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'एक देश-एक चुनाव' पर CEC ओपी रावत ने कहा, देश में अभी यह संभव नहीं

icon अमितेष युवराज सिंह | 0
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| अगस्त 14 , 2018 , 18:30 IST

एक देश एक चुनाव पर मुख्य चुनाव आयुक्त ओम प्रकाश रावत ने कहा है कि अभी यह क़ानूनी तौर पर संभव नही है। उन्होंने कहा कि कानून में संशोधन के बाद ही एक साथ चुनाव संभव है। उन्होंने कहा कि 11 राज्यों में एक साथ चुनाव की संभावना दिखती है। वहीं बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 'एक राष्ट्र एक चुनाव' का समर्थन करते हुए एक बार फिर से कहा कि फ़िलहाल ये संभव नही है।

वही देशभर में एक साथ चुनाव कराने की मांग एक बार फिर जोर पकड़ चुका है। बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने इस मुद्दे पर विधि आयोग को पत्र लिखकर एक बार फिर इस मुद्दे को गरमा दिया है।

हालांकि बीजेपी प्रवक्ता संबित पात्रा ने कहा कि भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के कानून आयोग को 11 राज्यों में एक साथ चुनावों का कोई जिक्र नहीं है, लेकिन पार्टी एक राष्ट्र एक चुनाव के विचार का समर्थन करती है।

इस संदर्भ में चुनाव आयुक्त ने आगे कहा कि राज्य विधानसभाएं अगर सहमत हो जाएं तो एक साथ चुनाव कराना संभव है। ऐसे कयास लगाए जा रहे हैं कि केंद्र सरकार अगले साल लोकसभा चुनावों के साथ 10-11 राज्यों के विधानसभा चुनाव भी कराने के प्रयास कर रही है। मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा कि अगर पूरे देश में एक साथ चुनाव कराने की बात तो बिना संशोधन के संभव नहीं दिखता। जैसा 11 राज्यों के चुनाव का मीडिया में आया तो उस तरह की स्थिति में एक साथ चुनाव कराए जा सकते हैं।

तीन राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव हो सकता है विलंबित

सूत्रों के अनुसार भाजपा के इस रुख के बाद देश के तीन राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव को विलंबित किया जा सकता है। इतना ही 2019 में जिन राज्यों में चुनाव होने हैं उसे भी एक ही साथ कराया जा सकता है। हालांकि अभी तक किसी ने औपचारिक तौर पर कुछ भी नहीं कहा है। पार्टी से जुड़े सूत्रों ने बताया कि राज्यों का चुनाव विलंबित करने या पहले कराने को लेकर कोई ठोस प्रस्ताव नहीं है और इस विचार पर पार्टी के भीतर औपचारिक रूप से चर्चा नहीं की गई है।

ऐसा इसलिए भी कदम उठाया जा है क्योंकि ऐसे कदमों की संवैधानिक वैधता का भी ध्यान में रखना होगा। हालांकि इन सब के बीच अगले साल मध्यप्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ विधानसभाओं का कार्यकाल खत्म होने के बाद इन राज्यों में कुछ समय के लिए राष्ट्रपति शासन लगाने की अटकलों को भी झुटलाया नहीं गया है। वहीं इन सब के बीच खबर आ रही है कि देश में एक साथ चुनाव कराने को लेकर एक सर्वदलिय बैठक भी सरकार बुला सकती है।

OP-Rawat

केंद्र सरकार लोकसभा और विधानसभाओं के चुनाव एकसाथ कराने पर आमसहमति बनाने के लिए एक सर्वदलीय बैठक बुलाने पर विचार कर रही है। यह बैठक विधि आयोग द्वारा इस मामले में कानूनी ढांचे की सिफारिश के बाद आयोजित की जा सकती है। सरकार से जुड़े सूत्रों के अनुसार एक साथ चुनाव कराने के मुद्दे पर नेताओं के बीच चर्चा का दायरा बढाने के लिए आगामी दिनों में सर्वदलीय बैठक बुलाई जा सकती है, लेकिन बैठक बुलाने को लेकर अभी अंतिम निर्णय नहीं हुआ है।

2015 में ही चुनाव आयोग दे चुका है व्यापक सुझाव

मुख्य चुनाव आयुक्त ओपी रावत ने बताया कि एक साथ चुनाव को लेकर चुनाव आयोग + 2015 में ही व्यापक सुझाव दे चुका है। चुनाव आयोग बता चुका है कि इसके लिए संविधान और जनप्रतिनिधित्व कानून में कौन-कौन से संशोधन कराने होंगे। ओपी रावत ने कहा कि इन संशोधनों के बाद अन्य जरूरतो में पर्याप्त वोटिंग मशीन (वीवीपैट), अधिक सुरक्षाकर्मियों जैसी जरूरतों से भी अवगत करा दिया गया था।

मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा कि एक साथ चुनाव बिल्कुल कराए जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि देश में पहले भी 4 चुनाव 1967 तक एक साथ हुए हैं। मशीनें पर्याप्त हों, सुरक्षाकर्मी पर्याप्त हों और कानूनी प्रावधान हों, तो इसमें कोई दिक्कत नहीं है।


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अमितेष युवराज सिंह

लेखक न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में असिस्टेंट एग्जीक्यूटिव एडिटर हैं

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