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बाढ़ के बाद केरल में 'रैट फीवर' का कहर, अब तक 43 की मौत, जानें बचने के उपाय

icon अमितेष युवराज सिंह | 0
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| सितंबर 3 , 2018 , 17:30 IST

केरल में बाढ़ का कहर खत्म होने के बाद अब वहां पानी से फैलने वाली बीमारी से लोगों की मौतें हो रही हैं। 20 अगस्त से लेकर अब तक रैट फीवर की वजह से 43 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। रविवार को इससे 10 और लोगों की मौत हो गई। पिछले दिनों इस बीमारी से मरने वालो की संख्या 31 थीं।

जबकि अधिकारियों के मुताबिक लगभग 350 लोगों में रैट फीवर की शिकायत मिली है जिनका इलाज प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में किया जा रहा है । पिछले दिनों 15 पॉज़िटिव मामले पाए गए हैं। रैट फीवर के अधिकतर मामले कोझीकोड और मलप्पुरम जिलों पाए गए हैं।

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बीमारी के कहर को देखते हुए राज्य सरकार ने लोगों से अतिरिक्त सावधानी बरतने का अलर्ट जारी किया है। स्वास्थ्य मंत्री कुमारी शैलजा ने कहा कि राज्य सरकार सभी ज़रूरी और एहतियाती कदम उठा रही है और बाढ़ के पानी के संपर्क में आने वाले लोगों से अपील की है कि वह अतिरिक्त निगरानी रखें। उन्होंने कहा कि जो लोग सफाई के काम में लगे हैं उन्हें 'डॉक्सीसाइलिन' की खुराक ले लेनी चाहिए. हालांकि उन्होंने लोगों को खुद से दवा लेने से मना किया। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य केंद्रों और व सरकारी अस्पतालों में ज़रूरत से ज़्यादा दवाएं मौजूद हैं।

क्या है रैट फीवर

'रैट फीवर' एक बैक्टीरिया से फैलने वाली बीमारी है जो दूषित मिट्टी या पानी में मौजूद बैक्टीरिया से फैलती है। रैट फीवर का बैक्टीरिया दूषित पानी में किसी पीड़ित किसी जानवर के जरिए पहुंचता है। इन 10 में से 4 मौतें शनिवार और रविवार को ही हुई हैं। डेक्कन हेराल्ड की रिपोर्ट के मुताबिक पिछले दो दिनों में इस बीमारी के 73 केसों की स्वास्थ्य विभाग ने पुष्टि की है।

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कैसे फैलता है रैट फीवर

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार अभी केरल में जैसे हालत हैं, उसमें बारिश, बाढ़ और दूसरी तरह की आपदाओं के चलते पानी और मिट्टी के उस बैक्टीरिया से दूषित होने की बहुत आशंका है जिससे लैप्टोसपोरोसिस यानि रैट फीवर के फैलने की संभावना होती है। जंगली और घरेलू दोनों ही तरह के जानवरों का इन बैक्टीरिया को फैलाने में बहुत रोल होता है।

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अगर किसी इंसान की त्वचा डूबने या तैरने के दौरान इस बैक्टीरिया के संपर्क में होती है तो यह बीमारी हो जाती है। अगर त्वचा कटी या छिली है तो इसके जल्दी संपर्क में आने की संभावना होती है। इसके बैक्टीरिया उस भीगी मिट्टी, घास या पौधों में जिंदा रहते हैं जिनपर इस बैक्टीरिया से ग्रसित जानवर ने पेशाब किया होता है। कभी-कभी इसका संक्रमण बैक्टीरिया से दूषित खाना खाने, कोई दूषित चीज चुभ जाने या फिर किसी बैक्टीरिया से दूषित पेय पदार्थ पीने से भी हो सकता है।

रैट फीवर के लक्षण

रैट फीवर के ये कुछ लक्षण है जैसे कि तेज बुखार आना, सिरदर्द, शरीर में दर्द, पेट में दर्द, और उल्टियां होना।

किन अंगो पर इसका पड़ता है इसका बूरा प्रभाव

रैट फीवर का सीधा असर किडनी पर, दिमाग पर (मेनिनजाइटिस जैसी जानलेवा बीमारी हो सकती है), लीवर पर (लीवर फेल हो सकता है) या फिर सांस लेने में परेशानी हो सकती है। सांस की नली से जुड़े कई रोग भी हो सकते हैं।


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अमितेष युवराज सिंह

लेखक न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में असिस्टेंट एग्जीक्यूटिव एडिटर हैं

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