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'मन की बात' में पीएम मोदी ने कहा, स्वच्छता का दायरा करीब 80 फीसदी तक पहुंचा

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| मार्च 25 , 2018 , 21:11 IST

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज रविवार को 42वीं बार देशवासियों से अपने मन की बात की। मन की बात में पीएम मोदी ने कहा कि पिछले चार साल के दौरान स्वच्छता का दायरा दोगुना बढकर करीब 80 फीसदी तक पहुंच चुका है और देशवासियों का स्वास्थ्य बेहतर बनाने की दिशा में व्यापक स्तर पर काम किया जा रहा है।

मोदी ने कहा कि स्वच्छता के लिए चार साल देश ने स्वच्छता को लेकर एक बीड़ा उठाया था और उसके परिणाम आज सबके सामने हैं। इस दौरान स्वच्छता का दायरा दोगुना हो गया है।

स्वच्छ भारत और स्वस्थ भारत को एक-दूसरे के पूरक बताते हुए उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य के क्षेत्र में देश परंपरागत सोच को पीछे छोड़कर बहुत आगे बढ चुका है। सरकार भी इस नयी सोच के अनुरूप इस दिशा में नए-नए कदम उठा रही है।

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सरकारी स्तर पर यह सोच कैसे बदली है इसका उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि पहले स्वास्थ्य से जुड़ा हर काम सिर्फ स्वास्थ्य मंत्रालय देखता था लेकिन अब सारे विभाग और मंत्रालय इससे जुड़ गये हैं। स्वच्छता-मंत्रालय, आयुष-मंत्रालय, रसायन और उर्वरक मंत्रालय, उपभोक्ता मंत्रालय, महिला एवं बाल विकास मंत्रालय और राज्य सरकारें सभी इस दिशा में मिलकर काम कर रहे हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि सिर्फ स्वस्थ रहने पर ही जोर नहीं दिया जा रहा है बल्कि स्वस्थ रहने के सरल तरीकों पर भी ध्यान दिया जा रहा है।

स्वास्थ्य के प्रति सजगता जितनी सस्ती है उतनी ही आसान भी है। इस बारे में लोग जितने जागरूक होंगें उतना ही व्यक्ति, परिवार और समाज को इसका लाभ मिलेगा। उन्होंने कहा कि जीवन की स्वच्छता के लिए पहली आवश्यकता स्वच्छता की है।

अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम 'मन की बात' में प्रधानमंत्री ने कहा कि इस साल के बजट में एक प्रमुख निर्णय लिया गया जिससे तहत सरकार ने किसानों को अधिसूचित फसलों की लागत का कम से कम डेढ़ गुना न्यूनतम समर्थन मूल्य देने का फैसला किया है।

मोदी ने कहा न्यूनतम समर्थन मूल्य की गणना करते समय निवेश लागत पर विचार किया जाना चाहिए, इसमें श्रम, मशीन पर व्यय व जानवरों व बीज की लागत, उर्वरक, सिंचाई, भूमि राजस्व, पूंजी पर ब्याज, पट्टे की भूमि का किराया और किसान व उसके परिवार के श्रम की लागत शामिल है।

उन्होंने कहा, "किसानों की पर्याप्त आय सुनिश्चित करने के लिए कृषि विपणन सुधारों को बड़े स्तर पर शुरू किया जा रहा है। गांव के बाजारों को थोक बाजार व वैश्विक बाजार से जोड़ने के प्रयास किए जा रहे हैं।"

प्रधानमंत्री ने कहा कि अपने उत्पाद को बेचने के लिए किसानों को दूर नहीं जाना पड़े यह सुनिश्चित करने के लिए 22,000 गांव के बाजारों को कृषि उत्पाद बाजार समितियों (एपीएमसी) में उन्नत किया जा रहा है और इन्हें ई-नैम (राष्ट्रीय कृषि बाजार) मंच के साथ एकीकृत किया जा रहा है।

मोदी ने कहा, "इस तरह की प्रणाली विकसित की जा रही है कि किसान देश के किसी भी बाजार से जुड़ सकें।"

 


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