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पाकिस्तानी पीएम अब्बासी की धमकी, भारत से निपटने के लिए हमारे पास परमाणु हथियार

अमितेष युवराज सिंह | न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| सितंबर 21 , 2017 , 12:45 IST

पाकिस्तान ने भारत को फिर परमाणु हथियारों की धमकी दी है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शाहिद खकान अब्बासी ने कहा है कि भारतीय सेना के ‘कोल्ड स्टार्ट डॉक्ट्रिन’ से निपटने के लिए उनके देश ने छोटी दूरी के परमाणु हथियार विकसित कर लिए हैं। अब्बासी संयुक्त राष्ट्र महासभा की बैठक में भाग लेने के लिए इस समय न्यू यॉर्क में हैं। अब्बासी ने कहा कि पाकिस्तान के परमाणु शस्त्रागार सुरक्षित हैं। कोल्ड स्टार्ट पाकिस्तान के साथ संभावित युद्ध के लिए भारत की सशस्त्र सेनाओं द्वारा विकसित किया गया सैन्य डॉक्ट्रिन है। इसके तहत भारत के सैन्य बलों को युद्ध की स्थिति में पाकिस्तान की ओर से परमाणु हमले का जवाब देने के लिए हमले करने की मंजूरी है।

एक शीर्ष अमेरिकी थिंक टैंक काउंसिल ऑन फॉरेन रिलेशंस के कार्यक्रम में एक सवाल के जवाब में शाहिद अब्बासी ने कहा कि हमारा सामरिक परमाणु हथियारों पर बेहद मजबूत और सुरक्षित नियंत्रण है। समय के साथ यह साबित हो चुका है कि यह प्रक्रिया बहुत  सुरक्षित है। पाकिस्तान की न्यूक्लियर कमांड अथॉरिटी (एनसीए) के पास देश के परमाणु हथियारों के संबंध में कमांड, कंट्रोल और संचालनात्मक फैसले लेने की जिम्मेदारी है। पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने कहा कि जहां तक सामरिक परमाणु हथियारों का संबंध है तो हमारे पास कोई भी क्षेत्रीय सामरिक परमाणु हथियार नहीं है। हमने भारत के कोल्ड स्टार्ट डॉक्ट्रिन से निपटने के लिए छोटी दूरी के परमाणु हथियार विकसित किए हैं। इनकी कमान और कंट्रोल भी उसी अथॉरिटी के पास है जिसके पास अन्य सामरिक हथियारों का नियंत्रण है।

कोल्ड स्टार्ट नीति क्या है?

इस नीति को 2001 में संसद पर हमले के बाद तैयार किया गया था। संसद पर हमले के तुरंत बाद पाकिस्तान को जवाब देने के लिए सीमा पर भारतीय सेना की तैयारियों में वक्त लगा था। इसी दौरान पाकिस्तान ने जवाब देने की पुख्ता तैयारियां कर ली थीं। इसके बाद 'कोल्ड स्टार्ट डॉक्ट्रिन' बनाई गई। यह एक तरह से 2001 में की गई चूक से ली गई एक सीख है। इसके तहत युद्ध की स्थिति में पाकिस्तान को तैयारी का मौका दिए बिना सभी सेनाएं मिलकर तेजी से हमले को अंजाम देंगी। युद्ध की स्थिति में अंतरराष्ट्रीय शक्तियों द्वारा सीजफायर की मांग से पहले ही ज्यादा नुकसान पहुंचा देने का कॉन्सेप्ट इसमें शामिल है। इसमें पाकिस्तान के इलाकों पर कब्जा और उसे परमाणु हथियारों के इस्तेमाल से रोकने की भी बात है।

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उधर, पाकिस्तान ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा युद्ध ग्रस्त अफगानिस्तान में भारत के लिए ज्यादा बड़ी भूमिका की वकालत करने को लेकर अमेरिका के सामने आपत्ति दर्ज की है।

विदेश सचिव तहमीना जांजुआ ने कहा कि प्रधानमंत्री शाहिद खकान अब्बासी ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के सत्र से इतर अमेरिकी उपराष्ट्रपति माइक पेंस से मुलाकात के दौरान ट्रंप द्वारा उनकी नई अफगान नीति में भारत के लिए ज्यादा बड़ी भूमिका की वकालत करने को लेकर चिंता जताई है।


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