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Rafale: किसने बदले नियम? डील के 8 शर्तों में किए गए थे बदलाव, नई रिपोर्ट पर घमासान

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| फरवरी 11 , 2019 , 13:38 IST

अंग्रेजी अखबार द हिन्दू ने राफेल सौदे से जुड़ा नया दावा किया है। उसका कहना है कि डील साइन होने से पहले भ्रष्टाचार विरोधी जुर्माने के प्रमुख प्रावधान और एक एस्क्रो अकाउंट हटा दिया गया था। द हिन्दू का कहना है कि रक्षा सौदों में भ्रष्टाचार खत्म करने पर जोर देने का दावा करने वाली सरकार की ओर से राफेल डील में बड़ी रियायत बरती गई थी।

राफेल के सप्लाई प्रोटोकॉल में बदलाव हुआ था: द हिंदू

अखबार ने आधिकारिक दस्तावेजों का हवाला देते हुए कहा है कि तत्कालीन रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर की अध्यक्षता वाली रक्षा अधिग्रहण परिषद ने सितंबर 2016 में दो सरकारों के बीच हुए एग्रीमेंट, सप्लाई प्रोटोकॉल, ऑफसेट कॉन्ट्रैक्ट और ऑफसेट शेड्यूल में 8 बदलाव मंजूर किए थे। रिपोर्ट के मुताबिक राफेल सौदे में उच्च स्तरीय राजनीतिक दखलंदाजी हुई थी। अनुचित प्रभाव के इस्तेमाल पर जुर्माना, एजेंट कमीशन, दैसो और एमबीडीए फ्रांस कंपनी के खाते तक पहुंच के प्रावधान डील के मसौदे से हटा दिए गए थे।

द हिंदू की रिपोर्ट में कह गया है कि 23 सितंबर 2016 को भारत और फ्रांस के बीच हुए एग्रीमेंट के मुताबिक दैसो राफेल विमानों की सप्लायर है और एमबीडीए फ्रांस भारतीय वायुसेना के लिए हथियारों की सप्लायर है। द हिन्दू की रिपोर्ट के मुताबिक राफेल सौदे का एग्रीमेंट और दस्तावेजों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली कैबिनेट कमेटी (सिक्योरिटी) 24 अगस्त 2016 को ही मंजूर कर चुकी थी।

कुछ दिन पहले द हिन्दू ने यह दावा भी किया था कि डील के वक्त प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से समानांतर वार्ता की जा रही थी। रक्षा मंत्रालय ने उस पर आपत्ति जताई थी।

यूपीए सरकार के बनाए नियमों का ही हुआ पालन?

न्यूज एजेंसी एएनआई ने अपनी रिपोर्ट में आधिकारिक सूत्रों के हवाले से दावा किया है कि मोदी सरकार ने पूर्ववर्ती यूपीए सरकार द्वारा बनाए गए नियमों का ही पालन किया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि उच्च आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि 2013 में यूपीए सरकार ने नई पॉलिसी बनाई, जिसके मुताबिक दोस्ताना देशों की सरकारों के साथ इंटर-गवर्नमेंटल अग्रीमेंट में रक्षा मंत्रालय को मानक रक्षा खरीद प्रक्रिया के नियमों का पालन जरूरी नहीं है। नए नियमों के मुताबिक, इंटर-गवर्नमेंटल अग्रीमेंट में मानक खरीद प्रक्रिया के नियमों के पालन के बजाय दोनों देशों की सरकारों द्वारा आपसी सहमति वाले प्रावधान शामिल होंगे।

कांग्रेस का हमला

इस बीच कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने राफेल डील को लेकर सरकार पर नया हमला बोला है। उन्होंने कहा कि हर रक्षा सौदे में ऐंटी-करप्शन क्लॉज होते हैं लेकिन एक अंग्रेजी अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक प्रधानमंत्री मोदी ने ऐंटी-करप्शन क्लॉज को हटा दिया। राहुल गांधी ने कहा कि इससे जाहिर होता है कि पीएम ने लूट में सहयोग दिया। वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व गृह मंत्री पी. चिदंबरम ने भी मोदी सरकार पर हमला बोलते हुए कहा, 'सरकार ने जितना सोचा नहीं था, उससे ज्यादा तेजी से राफेल सौदे में खुलासे हो रहे हैं।' उन्होंने कहा कि पहले कीमत बढ़ाई गई, फिर यह खुलासा हुआ कि प्रधानमंत्री कार्यालय ने समानांतर बातचीत करके भारतीय वार्ता दल के प्रयासों को कमजोर किया। अब यह खुलासा हुआ है कि मानक रक्षा खरीद प्रक्रिया के प्रावधानों में बदलाव किए गए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि दसॉ को इस सौदे में फायदा ही फायदा हुआ है।


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