राजनीति

NOTA की वजह से रुका भाजपा की जीत का पहिया! वोटर्स ने दिखाई लोकतंत्र की ताकत

आशुतोष कुमार राय, न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| दिसंबर 12 , 2018 , 15:09 IST

मध्य प्रदेश, राजस्थान के साथ छत्तीसगढ़ के नतीजे आने के बाद बीजेपी सहित राजनीतिक जानकारों ने अपनी-अपनी थ्योरी लगानी शुरू कर दी है। एक तरफ तो कांग्रेस ने बीजेपी के अमित शाह के विजय रथ को रोका तो दूसरी तरफ लोकसभा चुनावों की एक धुंधली तस्वीर भी प्रस्तुत कर दी।

राजनीतिक पंडितो का मानना है कि बीजेपी की हार के पीछे कई चीजें हैं जो बड़ा कारण बन कर उभरीं... जैसा की उम्मीदें तो थीं कि किसानों में असंतुष्टता और बेरोजगारी का मुद्दा बड़ा असरदार साबित होंगी लेकिन इन सबमें सबसे महत्वपूर्ण भूमिका नोटा (नॉन ऑफ द ऐवब) की रही।

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विशेषकर मध्य प्रदेश में जहां कांग्रेस और बीजेपी में कांटे का टक्कर था वहां नोटा का भरपूर साथ सपाक्स पार्टी ने दिया। सपाक्स सामान्य पिछड़ा एवं अल्पसंख्यक समुदाय के शासकीय सेवकों का संगठन है जो पदोन्नति में आरक्षण का विरोध करता है। कहा जा रहा है कि इसका असर लोकसभा चुनाव के दौरान उत्तर प्रदेश में भी देखने को मिल सकता है।

मध्य प्रदेश में जहां कांग्रेस और बीजेपी के बीच 100 वोटों की लड़ाई चल रही थी वहां नोटो डेढ़ फीसदी वोट शेयर लेकर बीजेपी को बहुमत से दुर रखने में अहम योगदान दिया। 2018 के चुनावों में बीजेपी का वोट प्रतिशत 41.00 फीसदी रहा और उसे 109 सीटें हासिल हुईं। जबकि कांग्रेस ने पिछली बार के गैप को खत्म करते हुए अपने वोट शेयर को 40.9 फीसदी तक पहुंचाने में सफलता हासिल की।

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15 साल से सत्ता में दूर कांग्रेस के लिए करीब 10 फीसदी वोट शेयर के अंतर को कम करना इतना आसन नहीं था. लेकिन स्थानीय मुद्दों के साथ-साथ केंद्र सरकार द्वारा एससी/एसटी एक्ट में संशोधन और प्रमोशन में आरक्षण को लेकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद सवर्णों और कर्मचारियों में आक्रोश भी एक अहम फैक्टर रहा।

आम आदमी पार्टी को नोटा से मिली मात-:

मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान सहित पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव के लिये मंगलवार को हुई मतगणना में देर शाम तक घोषित परिणाम के आधार पर आप को नोटा से कम वोट हासिल हुए हैं। मध्य प्रदेश की 230 सीटों में से आप ने 208 पर उम्मीदवार उतारे थे। इनमें से अधिकतर उम्मीदवार अपनी जमानत भी नहीं बचा सके। राज्य में आप को मात्र 0.7 प्रतिशत वोट ही मिले जबकि 1.5 प्रतिशत मतदाताओं ने नोटा को अपनाया।

क्षेत्रीय पार्टीयों से ज्यादा लोगों ने किया नोटा पर भरोसा-:

मंगलवार को हुई मतगणना में सभी उम्मीदवारों को खारिज करने (NOTA) के विकल्प को मतदाताओं ने तमाम क्षेत्रीय दलों से ज्यादा तरजीह दी है। आयोग द्वारा जारी चुनाव परिणाम से जुड़ी जानकारी के मुताबिक देर शाम तक की मतगणना के आधार पर छत्तीसगढ़ में सर्वाधिक 2.1 प्रतिशत वोट नोटा के खाते में गए। मिजोरम में NOTA का प्रतिशत सबसे कम (0.5 प्रतिशत) दर्ज किया गया।

राजस्थान और मध्य प्रदेश में सत्तारूढ़ भाजपा एवं मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस के बीच कांटे की टक्कर देखने को मिली। स्पष्ट है कि NOTA को इतनी अधिक संख्या में मतदताओं द्वारा अपनाए जाने से मुकाबला रोचक हो गया।


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