिए व्हिप जारी किया हुआ है।

ये है सदन का समीकरण-

इस वक्त लोकसभा में कुल 539 सदस्य हैं। इस लिहाज से बहुमत का आंकड़ा 270 होता है। बीजेपी के अपने सदस्य 274 हैं। यानी वो अपने दम पर बहुमत पाने की हैसियत में है लेकिन बीजेपी के 274 के आंकड़े में तीन पेंच भी हैं।

शत्रुघ्न सिन्हा, कीर्ति आजाद और श्यामाचरण गुप्ता बीजेपी के तीन ऐसे सांसद हैं, जो करीब-करीब हर मोर्चे पर पार्टी के खिलाफ खड़े नजर आते हैं। ऐसे में अगर ये तीनों वोटिंग में शामिल नहीं होते और इनके अलावा एक और वोट इधर उधर हुआ तो फिर बीजेपी को सहयोगी दलों का मुंह देखना पड़ सकता है।


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अमितेष युवराज सिंह

लेखक न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में असिस्टेंट एग्जीक्यूटिव एडिटर हैं

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