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राफेल डील: क्या सरकार को इन सवालों के जवाब देने चाहिए या नहीं?

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| सितंबर 23 , 2018 , 14:26 IST

फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद के बयान के बाद कि अनिल अंबानी की कंपनी का नाम भारत सरकार की तरफ से आया था, राफेल विवाद में संदेह की सूई निर्णायक रूप से पीएम नरेंद्र मोदी की तरफ़ मुड़ गई है। 10 अप्रैल 2015 को पीएम नरेंद्र मोदी और ओलांद के बीच ही राफेल करार हुआ था। ओलांद ने फ्रांस के प्रतिष्ठित अख़बार मीडियापार्ट से कहा है कि हमारे पास कोई विकल्प नहीं था। अनिल अंबानी की कंपनी का नाम भारत सरकार की तरफ से आया था।

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राफेल डील पर विपक्ष के हमले और बचाव में सरकार द्वारा दी जा रही दलीलों के बीच कुछ ऐसी बातें उभर कर सामने आ रही है, जिससे संदेह के बादल और गहरा रहे हैं। आइए जानते हैं राफेल डील पर विपक्ष यानि कांग्रेस के आरोपों के बीच ऐसे 10 सवाल जिसके बारे में देश का आम नागरिक भी जानना चाहता है

राफेल डील: देश जानना चाहता है इन 10 सवालों के जवाब

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