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आम आदमी की भाषा में आए अदालतों के फैसले: राष्ट्रपति

icon अमितेष युवराज सिंह | 0
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| अक्टूबर 29 , 2017 , 07:32 IST

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा है कि उच्च न्यायालय के निर्णयों को वादियों के लिए उस भाषा में समझने योग्य बनाए जाने की जरूरत है जिसे वे जानते हैं। उन्होंने कहा कि कई वादी अंग्रेजी में दक्ष नहीं होते इसलिए वे निर्णय के अहम बिंदुओं को नहीं समझ पाते और वकील का सहारा लेते हैं। कोविंद ने कहा, "ऐसा सिस्टम बनाया जा सकता है कि लोगों को लोकल लैंग्वेज में फैसलों की सर्टिफाइड ट्रांसलेटेड कॉपी मिल सके।" राष्ट्रपति ने मामलों के तेजी से निपटारे पर भी जोर दिया। राष्ट्रपति ने सुझाव दिया कि ऐसी व्यवस्था विकसित किए जाने की जरूरत है जहां उच्च न्यायालयों द्वारा स्थानीय या क्षेत्रीय भाषाओं में निर्णयों की प्रमाणित अनुवादित प्रतियां उपलब्ध कराई जाएं।

कोविंद ने कहा, 'निर्णय सुनाए जाने के बाद 24 या 36 घंटे की अवधि में ऐसा किया जा सकता है। माननीय केरल उच्च न्यायालय में भाषा मलयालम या माननीय पटना उच्च न्यायालय में हिंदी हो सकती है, या जैसा मामला हो।' आपको बात दें कि राष्ट्रपति शनिवार को केरल हाईकोर्ट के हीरक जयंती समारोह के समापन कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर राष्ट्रपति ने मामलों को तेजी से निपटाने की भी वकालत की।  उनका कहना था कि न्याय में देरी होने से समाज में ‘सबसे गरीब और सबसे वंचित’ पीड़ित हो रहे है।

यह देश के लिए चिंता का विषय है। राष्ट्रपति कोविंद ने कहा, ‘हमारे देश में निर्णय देने में विलंब होना चिंता की बात है। हमारे समाज में सबसे गरीब और सबसे वंचित लोग न्याय में देरी के पीड़ितों में शामिल है। हमें मामलों के जल्द निस्तारण को सुनिश्चित करने के लिए एक तंत्र बनाए जाने की जरूरत है।’ उन्होंने कहा कि ‘अदालत की कार्यवाही को लंबा खींचने की रणनीति के बजाए हम सभी उस दृष्टिकोण पर विचार कर सकते हैं जिसमें एक आपात स्थिति में स्थगन को अपवाद बनाया जा सके।’

आपको बता दें कि केरल हाईकोर्ट के हीरक जयंती समारोह कार्यक्रम में ख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा और केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद और कई न्यायाधीश भी शामिल थे।a


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अमितेष युवराज सिंह

लेखक न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में असिस्टेंट एग्जीक्यूटिव एडिटर हैं

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