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राजस्थान: नेताओं-अफसरों को बचाने वाला बिल पेश, विधानसभा में हुआ जमकर हंगामा

icon अमितेष युवराज सिंह | 0
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| अक्टूबर 23 , 2017 , 13:30 IST

राजस्थान सरकार ने सोमवार को विधानसभा में‘दंड विधियां (राजस्थान संशोधन) अध्यादेश, 2017’ को पेश कर दिया है। इस विवादित बिल को लेकर वसुंधरा सरकार को काफी विरोध का सामना करना पड़ा। विधानसभा में कांग्रेस ने बिल के खिलाफ जमकर हंगामा किया। कांग्रेस नेताओं के साथ-साथ बीजेपी के भी दो नेताओं घनश्याम तिवारी और एन रिजवी ने इस बिल के खिलाफ हंगामा किया। सदन में हो रहे भारी हंगामे के चलते विधानसभा की कार्यवाही को मंगलवार तक के लिए स्थगित कर दिया गया है।

क्या है अध्यादेश

वसुंधरा राजे सरकार की तरफ से लाए गए इस संसोधन अध्यादेश के अनुसार, अब कोई भी व्यक्ति जजों, अफसरों और लोक सेवकों के खिलाफ कोर्ट के माध्यम से एफआईआर दर्ज नहीं करा पाएगा। सरकार की इजाजत के बिना मजिस्ट्रेट ना तो जांच का आदेश दे सकेंगे और ना ही प्राथमिकी दर्ज कराने का आदेश दे सकेंगे। ऐसा करने के लिए उसे पहले सरकार से मंजूरी लेनी होगी।

इस बिल में लिखा है कि सरकार 180 दिनों के अंदर मामले की छानबीन करने को लेकर कोई जवाब नहीं देती है तो माना जाएगा कि सरकार ने जांच को मंजूरी दे दी है। बिल के मुताबिक, कानून का उल्लंघन करने पर हो सकती है 2 साल की सजा। इसके अलावा जब तक सरकारी एंजेसी आरोपों पर कार्रवाई की मंजूरी ना दे दे, तब तक मीडिया भी छह महीने तक किसी भी आरोपी के खिलाफ ना ही कुछ दिखा सकेगी और ना ही कुछ छाप सकेगी। तब तक मीडिया को छापने और दिखाने पर रोक होगी।

इस अध्यादेश के खिलाफ विधानसभा के बाहर कांग्रेसी विधायकों ने मुंह पर काली पट्टी बांधकर विरोध मार्च किया।


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अमितेष युवराज सिंह

लेखक न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में असिस्टेंट एग्जीक्यूटिव एडिटर हैं

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