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मास्टरमाइंड हाफिज सईद की रैली में दिखे फिलिस्तीनी राजदूत, भारत ने जताई आपत्ति

icon अमितेष युवराज सिंह | 0
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| दिसंबर 30 , 2017 , 11:05 IST

मुंबई हमलों के मास्टरमाइंड और प्रतिबंधित जमात-उद-दावा के सरगना हाफिज सईद की रैली में फिलिस्तीन के राजदूत के शामिल होने को लेकर भारत ने कड़ी आपत्ति जताई है। हाफिज सईद के साथ फिलिस्तीन के राजदूत वलीद अबु अली ने मंच साझा किया है। पाकिस्तानी पत्रकार उमर कुरैशी ने खूंखार आतंकी हाफिज सईद और पाकिस्तान में फिलिस्तीन के राजदूत के मंच साझा करने की तस्वीर को ट्वीटर पर शेयर की है।

ये तस्वीर पाकिस्तान के रावलपिंडी के लियाकत बाग में आयोजित विशाल रैली की हैं, जिसमें हाफिज सईद के साथ फिलिस्तीन के राजदूत वलीद अबु अली भी शामिल हुए। इस रैली का आयोजन दिफाह-ए-पाकिस्तान काउंसिल ने किया। यह काउंसिल पाकिस्तान में धार्मिक समूहों और राजनीतिक पार्टियों का एक गठबंधन है, जिसमें हाफिज सईद का संगठन भी शामिल है। यह कट्टरपंथी संगठन अक्सर हर मौकों पर भारत के खिलाफ जहर उगलता रहा है। इस रैली को वलीद अबु अली ने भी संबोधित किया। वैश्विक आतंकी हाफिज सईद पाकिस्तान की राजनीति में आने को बेताब है। इसमें उसको पाकिस्तानी सेना का भी समर्थन मिल रहा है।

भारत ने इस मसले को गंभीरता से लेते हुए कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है। विदेश मंत्रालय ने इस मसले पर सख्त रुख अपनाते हुए कहा, 'हमने इस संबंध में रिपोर्ट देखी है। हम नई दिल्ली में फिलिस्तीनी राजदूत और अधिकारियों के सामने इस मुद्दे को सख्ती से उठाएंगे।'

बहरहाल, इन तस्वीरों के सामने आने के बाद हर तरह बहस छि़ड़ गई है।

इस घटना के बाद नई दिल्ली में इजरायली दूतावास में पब्लिक डिप्लॉमेसी की प्रमुख फ्रोइम दित्जा ने ट्विटर पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, 'राजदूत कितनी 'चार्मिंग' कंपनी रखते हैं।'

हाल ही में नजरबंदी से रिहा होने के बाद आतंकी हाफिज सईद आगामी चुनाव में उतरने का ऐलान भी चुका है। हालांकि उसके सिर पर अमेरिका ने एक करोड़ रुपये का इनाम भी घोषित कर रखा है।

बता दें कि पिछले दिनों यूएन में यूएनजीए रेजॉलूशन के खिलाफ वोट दिया था, जिसमें यरुशलम को इजरायल की राजधानी के तौर पर मान्यता देने की बात कही गई थी। गौरतलब है कि भारत के साथ 127 देशों ने अमेरिका के इस रेजॉलूशन के खिलाफ वोट करते हुए इजरायल और फिलिस्तीन के बीच समझौते के बाद ही मान्यता देने की बात कही थी। भारत के इस वोट को इजरायल के विरोध के तौर पर देखा जा रहा है। इजरायल और अमेरिका को भारत के करीबी मित्र के तौर पर देखा जाता है।

मोदी सरकार के कुछ समर्थक भी भारत के इस फैसले का विरोध कर रहे हैं। इजरायल के सरकार ने भारत के सामने इस वोट को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की है। इसी साल न सिर्फ फिलिस्तीन के राष्ट्रपति महमूद अब्बास भारत के दौरे पर आए थे, बल्कि पीएम मोदी भी आने वाले महीनों में फिलिस्तीन की यात्रा पर जा सकते हैं। जबकि फिलिस्तीन न सिर्फ भारत और इजरायल की बढ़ती दोस्ती की विरोध करता रहा है, बल्कि यूएन और आईओसी में कई साल से जम्मू-कश्मीर के मुद्दे पर लगातार भारत के खिलाफ वोट भी करता रहा है।


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अमितेष युवराज सिंह

लेखक न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में असिस्टेंट एग्जीक्यूटिव एडिटर हैं

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