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नेताओं-अफसरों को बचाएगा वसुंधरा सरकार का नया बिल, नहीं दर्ज करा सकते FIR

सतीश वर्मा, न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 1
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| अक्टूबर 21 , 2017 , 08:38 IST

सोमवार से शुरू हो रहे विधानसभा सत्र में राजस्थान सरकार एक ऐसा बिल लाने जा रही है जो एक तरह से सभी सांसदों-विधायकों, जजों और अफ़सरों को लगभग इम्युनिटी दे देगा। उनके ख़िलाफ़ पुलिस या अदालत में शिकायत करना आसान नहीं होगा। सीआरपीसी में संशोधन के इस बिल के बाद सरकार की मंज़ूरी के बिना इनके ख़िलाफ़ कोई केस दर्ज नहीं कराया जा सकेगा। यही नहीं, जब तक एफआईआर नहीं होती, प्रेस में इसकी रिपोर्ट भी नहीं की जा सकेगी। ऐसे किसी मामले में किसी का नाम लेने पर दो साल की सज़ा भी हो सकती है।

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नेता-ऑफिसर के खिलाफ नहीं होगा केस दर्ज

इस बिल के अनुसार किसी जज या पब्लिक सर्वेंट की किसी कार्रवाई के खिलाफ, जो कि उसने अपनी ड्यूटी के दौरान की हो, आप कोर्ट के जरिए भी एफआईआर दर्ज नहीं कर सकते। ऐसे मामलों में एफआईआर दर्ज कराने के लिए सरकार की मंजूरी लेना जरूरी होगा।

नेता-ऑफिसर के भ्रष्टाचार या अपराध के खिलाफ मीडिया में नहीं छप सकती रिपोर्ट

और अगर सरकार इजाजत नहीं देती, तो 180 दिनों के बाद किसी पब्लिक सर्वेंट के खिलाफ कोर्ट के जरिए एफआईआर दर्ज कराई जा सकती है। ऐसे लोक सेवक का नाम तब तक प्रेस की किसी रिपोर्ट में नहीं आ सकता जब त‍क कि सरकार इसकी इजाजत ना दे दे। अगर मंजूरी से पहले किसी भी पब्लिक सर्वेंट का नाम किसी प्रेस रिपोर्ट में आता है तो ऐसे मामलों में 2 साल तक की सजा का प्रावधान किया गया है।

 


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