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पितृ पक्ष के समय में बंद रहेंगे सारे मांगलिक काम, ऐसे करें अपने पितरों को प्रसन्न

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 1
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| सितंबर 24 , 2018 , 17:22 IST

-आचार्य कमल नयन तिवारी

पितरों की कृपा, आशीर्वाद पाने के लिए पितृपक्ष के 16 दिन बहुत खास होते हैं। पिंडदान, तर्पण और मार्जन के जरिए पितरों को प्रसन्न किया जाता है। यही नहीं पितृदोष से मुक्ति के लिए इन दिनों किया गया पूजन पाठ और श्राद्ध कर्म बहुत लाभकारी होता है।

धार्मिक मान्यता के अनुसार भाद्रपद महीने के पूर्णिमा तिथि से लेकर आश्विन महीने के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तक पितृपक्ष रहता है। इस बार पितृपक्ष 25 सितंबर से शुरू होकर 9 अक्टूबर (पितृ अमावस्या) अक्टूबर तक रहेगा।

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जिस व्यक्ति की मृत्यु जिस तिथि को हुई होती है, उसी तिथि में उसका श्राद्ध किया जाता है। यहां महीने से कोई लेना देना नहीं है। जैसे किसी की मृत्यु प्रतिपदा तिथि को हुई, तो उसका श्राद्ध पितृपक्ष में प्रतिपदा तिथि को करना चाहिए। यही नहीं जिन लोगों की मृत्यु के दिन की सही जानकारी न हो, उनका श्राद्ध अमावस्या तिथि को करना चाहिए। साथ ही किसी की अकाल मृत्यु यानी गिरने, कम उम्र, या हत्या ऐसे में उनका श्राद्ध भी अमावस्या तिथि को ही किया जाता है।

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पितृपक्ष को लेकर तमाम तरह की अफवाह और भ्रम की स्थिति रहती है। कई लोग पितृपक्ष के दौरान घर में पूजन पाठ बंद कर देते हैं। लेकिन ऐसा नहीं करना चाहिए। पितृपक्ष के दौरान पूजन पाठ करने से पितर देव प्रसन्न होते हैं। साथ ही इऩ दौरान किये गये पूजन- पाठ, जाप का अंश सीधे पितरों को मिलता है।

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मान्यता है कि पितृपक्ष में कोई नया काम नहीं किया जाता है। इन दिनों बस मांगलिक कार्य यानी शादी, विवाह, गृहप्रवेश, किसी नए संस्थान की ओपनिंग नहीं की जाती है। वहीं, रोजमर्रा की जरूरी चीजों की खरीददारी, काम के लिए कोई बंदिश नहीं होती। साथ ही कई लोग इऩ दिनों धार्मिक यात्रा से भी बचते नजर आते हैं। लेकिन अगर आप वाकई पितरों की कृपा पाना चाहते हैं, तो धार्मिक यात्रा जरूर करें, क्योंकि इससे मिलने वाला पुण्य खुद को न मिलकर पितरों को मिलता है। वहीं, पितृपक्ष के दिनों में अगर घर में कोई याचक आ जाए उसे डांटे मत, भिक्षा देकर विदा करें। इन दिनों सात्विक भोजन करना चाहिए।

पितृपक्ष के दिनों में हर रोज स्नान करने के बाद पितरों को जल, अर्घ्य दें। इस दौरान कुशा और तिल, जौ का होना जरूरी होता है। साथ ही जो श्राद्ध तिथि हो उस दिन पितरों के लिए पिंडदान और तर्पण करें। घर में उस दिन उस व्यक्ति का पसंदीदा भोजन बनवाएं। पहले गाय, कौवे-पक्षी और कुत्ते को भोजन निकाल दें। सारे व्यंजन में से थोड़ा-थोड़ा निकालकर एक पात्र में लेकर उसे किसी सड़क, चौराहे पर रख दें। इसके बाद घर आकर ब्राह्मण को भोजन कराएं। और यथा शक्ति उन्हें दान दें। और अपने पितृदेव को प्रणाम करें। पूरे विधि विधान और श्रद्धा विश्वास से नियम संयम का पालन और पूजन पाठ से पितृदेव प्रसन्न होते हैं।                                                         


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