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REVIEW: तगड़ी कहानी के साथ दमदार पेशकश है अजय देवगन की 'रेड'

icon अमितेष युवराज सिंह | 0
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| मार्च 16 , 2018 , 10:13 IST

अजय देवगन और इलियाना डिक्रूज की फिल्म रेड आज सिनेमाघरों में रिलीज हो गई है। फिल्म को लेकर उत्साहित दर्शकों का इंताजर खत्म हो गया है। ‘आमिर’, ‘नो वन किल्ड जेसिका’ जैसी फिल्मों को डायरेक्ट करने वाले डायरेक्टर राजकुमार गुप्ता एक बार फिर नई कहानी को लेकर दर्शकों के सामने हाजिर है।

कहानी:

फिल्म रेड की उत्तर प्रदेश के लखनऊ सन् 1981 की कहानी है। जहां 1981 में यहां अमय पटनायक (अजय देवगन) का इनकम टैक्स डिपार्टमेंट में ट्रांसफर होता है। अमय अपनी पत्नी मालिनी पटनायक (इलियाना डिक्रूज) के साथ यहां शिफ्ट हो जाता है। ईमानदार इनकम टैक्स ऑफिसर अमय के अंदर कई लोग काम करते हैं लेकिन एक दिन जब अमय को पता चलता है कि रामेश्वर सिंह उर्फ ताऊजी (सौरभ शुक्ला) ने गैरकानूनी तरीके से अपने घर में बहुत पैसा छुपा रखा है तो वो अपनी टीम के साथ ताऊजी के घर पहुंच जाता है। इस रेड में कई ट्विस्ट और मोड़ आते हैं।

एक्‍ट‍िंग-

जहां तक सभी कलाकारों की एक्‍ट‍िंग की बात है, तो वो बेहद दमदार है। कहीं से भी ये फ‍िल्‍म एक्‍ट‍िंग के पक्ष से कमजोर नहीं लगती है। अजय देवगन सुपरस्‍टार हैं, तो उनसे कहीं कमी रह जाए, ये कम संभव है। हां सौरभ शुक्‍ला का अभ‍िनय प्रभावशाली है और इस फ‍िल्‍म में जान फूंकता है। इल‍ियाना भी सपोर्ट‍िंग एक्‍ट में हैं और एक ऑफीसर की बीवी के रूप में शालीन द‍िखती हैं। इंटरवल से पहले फिल्म आपको मजेदार लगती है, तो सेकंड हाफ में यह काफी रोमांचक हो जाती है। सबसे अच्छी बात यह है कि राजकुमार गुप्ता ने एडिटिंग काफी कसी हुई की है, जिस वजह से यह फिल्म महज दो घंटे से कुछ ज्यादा टाइम में खत्म हो जाती है। इस वीकेंड अगर आप कुछ रोमांचक देखना चाहते हैं, तो यह फिल्म आपके लिए ही है।

डायरेक्शन -

फिल्म में कैमरा वर्क कमाल का है, राजकुमार का डायरेक्शन बढ़िया है। साथ ही एडिटिंग बहुत ही शार्प है, जिसके लिए एडिटर बुधादित्य बैनर्जी की तारीफ जरूर होनी चाहिए। फिल्म की कहानी जबरदस्त है और राजकुमार गुप्ता ने रितेश शाह के साथ मिलकर जो स्क्रीनप्ले लिखा है वो बहुत ही अच्छा है।

कमजोर कड़ियां-

संगीत और बेहतर हो सकता था। गाने और भी अच्छे हो सकते थे ।

डायलॉग-

 - इस देश की गरीबी का कारण गरीब नहीं, बल्‍क‍ि उन्‍हें लूटने वाले तुम जैसे अमीर हैं
- मैं क‍िसी से भी नहीं डरता, क‍िसी का भी दरवाजा खटखटाने की ह‍िम्‍मत रखता हूं
- इस घर में कोई सरकारी नौकर मच्‍छर मारने नहीं आ सकता, तू रेड मारने आया है
- मैं बस ससुराल से शादी वाले द‍िन खाली हाथ लौटा हूं, वरना ज‍िसके घर सुबह सुबह पहुंचा हूं कुछ लेकर ही आया हूं
- छोटी मोटी रेड में तो मेरे साहब का मन नहीं लगता है, खतरा उठाओगे और ऐसे ही बीवी की जान न‍िकाल दोगे

क्यों देखें फिल्म -

2 घंटा 8 मिनट की यह फिल्म ध्यान भटकने का मौका नहीं देती। फिल्म मनोरंजक है। रितेश शाह के डायलॉग्स और सौरभ शुक्ला के अभिनय के लिए भी इस फिल्म को देखा जाना चाहिए। अगर इस वीकेंड कुछ खास प्लान नहीं कर रहे हैं तो जा सकते हैं। वैसे भी अप्रैल नजदीक आ रहा है। मनोजरंन तो होगा ही साथ ही साथ इनकम टैक्स भरने की प्रेरणा भी मिल जाएगी।

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अमितेष युवराज सिंह

लेखक न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में असिस्टेंट एग्जीक्यूटिव एडिटर हैं

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