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World Food Day: आज भी भारत में रोज़ाना 20 करोड़ लोग सोते हैं भूखे

icon अमितेष युवराज सिंह | 0
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| अक्टूबर 16 , 2017 , 13:24 IST

आज वर्ल्ड फूड डे है। वर्ल्‍ड फूड डे पूरे विश्‍व में 16 अक्‍टूबर को सेलीब्रेट किया जाता है। ऐसे में हम आपको उन देशों के बारे में बताने जा रहे जिनके पास खाने के लिए खाना नहीं है। भारत, चीन, जैसे देश भी इस सूची में शामिल हैं।

भारत जैसे विविधता वाले देश में खाने को लेकर भी तमाम अलग-अलग बातें हैं। पिछले कुछ दिनों से ग्लोबल फूड इंडेक्स में भारत की स्थिति को लेकर विवाद चल रहा है। इंटरनेशनल फूड पॉलिसी रिसर्च इंस्टिट्यूट की रिपोर्ट काफी पेचीदा है और इससे ये नतीजे निकालना कि भारत में कुपोषण पिछले तीन साल में बढ़ा है या नहीं बढ़ा है, दोनों ही गलत हैं। मगर इसमें कोई दो राय नहीं कि हम दुनिया के कुपोषित देशों में से हैं। इसके साथ ही हमारे यहां जरूरत से ज्यादा वजन वाले लोगों की गिनती भी खूब है।

दरअसल इतिहास के कई सौ सालों में देश में पड़ने वाले अकाल आदि के कारण भारतीयों का शरीर जेनेटिक रूप से ज्यादा फैट जमा करने के लिए प्रोग्राम है। बीयर बेली यानी पेट के पास चर्बी जमा होना देश के लोगों की बड़ी समस्या है। इसके साथ ही भारतीय खाने में प्रोटीन नहीं कार्बोहाइड्रेट (आलू, गेहूं और चावल) सबसे ज्यादा होता है। जिसके चलते हम में से ज्यादातर लोग शारीरिक रूप से संतुलित नहीं होते हैं।

बच्चे कुपोषण का शिकार-

भारत में पांच वर्ष से कम आयु के 21 प्रतिशत बच्चे कुपोषण के शिकार हैं। देश में बाल कुपोषण 1998-2002 के बीच 17.1 प्रतिशत था, जो 2012-16 के बीच बढ़कर 21 प्रतिशत हो गया। दुनिया के पैमाने पर यह काफी ऊपर है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले 25 सालों से भारत ने इस आंकड़े पर ध्यान नहीं दिया और न ही इस स्थिति को ठीक करने की दिशा में कोई उल्लेखनीय प्रगति हुई है। ग्लोबल हंगर इंडेक्स (जीआई) 2017 में शामिल जिबूती, श्रीलंका और दक्षिण सूडान ऐसे देश हैं, जहां बाल कुपोषण का आंकड़ा 20 प्रतिशत से अधिक है। इस सूचकांक के चार प्रमुख मानकों में से कुपोषण भी एक है।

आंकड़े बताते हैं कि पोषण की कमी का नतीजा होता है बाल कुपोषण और ऐसे बच्चे संक्रमण के आसानी से शिकार हो जाते हैं, इनका वजन तेजी से कम होने लगता है और इन्हें स्वस्थ होने में बहुत समय लगता है।

भारत में 20 करोड़ लोग भूखे सोते हैं-

चीन में भूखे सोने वालों की संख्या में कमी आई है। भारत में भी 1990 तथा 2015 के दौरान भूखे रहने वाले लोगों की संख्या में गिरावट आई है। साल 1990-92 में भारत में यह संख्या 21.01 करोड़ थी, जो 2014-15 में घटकर 19.46 करोड़ रह गई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत ने अपनी जनसंख्या में भोजन से वंचित रहने वालों की संख्या घटाने के महत्वपूर्ण प्रयास किए हैं। एएफओ के अनुसार अब भी 19.4 करोड़ लोग भूखे सोते हैं। भूखे लोगों की संख्या में कमी लाने के मामले में चीन ने भारत से कहीं बेहतर काम किया है। 1990-91 में चीन में भुखमरी के शिकार लोगों की संख्या 28.9 करोड़ से घटकर 2014-15 में 13.38 करोड़ रह गई।

भुखमरी को कम करने का प्रयास-

एफएओ की निगरानी वाले 129 में से 72 देशों ने 2015 तक भुखमरी को घटाकर आधे करने के मिलेनियम डिवेलपमेंट टारगेट को हासिल कर लिया। रिपोर्ट में इस क्षेत्र में शानदार उन्नति के लिए लैटिन अमेरिका और कैरेबियन, साउथ ईस्ट और सेंट्रल एशिया और अफ्रीका के कुछ हिस्सों का विशेष जिक्र है। यूएन की रिपोर्ट में कहा गया है कि सभी चीजों के विश्लेषण से यह बात सामने आती है कि समावेशी आर्थिक विकास, कृषि क्षेत्र में निवेश और सामाजिक सुरक्षा के साथ-साथ राजनीतिक स्थायित्व से भुखमरी को कम किया जा सकता है।

दुनिया में करोड़ों लोग हैं भूखे-

यूनाइटेड नेशंस की एक रिपोर्ट की माने तो दुनिया में 79.5 फी‍सदी लोगों के पास खाना नहीं है। सिर्फ भारत में ही करीब 20 करोड़ लोग प्रतिदिन भूखे पेट सोने के लिए मजबूर हैं। यह आंकड़ा चीन में भुखमरी के शिकार लोगों से कहीं ज्यादा है। संयुक्त राष्ट्र की भूख संबंधी एक सालाना रिपोर्ट में इस आंकड़े का खुलासा किया गया है। संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन ने अपनी रिपोर्ट 'द स्टेट ऑफ फूट इनसिक्योरिटी इन द व‌र्ल्ड 2015' में कहा कि वैश्विक स्तर पर यह संख्या 2014-15 में घटकर 79.5 करोड़ रह गई है जो 1990-92 में एक अरब थी।


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अमितेष युवराज सिंह

लेखक न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में असिस्टेंट एग्जीक्यूटिव एडिटर हैं

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