नेशनल

राज्यसभा से पास हुआ 124वां संविधान संशोधन बिल, अब राष्ट्रपति की मुहर का इंतजार

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
1374
| जनवरी 10 , 2019 , 08:42 IST

आर्थिक रूप से कमजोर सवर्णों को सरकारी नौकरियों और शैक्षिक संस्थानों में 10% आरक्षण देने वाले इस ऐतिहासिक संविधान संशोधन विधेयक को संसद की मंजूरी मिल गई है। यह बिल कल राज्यसभा से भी पास हो गया। अब इस पर राष्ट्रपति के हस्ताक्षर का इंतजार है।

राज्यसभा में इस विधेयक पर तकरीबन 10 घंटे तक बैठक चली। 10 घंटे तक चली बैठक के बाद संविधान (124 वां संशोधन), 2019 विधेयक पास किया गया। वहीं संसद में मौजूद सांसदों में से 165 सांसदों ने इस विधेयक के पक्ष में वोट किया जबकि 7 ने इसके खिलाफ वोट किया। बता दें लोकसभा से इस विधेयक को एक दिन पहले ही मंजूरी मिल गई थी। लोकसभा में मौजूद सांसदों में से 323 सांसदों ने इसके पक्ष में वोट किया था जबकि 3 ने विपक्ष में वोट डाले थे।

उच्च सदन में विपक्ष सहित लगभग सभी दलों ने इस विधेयक का समर्थन किया। कुछ विपक्षी दलों ने इस विधेयक को लोकसभा चुनाव से कुछ पहले लाए जाने को लेकर सरकार की मंशा तथा इस विधेयक के न्यायिक समीक्षा में टिक पाने को लेकर आशंका जताई। हालांकि सरकार ने दावा किया कि कानून बनने के बाद यह न्यायिक समीक्षा की अग्निपरीक्षा में भी खरा उतरेगा क्योंकि इसे संविधान संशोधन के जरिए लाया गया है।

केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री थावर चंद गहलोत ने विधेयक पर चर्चा के दौरान जवाब देते हुए इसे सरकार का एक ऐतिहासिक कदम बताया। उन्होंने कांग्रेस सहित विपक्षी दलों से यह पूछा कि जब उन्होंने सामान्य वर्ग को आर्थिक आधार पर आरक्षण दिए जाने का अपने घोषणापत्र में वादा किया था तो वह वादा किस आधार पर किया गया था। क्या उन्हें यह नहीं मालूम था कि ऐसे किसी कदम को अदालत में चुनौती दी जा सकती है।

उन्होंने कहा कि यह हमारी संस्कृति की विशेषता है कि जहां प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने SC/ST को आरक्षण दिया। वहीं पिछड़े वर्ग से आने वाले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सामान्य वर्ग को आरक्षण देने की यह पहल की है। उन्होंने SC/ST और OBC आरक्षण को लेकर कई दलों के सदस्यों की आशंकाओं को निराधार और असत्य बताते हुए कहा कि उनके 49.5 प्रतिशत से कोई छेड़छाड़ नहीं की जा रही है वह बरकरार रहेगा।

वहीं, कांग्रेस ने कहा कि वह सामान्य श्रेणी के तहत आर्थिक रूप से पिछड़े तबके के लिए 10 फीसदी आरक्षण के फैसले को मंजूरी देने का स्वागत करती है। हालांकि, कांग्रेस ने इसके समय को लेकर सवाल उठाया, क्योंकि यह लोकसभा चुनाव से ठीक पहले आया है। राज्यसभा में चर्चा के दौरान कांग्रेस नेता आनंद शर्मा ने कहा, ‘हम इसका विरोध नहीं कर रहे हैं लेकिन सवाल यह है कि इसे क्यों अचानक लाया जा रहा है। यह संसद का अंतिम सत्र है, इसके बाद चुनाव है।’

शर्मा ने कहा कि बीजेपी साढ़े चार वर्षों के शासन के दौरान विधेयक क्यों नहीं लाई? उन्होंने कहा कि भगवा पार्टी ने हाल ही में पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों में हार के बाद इस फैसले पर जोर दिया है। आनंद ने सरकार से स्पष्ट करने को कहा कि अगर 10 फीसदी आरक्षण लागू होता है तो किन लोगों को फायदा होगा।

वहीं कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने आर्थिक आधार पर सामान्य वर्ग को आरक्षण देने के मोदी सरकार के फैसले को मैच जिताने वाला छक्का बताते हुये कहा कि अभी इस मैच में विकास से जुड़े और भी छक्के देखने को मिलेंगे। उन्होंने कहा कि सरकार ने यह ऐतिहासिक फैसला समाज के सभी वर्गों को विकास की मुख्य धारा में समान रूप से शामिल करने के लिए किया है। उन्होंने इस विधेयक के न्यायिक समीक्षा पर कहा कि आरक्षण पर 50 प्रतिशत की सीमा संविधान में नहीं लगाई गई है। उच्चतम न्यायालय ने यह सीमा सिर्फ पिछड़े वर्ग और अनुसूचित जाति एवं जनजाति समूहों के लिए तय की है।


कमेंट करें