राजनीति

होली की तरह हो चुनाव का त्योहार, जातिगत राजनीति देश का दुर्भाग्य: PM

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| जनवरी 20 , 2018 , 12:31 IST

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने एक समाचार चैनल को दिए इंटरव्यू में लोकसभा, विधानसभा, लोकल बॉडी और पंचायत चुनाव एक साथ कराने की बात को फिर से दोहराया है। 

मोदी ने इंटरव्यू में कहा कि उन्हें 125 करोड़ भारतीयों की चिंता है. उन्होने कहा कि- हम अगला चुनाव हारेंगे या जीतेंगे इस बात को सोचने में मैं वक्त बर्बाद नहीं करता। 

राजनीतिक कटुता सिर्फ चुनाव तक सीमित हो- मोदी 

"चुनावों को त्योहार खासकर होली की तरह होना चाहिए। यानी आप उस दिन किसी पर रंग या कीचड़ फेंके और अगली बार तक के लिए भूल जाएं।'' 


मोदी के मुताबिक,

"देश हमेशा इलेक्शन मोड में रहता है। एक चुनाव खत्म होता है तो दूसरा शुरू हो जाता है। "मेरा विचार है कि देश में एकसाथ यानी 5 साल में एक बार संसदीय, विधानसभा, सिविक और पंचायत चुनाव होने चाहिए। एक महीने में ही सारे चुनाव निपटा लिए जाएं।''


"इससे पैसा, संसाधन, मैनपावर तो बचेगा ही, साथ ही सिक्युरिटी फोर्स, ब्यूरोक्रेसी और पॉलिटिकल मशीनरी को हर साल चुनाव के लिए 100-200 दिन के लिए इधर से उधर नहीं भेजना पड़ेगा।''

 होली के त्योहार की तरह है

एक साथ चुनाव कराने से देश को फायदा 

मोदी ने कहा कि एकसाथ चुनाव करा लिए जाते हैं तो देश एक बड़े बोझ से मुक्त हो जाएगा। अगर हम ऐसा नहीं कर पाते तो ज्यादा से ज्यादा संसाधन और पैसा खर्च होता रहेगा।
2014 में लोकसभा चुनाव के बाद देश में उत्तर प्रदेश, पंजाब, गुजरात और हिमाचल प्रदेश में चुनाव हुए।2018 में 8 राज्यों में विधानसभा चुनाव हैं जबकि 2019 में लोकसभा इलेक्शन होने हैं। क्या आप एक साथ चुनाव कराने का टारगेट हासिल कर लेंगे, मोदी ने कहा, "ये किसी एक पार्टी या एक व्यक्ति का एजेंडा नहीं है। देश के फायदे के लिए सबको मिलकर काम करना होगा। इसके लिए चर्चा होनी चाहिए।''

जातिगत राजनीति देश के लिए खतरनाक

मोदी ने कहा कि जातिगत राजनीति देश के लिए खतरनाक है। अगर ऐसा अभी तक हो रहा है तो ये देश का दुर्भाग्य है।
जीडीपी में गिरावट को लेकर हो रही आलोचना पर कहा कि किसी को इस आलोचना का बुरा नहीं मानना चाहिए। यही लोकतंत्र की ताकत है। हर चीज का एनालिसिस होना चाहिए। अच्छे काम की तारीफ और बुरे काम की आलोचना होनी चाहिए।


"लेकिन कई बार आलोचना नहीं रह जाती, आरोप-प्रत्यारोप ज्यादा हो जाते हैं। ये अच्छा है कि देश में जीडीपी, एग्रीकल्चरल-इंडस्ट्रियल ग्रोथ और स्टॉक मार्केट के बारे में चर्चा चल रही है।''


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