राजनीति

राजस्थान सरकार के बिल पर बोले राहुल- मैडम CM! हम 18वीं सदी में नहीं हैं

सतीश वर्मा, न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| अक्टूबर 22 , 2017 , 15:39 IST

कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने राजस्थान सरकार के नए बिल को लेकर सीएम वसुंधरा राजे पर निशाना साधा। उन्होंने रविवार को ट्वीट किया, ''मैडम सीएम, बड़ी विनम्रता के साथ कहना चाहता हूं कि हम 21वीं सदी में हैं। यह 2017 है, न कि 1817। वसुंधरा राजे सरकार सोमवार को असेंबली में बिल पेश करेगी। कांग्रेस ने इसे मीडिया पर बैन बताकर बिल के विरोध का एलान कर दिया है।

बता दें कि बिल के कानून बनने के बाद राज्य के किसी जज, मजिस्ट्रेट और सरकारी कर्मचारी के खिलाफ उनसे जुड़े किसी मामले में जांच से पहले आला अफसरों की इजाजत लेना जरूरी होगा। इसके मुताबिक, कोई भी मीडिया आरोपों पर खबर पब्लिश नहीं कर सकेगा। जब तक कि उस विभाग के आला अफसरों से मंजूरी नहीं मिल जाती है।

अफसरों को कोर्ट में बात रखने का मौका मिलेगा

मजिस्ट्रेट किसी केस की जांच और कोर्ट में सुनवाई के लिए मंजूरी नहीं दे सकते हैं। इसके लिए सरकार या विभाग के आला अफसरों की इजाजत लेनी होगी। हालांकि इसके लिए अधिकतम 6 महीने का वक्त तय किया गया है। इस दौरान अगर अफसर मंजूरी ना दे तो इसे स्वतः स्वीकृति मान लिया जाएगा।

ये नियम उन्हीं मामलों में लागू होगा, जो उस सरकारी कर्मचारी के अधिकार में रहा हो। इसके लिए राज्य सरकार ने सीआरपीसी, 1973 और आईपीसी, 1860 में संशोधन के लिए कोड ऑफ क्रिमिनल प्रोसिजर राजस्थान अमेंडमेंट जारी किया है।
आमतौर पर देखा जाता है कि सरकार या विभागों के फैसलों से नाखुश आम जनता कोर्ट में पिटीशन फाइल कर देती है। ऐसे में नए बिल के लागू होने पर केस चलाए जाने से पहले सरकार या विभाग के जिम्मेदार अफसर अदालत में अपनी बात रख सकेंगे।

मीडिया पर बिल का क्या असर पड़ेगा?

बिल के मुताबिक, अगर केस पेंडिंग है तो किसी भी जज, मजिस्ट्रेट या सरकारी कर्मचारी का नाम, पता, फोटो और ऐसी कोई जानकारी जिससे उसकी पहचान उजागर हो। कोई भी इसे उजागर नहीं करेगा, जब तक कि इसके लिए मंजूरी ना मिले या जरूरी ना समझा जाए। अगर कोई ऐसा करता है तो उस पर 2 साल की सजा के साथ जुर्माना लगाया जा सकता है। कोई भी मीडिया आरोपों पर खबर पब्लिश नहीं कर सकेगा। जब तक कि उस विभाग के आला अफसरों से इसकी मंजूरी नहीं मिल जाती है। इसके लिए अधिकतम 6 महीने की समय सीमा तय की गई है।

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कांग्रेस ने उठाए सवाल, सरकार ने दिया जवाब

वसुंधरा सरकार के बिल पर कांग्रेस ने सवाल उठाए। विपक्ष ने कहा कि किसी कर्मचारी के खिलाफ शिकायत मिलने पर केस चलाने के लिए 6 महीने का वक्त देना ठीक नहीं है। इस दौरान आरोपी के पास केस को कमजोर करने का पूरा मौका होगा। पार्टी के डिप्टी चीफ व्हिप गोविंद सिंह डोटासरा ने कहा, ''सरकार मीडिया पर पाबंदी नहीं लगा सकती है। जो छपने लायक है मीडिया उसे छपेगा। इसमें पारदर्शिता होनी चाहिए। हम बिल का विरोध करेंगे।

Vasundhara

वहीं, मंत्री राजेंद्र राठौड़ ने कहा, ''कई मामलों में साजिश के तहत सरकारी अफसरों के खिलाफ सीआरपीसी-156 का गलत इस्तेमाल हुआ। अगर किसी अफसर या कर्मचारी पर लगे आरोपों को लेकर मीडिया रिपोर्ट छापती है तो इससे उनकी इमेज खराब हो जाती है। इसे रोकने के लिए बिल पेश किया जा रहा है।

 


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