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17 साल की उम्र में मुन्ना बजरंगी ने ऐसे बनाई जुर्म की दुनिया में अपनी पहचान

आशुतोष कुमार राय, न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 1
1974
| जुलाई 9 , 2018 , 11:09 IST

यूपी के पूर्वांचल में अपना वर्चस्व बनाने वाले कुख्यात माफिया डॉन मुन्ना बजरंगी की जेल में हत्या होने के बाद सूबे में हड़कंप मच गया है। पेशी के लिए झांसी से बागपत लाए जाने के तुरंत बाद हत्या पुलिस विभाग को भी शक के दायरे में खड़ा कर रही है। पिछले चार दशकों से उत्तर प्रदेश के अपराध जगत में मुन्ना बजरंगी का नाम काफी चर्चा में था। यही नहीं पूर्वांचल के इस चर्चित डॉन ने सियासत में भी हाथ आजमाया लेकिन नाकामी हाथ लगी। आइए नजर डालते हैं मुन्ना बजरंगी के आतंक के कहानियों पर...

1967 में यूपी के जौनपुर जिले के पूरेदयाल गांव में जन्मे मुन्ना बजरंगी का असली नाम प्रेम प्रकाश सिंह है। उसके पिता पारसनाथ सिंह उसे पढ़ा लिखाकर बड़ा आदमी बनाने का सपना देख रखा था लेकिन मुन्ना बजरंगी को पढ़ाई में दिलचस्पी नही थी और वो पांचवीं कक्षा के बाद ही पढ़ाई छोड़ दिया। किशोरावस्था में जुर्म की दुनिया में अपना कदम रख दिया।

मुन्ना बजरंगी के जुर्म की पहली सीढ़ी-:

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मुन्ना बजरंगी को हथियार रखने का बड़ा शौक था। वह फिल्मों की तरह एक बड़ा गैंगेस्टर बनना चाहता था। यही वजह थी कि 17 साल की नाबालिग उम्र में ही उसके खिलाफ पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया। जौनपुर के सुरेही थाना में उसके खिलाफ मारपीट और अवैध असलहा रखने का मामला दर्ज किया गया था। इसके बाद मुन्ना ने कभी पलटकर नहीं देखा।

पहचान बनाने के लिए की पहली हत्या -:

मुन्ना अपराध की दुनिया में अपनी पहचान बनाने की कोशिश में लगा था, इसी दौरान उसे जौनपुर के स्थानीय दबंग माफिया गजराज सिंह का संरक्षण हासिल हो गया। मुन्ना अब उसके लिए काम करने लगा था। इसी दौरान 1984 में मुन्ना ने लूट के लिए एक व्यापारी की हत्या कर दी। उसके मुंह खून लग चुका था। इसके बाद उसने गजराज के इशारे पर ही जौनपुर के बीजेपी नेता रामचंद्र सिंह की हत्या करके पूर्वांचल में अपना दम दिखाया। इसके बाद उसने कई लोगों की जान ली।

प्रशासनिक मदद के लिए मुख्तार गैंग में शामिल हुआ मुन्ना बजरंगी-:

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पूर्वांचल में अपनी साख बढ़ाने के लिए मुन्ना बजरंगी 90 के दशक में पूर्वांचल के बाहुबली माफिया और राजनेता मुख्तार अंसारी के गैंग में शामिल हो गया। यह गैंग मऊ से संचालित हो रहा था, लेकिन इसका असर पूरे पूर्वांचल पर था। मुख्तार अंसारी ने अपराध की दुनिया से राजनीति में कदम रखा और 1996 में समाजवादी पार्टी के टिकट पर मऊ से विधायक निर्वाचित हुए। इसके बाद इस गैंग की ताकत बहुत बढ़ गई। मुन्ना सीधे तौर पर सरकारी ठेकों को प्रभावित करने लगा था। वह लगातार मुख्तार अंसारी के निर्देशन में काम कर रहा था।

कृष्णानंद राय की हत्या के बाद ईनामी हुआ बजरंगी-:

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बीजेपी विधायक कृष्णानंद राय की हत्या के अलावा कई मामलों में उत्तर प्रदेश पुलिस, एसटीएफ और सीबीआई को मुन्ना बजरंगी की तलाश थी। इसलिए उस पर सात लाख रुपये का इनाम भी घोषित किया गया। उस पर हत्या, अपहरण और वसूली के कई मामलों में शामिल होने के आरोप है। वह लगातार अपनी लोकेशन बदलता रहा। पुलिस का दबाव भी बढ़ता जा रहा था।

एनकाउंटर से बचने के लिए हुआ गिरफ्तार-:

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उत्तर प्रदेश समते कई राज्यों में मुन्ना बजरंगी के खिलाफ मुकदमे दर्ज थे। वह पुलिस के लिए परेशानी का सबब बन चुका था। उसके खिलाफ सबसे ज्यादा मामले उत्तर प्रदेश में दर्ज हैं लेकिन 29 अक्टूबर 2009 को दिल्ली पुलिस ने मुन्ना को मुंबई के मलाड इलाके में नाटकीय ढंग से गिरफ्तार कर लिया था। माना जाता है कि मुन्ना को अपने एनकाउंटर का डर सता रहा था, इसलिए उसने खुद एक योजना के तहत दिल्ली पुलिस से अपनी गिरफ्तारी कराई थी। 


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