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सरकार के खिलाफ षडयंत्र रच रहे थे गिरफ्तार एक्टिविस्ट, नक्सलियों से थे रिश्ते: पुलिस

icon अमितेष युवराज सिंह | 0
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| अगस्त 31 , 2018 , 18:35 IST

भीमा कोरेगांव हिंसा से जुड़े मामले में महाराष्ट्र पुलिस ने कई राज्यों में सामाजिक कार्यकर्ताओं के घरों पर मंगलवार को छापा मारा और माओवादियों से संपर्क रखने के संदेह में उनमें से 5 लोगों को गिरफ्तार किया है। इस कदम का कई वकीलों, विद्धानों और लेखकों ने विरोध किया है। इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट में भी याचिका दायर की गयी है।

पुणे पुलिस ने मंगलवार को दिल्ली में मानवाधिकार कार्यकर्ता और पत्रकार गौतम नवलखा और सुधा भारद्वाज, हैदराबाद में लेखक और सामाजिक कार्यकर्ता पी. वरावरा राव, मुंबई में सामाजिक कार्यकर्ता वेरनॉन गोंजाल्विस, सुज़ैन अब्राहम, पत्रकार क्रांति टेकुला और अरुण फरेरा, रांची में सामाजिक कार्यकर्ता फादर स्टेन स्वामी के घरों की तलाशी ली।

M-4 अत्याधुनिक मशीनगन भी बरामद

गोवा में सामाजिक कार्यकर्ता और लेखक आनंद तेलतुम्बड़े के घर पर भी पुलिस तलाशी के लिए पहुंची थी, हालांकि उस समय वे घर पर नहीं थे। गिरफ्तारी के बाद पुणे के पुलिस कमिश्नर डॉं. वेंकटेशम ने बयान दिया है। डॉ. वेकटेशम का कहना है कि सबूतों को इकठ्ठा और उनके विश्लेषण करने के बाद ही मामले में कार्रवाई की गई है। पुलिस कमिश्नर ने M-4 अत्याधुनिक मशीनगन दिखाते हुए कहा कि माओवादी इस हथियार का इस्तेमाल विरष्ठ नेताओं की हत्या के लिए करने वाले थे।

तलाशियां में मिलें दस्तावेज

पुलिस कमिश्नर ने बताया ऐसे सबूत मिले हैं कि एम-4 हथियार का इस्तेमाल वरिष्ठ नेताओं की हत्या के लिए नहीं, बल्कि संगठन में इस्तेमाल के लिए किया जाने वाला था। डॉ वेंकटेशम ने कहा कि मई 2018 में जो तलाशियां हुईं थीं उसमें से मिले दस्तावेजों और सबूत साथ ही विस्तृत फॉरेंसिक विश्लेषण के आधार पर एक निष्कर्ष निकाला गया और उसी के आधार पर कुछ जगह तलाशी हुई और गिरफ्तारियां की गईं।

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उन्होंने कहा कि गौतम नवलक्खा के ट्रांजिट रिमांड के लिए जितने सबूत की आवश्यकता थी उतने दिए गए थे। हमारे पास इस मामले में बहुत सारे सबूत हैं। जब कमिश्नर से सवाल किया गया कि दिल्ली और दूसरे राज्यों में मराठी भाषा नहीं समझ में आती है तो पुलिस मराठी में दस्तावेज क्यों लेकर गई थी, इस पर उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में सारे सरकारी कामकाज के दस्तावेज मराठी में ही होते हैं और जिन्हें मराठी समझ नहीं आती उन्हें पढ़कर हिंदी में अनुवाद करके उन्हें समझाते हैं।

प्रधानमंत्री मोदी की हत्या की साजिश के बारे में जिस खत का जिक्र हुआ है उसके बारे में बात करते हुए पुलिस कमिश्नर ने कहा कि सारे सबूत अदालत में सही समय पर पेश किये जाएंगे। पुलिस कमिश्नर ने कहा कि गिरफ्तार किए गए कार्यकर्ता प्रतिबंधित संगठन सीपीआई (माओवादी) के नेताओं के संपर्क में थे और वे सरकार को गिराने की साजिश का हिस्सा थे।

लेटर के बाद पुणे पुलिस ने शुरू की थी जांच

23 अप्रैल को पुणे पुलिस को माओवादियों का एक लेटर मिलने के बाद पुणे पुलिस ने जांच शुरू की थी, उसके बाद महाराष्ट्र पुलिस ने प्रेस कांन्फ्रेंस कर बताया कि जांच में खुलासा हुआ है कि बहुत बड़ी साजिश रची जा रही थी। उसने आगे कहा कि इसमें माओवादी संगठन शामिल थे और इन आरोपियों की मद्द से माओवादी संगठन अपने मकसद को आगे बढ़ा रहा था। इसमें यह भी खुलासा हुआ हैं कि एक आतंकी संगठन भी इनके साथ शामिल है।

लेटर में 6 जून को गिरफ्तार हुए रोना विल्सन ने कॉमरेड प्रकाश को लेटर लिखा था। इसमें 8 करोड़ रुपए की मांग की गई थी ताकि एम-4 खरीदे जा सकें। इसी के साथ 4 लाख ग्रेनेड की भी जरूरत होगी।

सुधा भारद्वाज ने लिखा खत

पीबी सिंह ने खुलासा किया कि सुधा भारद्वाज ने माओवादियों की सेंट्रल कमेटी से जुड़े कॉमरेड प्रकाश को एक लेटर भी लिखा था। इसमें सुधा ने कहा था कि वे छत्तीसगढ़ में ग्राउंड पर काम करने और आर्थिक मदद पहुंचाने का काम खुद देख रही हैं। वहीं, कश्मीर के अलगाववादियों से कॉमरेड अंकित और काॅमरेड गौतम नवलखा संपर्क में हैं। वहां दुश्मनों की तरफ से हो रहे मानवाधिकार हनन के वीडियो सोशल मीडिया और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया पर उपलब्ध कराने का काम हो रहा है। प्रशांत की गिरफ्तारी के बाद मुझे पैसा मिलने बंद हो गया है।

बता दें कि कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (माओवादी) के संदिग्ध सदस्यों सुरेन्द्र गाडलिंग और रोना विल्सन को हत्या के षडयंत्र के आरोप में गिरफ्तार किया था। इस मामले में सबूत माओवादियों की ओर से कथित तौर पर विल्सन को लिखा गया पत्र है जिसमें षडयंत्र का जिक्र किया गया था।


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अमितेष युवराज सिंह

लेखक न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में असिस्टेंट एग्जीक्यूटिव एडिटर हैं

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