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बांस पेड़ नहीं... घास है, राज्यसभा में पारित हुआ बिल

icon अमितेष युवराज सिंह | 0
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| दिसंबर 28 , 2017 , 09:11 IST

राज्यसभा ने इंडियन फॉरेस्ट एक्ट 1927 के कानून में संशोधन को मंजूरी दे दी, जिसके बाद बांस को अब पेड़ों की श्रेणी से हटा दिया गया है। अब जंगल के बाहर के इलाकों में भी बांस को उगाने या काटने पर किसी तरह का कोई प्रतिबंध नहीं होगा क्योंकि अब कानून के हिसाब से बांस पेड़ नहीं बल्कि सिर्फ एक घास है। इसी के साथ अब गैर-वन क्षेत्रों में उगाए गए बांस को वृक्ष नहीं माना जाएगा तथा इसकी खेती की जा सकेगी।

विधेयक में कटाई और एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाने के लिये गैर वन क्षेत्र में उगे हुए बांस को छूट प्रदान करने के लिए कानून में वृक्ष की परिभाषा से ‘बांस’ शब्द हटाए जाने का प्रस्ताव किया गया है। विधेयक पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए वन एवं पर्यावरण मंत्री डॉ. हर्षवर्द्धन ने कहा कि यह किसानों के हित में है और किसी भी रूप में जन विरोधी नहीं है। देश को इस विधेयक के लिये 90 वर्ष तक इंतजार करना पड़ा और मोदी सरकार ने ऐसी किसान हितैषी पहल की है। इसके माध्यम से 1927 के मूल कानून में संशोधन किये जाने का प्रस्ताव किया गया है।

भारतीय वन संशोधन विधेयक को लोकसभा 20 दिसंबर को पारित कर चुकी थी। बुधवार को राज्यसभा ने भी इसे ध्वनिमत ये पारित कर दिया। हालांकि कांग्रेस, समाजवादी पार्टी तथा बीजू जनता दल के सदस्यों ने विधेयक का विरोध करते हुए सदन से वॉकआउट किया। उनका कहना था कि सरकार उद्योगपतियों के फायदे के लिए विधेयक को बिना समुचित विचार-विमर्श के जल्दबाजी में पारित करवा रही है। इसीलिए पहले अध्यादेश लेकर आई थी।

इसके पहले विपक्ष ने सरकार पर आरोप लगाया कि नवंबर में अध्यादेश लाकर उसने जल्दबाजी की जबकि संसद का शीतकालीन सत्र निकट ही था। इस पर मंत्री ने कहा कि अध्यादेश में ही इस बात का जिक्र था कि सरकार जल्दी ही इस संबंध में एक विधेयक लाएगी. विपक्ष द्वारा विधेयक के प्रावधानों की आलोचना किए जाने पर हर्षवर्द्धन ने कहा कि उन्हें राजनीतिक चश्मे से इसे नहीं देखना चाहिए और यह विधेयक पूरी तरह से गरीबों तथा किसानों के हित में है।

कांग्रेस सहित कई अन्य विपक्षी दलों ने मंत्री के जवाब से असहमति एवं असंतोष जताते हुए सदन से वाक आउट किया। उन्होंने कहा कि यह एक ऐतिहासिक सुधार है और इस पहल के कारण देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। यह काम पहले ही किया जाना चाहिए था लेकिन इसके लिये इतना लम्बा इंतजार करना पड़ा।

विधेयक पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए पर्यावरण, वन व जलवायु परिवर्तन मंत्री डा. हर्षव‌र्द्धन ने विपक्ष के आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया। उन्होंने कहा इससे आदिवासियों, वनवासियों तथा किसानों को फायदा होगा क्योंकि उनकी आमदनी बढ़ेगी। विधेयक गैर-वन क्षेत्रों में उगाए गए बांस को काटने और ढुलाई करने की अनुमति देता है। हालांकि वन क्षेत्र में उगाए गए बांस को अभी भी वृक्ष माना जाएगा तथा उस पर मौजूदा प्रतिबंधात्मक प्रावधान लागू रहेंगे।

कागज और फर्नीचर बनाने समेत कई ऐसे उद्योग हैं, जहां बांस का खूब इस्तेमाल होता है और उम्मीद की जा रही है कि कानून में बदलाव के बाद बांस के उत्पादन और खपत दोनों में भारी बढ़ोतरी होगी। खास तौर पर आदिवासी इलाकों में सरकार के इस फैसले के बाद बांस उगाने और बेचने को लेकर नया दौर शुरू होने की उम्मीद है।


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अमितेष युवराज सिंह

लेखक न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में असिस्टेंट एग्जीक्यूटिव एडिटर हैं

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