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परिवार से ठुकराए गए महान संगीतकार ओ.पी. नय्यर की 10 बड़ी बातें

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| जनवरी 16 , 2018 , 07:04 IST

ओ.पी. नय्यर को दुनिया से गए भले ही 11 साल हो गए हों, लेकिन उनके गानों ने चाहने वालों को आज भी उनसे जोड़े रखा है। संगीतकार ओ.पी. नय्यर का जन्‍म 16 जनवरी, 1926 को लाहौर में हुआ था। बता दें उन्‍होंने कभी भी संगीत की शिक्षा नहीं ली। शुरुआत में कुछ समय के लिए क्‍लास गए जरूर थे लेकिन जल्‍द ही क्लास भी छोड़ दिया।

म्‍यूजिक डायरेक्‍टर, कंपोजर के तौर पर ओंकार प्रसाद नैय्यर ने अपने कॅरिअर की शुरुआत 1949 में की। उस साल उन्‍होंने ‘कनीज’ फिल्‍म का बैकग्राउंड स्‍कोर कंपोज किया। इसके बाद साल 1952 में आई फिल्म ‘आसमान’ में वें बतौर संगीत निर्देशक रहे। बता दें यह उनकी पहली फिल्‍म थी।

अपनी शर्तों पर जीने वाले ओ.पी. नैयर ने रूमानी गीतों को नया आयाम दिया। उन्होंने गीता दत्त, आशा भोंसले, शमशाद बेगम जैसी गायिकाओं की आवाज का बेहतरीन तरीके सें इस्तेमाल किया। उनके गानों में पंजाबी लोकशैली और घोड़े की टापों वाली धुनों ने लोगों को मनो जैसे बांध ही लिया था।

Hqdefaultगुरूदत्त की फिल्म आर पार उनकी शुरुआती सफल फिल्म में से एक थी। इसकी कामयाबी ने उन्हें अग्रिम पंक्ति के संगीतकारों की सूची में ला खड़ा कर दिया। इस फिल्म के कई गीत जैसे बाबू जी धीरे चलना, सुन सुन जालिमा, ये लो मैं हारी पिया, कभी आर कभी पार आदि आज भी शिद्दत से सुने जाते हैं।

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इतना ही नहीं गुरूदत्त के लिए उन्होंने आगे मिस्टर एंड मिसेज 55, सीआईडी जैसी फिल्मों में भी संगीत दिया। बता दें इन सभी फिल्मो के गाने काफी लोकप्रिय हुए। साल 1957 में आई तुमसा नहीं देखा हिंदी सिनेमा के इतिहास में एक महत्वपूर्ण फिल्म साबित हुयी। इस फिल्म से जहाँ एक ओर शम्मी कपूर के करियर को नयी दिशा मिली वहीं हिंदी सिनेमा में गाने की एक नयी शैली विकसित हुयी।

बी आर चोपड़ा की फिल्म नया दौर में भी ओपी नैयर का संगीत था। ओपी नैयर के गानों में उड़े जब जब जुल्फें तेरी, ये देश है वीर जवानों जैसे इसके कई गाने भी काफी लोकप्रिय हुए। बता दें ओ.पी. नय्यर ने अपना गाना लता मंगेशकर से नहीं गवाया। क्योंकि उन्‍हें लगता था कि लता की आवाज उनकी धुनों के लायक नहीं है। जबकि लता की बहन आशा ने ओ.पी. नय्यर के डायरेक्‍ट किए हुए म्‍यूजिक पर बहुत सारे गाने गाए।

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जानकरी के लिए बता दें ओ.पी. नय्यर बॉलीवुड में किसी एक फिल्‍म के लिए एक लाख रुपया चार्ज करने वाले पहले म्‍यूजिक डायरेक्‍टर्स थे। ओ.पी. नय्यर को 1952 में पहली फिल्‍म मिली और कुछ ही साल में वह स्‍टार बन गए थे। साल 1957-58 में ओपी नैयर का सितारा बुलंदियों पर था। हालांकि, ओपी नैयर जिस तेजी से इंडस्‍ट्री में उठे, उसी तेजी से नीचे भी आए।जिसके फलस्वरूप साल 1961 के पूरा साल में उन्‍हें एक भी फिल्‍म नहीं मिली।

जिसके बाद साल 1962 में एक मुसाफिर एक हसीना से ओ.पी. नय्यर ने एक शानदार वापसी करते हुए फिर से दर्शको का दिल जीता। इसके बाद 1960 के दशक में हर साल कम से कम एक फिल्‍म उन्‍हें मिलती ही चली गई और उसके गाने भी हिट होते चले गए। एक वक्त ऐसा भी आया जब आशा भोसले के साथ जोड़ी टूट जाने के कारण ओ.पी. नय्यर को काफी मुश्किल आई।

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जिक्से बाद काफी लम्बे अर्शे के बाद साल 1990 में ‘जिद’ और ‘निश्‍चय’ जैसी फिल्‍मों के जरिए आश्‍चर्यजनक तरीके से उन्होंने एक बार फिर से वापसी की। ओ.पी. नय्यर के बारे में कहा जाता है कि उनका खान-पान, पहनावा और रहन-सहन एकदम रइसों वाला था। इसमें वह कोई समझौता नहीं करते थे।

इतना ही नहीं वे अंग्रेजी फिल्‍में भी खूब देखते थे। एक समय ऐसा भी आया कि ओ.पी. नय्यर ने बॉलीवुड में काम करना बंद कर दिया और काफी कम लोगों के संपर्क में रहने लगे। हलाकि गजेंद्र सिंह ने उन्‍हें अपने टीवी रियलिटी शो सा रे गा मा पा में जज भी बनाया।

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उसके बाद साल 2007, 28 जनवरी को उन्‍होंने आखिरी सांस ली। मौत से पहले ओ.पी. नय्यर परिवार में बिलकुल ही अकेले पड़ गए थे। सबकी नजरअंदाजगी से वह इस कदर खफा हो गए थे कि उन्होंने कहा था कि कोई भी उनकी अंतिम यात्रा में शरीक न हो।

एक नज़र ओ.पी. नय्यर के गीत पर......


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