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केरल में हुई त्रासदी की वजह से इस साल नहीं मनेगा खुशियों का त्योहार ओणम

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| अगस्त 25 , 2018 , 09:13 IST

फसलों के त्योहार ओणम को हर साल राज्य में बड़ी धूम-धाम से मनाया जाता रहा है लेकिन बारिश एवं बाढ़ से बर्बाद हुए केरल में इस साल इसकी चमक फीकी पड़ गई है। राज्य में अब भी कई स्थान ऐेसे हैं जहां पानी का स्तर कम होना बाकी है और सैकड़ों घर अब भी जलमग्न हैं। ऐसे में त्योहार मनाने का ख्याल किसी के भी जहन में आना संभव नहीं। 

एक कथकली कलाकार पी मोहनदास ने कहा, “कोई फूल, कोई रोशनी नहीं..आपको हर जगह निराशा नजर आएगी।” केरल वाणिज्य एवं उद्योग मंडल के सचिव आर श्रीनिवासन ने कहा, “हम इस बार ओणम नहीं मनाएंगे और न ओणम सद्य तैयार करेंगे।” एक निजी बैंक के कर्मचारी ने कहा कि इसकी बजाए हमने तय किया है कि हम त्योहार के लिए रखी गई राशि का इस्तेमाल प्रभावित लोगों के लिए राहत सामग्री खरीदने में करेंगे। 

राष्ट्रपति ने दी शुभकामनाएं-:

केरलवासियों के "आचरण की सहनशीलता और धैर्य" को सलाम करते हुए राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने आज ओणम की शुभकामनाएं दी। राष्ट्रपति भवन की ओर से जारी एक संदेश में कोविंद ने देशवासियों विशेषकर देश-विदेश में रह रहे केरलवासियों के प्रति अपनी शुभकामनाएं व्यक्त की। उन्होंने कहा"

यह त्योहार लोगों के लिए शांति और समृद्धि लाए, विशेषकर उनके लिए जो केरल में हाल में आई बाढ़ से उबर रहे हैं।" 


कैसे और क्यों मनाया जाता है ओणम-:

श्रावण शुक्ल की त्रयोदशी तिथि को ओणम मनाया जाता है। केरल के महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक ओणम भी है। ओणम के दो दिन महत्वपूर्ण होते हैं। इस दौरान लोग खुद सजते हैं, अपने घर सजाते हैं, अच्छे-अच्छे पकवान बनाते हैं, नृत्य करते हैं और रंगोली बनाते हैं। ओणम का त्योहार अधिकांश सितंबर मास में मनाया जाता है। इस बार इसे 24 और 25 अगस्त को मनाया जा रहा है।

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इसे खेतों में फसल की उपज के लिए विशेष तौर पर मनाया जाता है। इस मौके पर केरल में कई कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है, जिसमें से एक है नौका रेस। इस त्यौहार की विशेषता यह है कि इसमें लोग मंदिरों में नहीं, बल्कि घरों में पूजा करते हैं।

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यह माना जाता है कि थिरूओणम के दिन महाबली घर में पधारते हैं। इसलिए एक दिन पहले उथ्रादम की रात मेंं ही घर की साफ सफाई कर घर को सजा दिया जाता है। फिर थिरूओणम के दिन सुबह पूजा होती है और इसके बाद लोग नाश्ता करते हैं। दोपहर के समय 20 से ज्यादा पकवान बनाए जाते हैं। शाम में दोबारा पूजा होती है। इस दिन घरों में सिर्फ शाकाहार भोजन ही तैयार किया जाता है।


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