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सालों बाद पिता की हत्या पर राहुल का छलका दर्द, बोले- मैं और मेरी बहन ने हत्यारों को माफ कर दिया

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| मार्च 11 , 2018 , 11:39 IST

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा है कि उन्होंने और उनकी बहन प्रियंका ने अपने पिता के हत्यारों को अब पूरी तरह माफ कर दिया है। सिंगापुर में आईआईएम एल्युमिनाई के साथ बातचीत में राहुल ने बताया, "पिता की हत्या के बाद कई साल मैं और मेरी बहन गुस्से में रहे। लेकिन अब हमने उन्हें माफ कर दिया है।" राहुल मलेशिया-सिंगापुर के 5 दिन के दौरे पर हैं।

जब ये घटनाएं हुईं, वो इतिहास का हिस्सा

इंडियन एक्सप्रेस में छपी खबर मुताबिक राहुल ने कहा, "जब ये घटनाएं हुईं, वो इतिहास का हिस्सा हैं। तब विचारों, बाहरी बलों और कंफ्यूजन को लेकर टकराहट थी। मुझे याद है जब मैंने प्रभाकरण (लिट्टे का पूर्व प्रमुख) को टीवी पर मृत देखा। तब मुझे दो अहसास हुए। एक- इस शख्स को इस तरह क्यों किया गया? दूसरा- मुझे प्रभाकरण और उसके बच्चों को लेकर दुख हुआ। इसकी वजह ये थी कि मैं उस दुख को समझ सकता था।

मैंने हिंसा देखी थी। लेकिन ये भी जाना कि वह भी एक इंसान था। उसका भी एक परिवार था। उसके जाने के बाद बच्चे रो रहे थे। मुझे ये सब सोचकर बहुत दुख हुआ। मैंने पाया कि लोगों से नफरत करना काफी कठिन है। मेरी बहन ने भी ऐसा ही किया।"
बता दें कि 21 मई, 1991 में तमिलनाडु के श्रीपेरम्बुदूर में राजीव गांधी की हत्या कर दी गई थी। हत्या लिट्टे की एक सुसाइड बॉम्बर ने की थी।

मुझे पिता की हत्या का पता था

राहुल ने कहा, "मैं जानता था कि मेरे पिता की मौत हो सकती थी। मैं जानता था कि मेरी दादी की हत्या हो सकती थी। राजनीति में अगर आप गलत ताकतों को दबाना चाहते हैं, आप किसी के साथ खड़े होते हैं तो आपको मरना पड़ेगा।"
प्रधानमंत्रियों के परिवार से जुड़े होने का क्या फायदा मिला, इस पर राहुल ने कहा, "ये इस बात पर निर्भर करता है कि आप सिक्के के कौन से पहलू हैं। हां, ये सच है कि जहां मैं हूं वहां कई तरह की सुविधाएं हैं। लेकिन ये नहीं कहा जा सकता है कि मैं मुश्किल राहों से नहीं गुजरा।

जिसने मेरी दादी की हत्या की उसके साथ मैं बैंडमिंटन खेलता था- राहुल

जब 14 साल का था, तब दादी की हत्या हो गई। जिन्होंने मेरी दादी को गोली मारी, मैं उनके साथ बैडमिंटन खेलता था। इसके बाद मेरे पिता की हत्या कर दी गई।

आप एक खास तरह के माहौल में रह रहे होते हैं...सुबह से लेकर रात तक आप 15 लोगों से घिरे होते हैं। मुझे नहीं लगता कि ये सुविधाएं हैं। इन सबसे सामंजस्य बैठाने में मुश्किल आती है।"


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