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CBI Vs CBI: CVC ने सुप्रीम कोर्ट में सौंपी सीलबंद रिपोर्ट, शुक्रवार को अगली सुनवाई

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| नवंबर 12 , 2018 , 13:35 IST

सीबीआई विवाद पर केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC) ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में सीलबंद जांच रिपोर्ट पेश किया। इस दौरान सुप्रीम कोर्ट ने देरी से जांच रिपोर्ट जमा करने को लेकर सीवीसी को फटकार भी लगाई। रिपोर्ट पेश करते हुए सीवीसी की ओर से कहा गया कि यह 3 सेटों में है। इस पर कोर्ट ने कहा कि रिपोर्ट समय पर क्यों नहीं दाखिल की। कोर्ट ने कहा कि रविवार को भी सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री खोली गई थी फिर भी CVC की रिपोर्ट पेश नहीं हुई। मामले की अगली सुनवाई शुक्रवार को होगी।

सीवीसी ने अपनी रिपोर्ट में सीबीआई के अंतरिम डायरेक्टर नागेश्वर राव द्वारा लिए गए फैसलों को भी शामिल किया है। बता दें कि पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि राव कोई नीतिगत फैसला नहीं लेंगे। दरअसल, राव ने अंतरिम डायरेक्टर का पदभार संभालते ही सीबीआई के कई अधिकारियों के ताबड़तोड़ तबादले किए थे।

बता दें कि छुट्टी पर भेजे जा चुके सीबीआई डायरेक्टर आलोक वर्मा की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने 26 अक्टूबर को CVC को 2 हफ्तों में जांच रिपोर्ट पेश करने को कहा था। वर्मा ने खुद को छुट्टी पर भेजे जाने के केंद्र सरकार के फैसले को चुनौती दी है। केंद्र सरकार ने वर्मा से सारे अधिकार वापस लेकर उन्हें छुट्टी पर भेज दिया है। सूत्रों के मुताबिक सीवीसी की जांच में वर्मा के खिलाफ किसी भी तरह के ठोस सबूत हाथ नहीं लगे हैं। वर्मा ने राकेश अस्थाना द्वारा अपने खिलाफ लगाए गए आरोपों को बिंदुवार तरीके से नकारा है।

क्या है विवाद?

वर्मा और अस्थाना ने एक-दूसरे पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे, जिसके बाद विवाद काफी गहरा गया था। बाद में केंद्र ने दोनों अधिकारियों को जबरन छुट्टी पर भेजा दिया और दोनों से उनके सारे अधिकार वापस ले लिए थे। केंद्र के इन्हीं फैसलों को वर्मा ने शीर्ष अदालत में चुनौती दी है।

विवाद के केंद्र में मीट कारोबारी मोइन कुरैशी है और दोनों छोर पर सीबीआई के 2 सबसे बड़े अफसर डायरेक्टर आलोक वर्मा और स्पेशल डायरेक्टर राकेश अस्थाना हैं। दोनों अफसरों को सरकार ने छुट्टी पर भेज दिया है और अंतरिम डायरेक्टर के तौर पर एम. नागेश्वर राव को नियुक्त किया है। वर्मा और अस्थाना के रिश्ते तभी से तल्खी भरे हैं जब पहले ने दूसरे के स्पेशल डायरेक्टर पद पर नियुक्ति को लेकर आपत्ति जताई थी।

वर्मा और अस्थाना दोनों ने एक दूसरे पर लगाए हैं भ्रष्टाचार के आरोप

अस्थाना ने कैबिनेट सेक्रटरी से वर्मा की शिकायत की है और उनपर कुरैशी के करीबी सहयोगी सतीश बाबू सना से 2 करोड़ रुपये रिश्वत लेने का भी आरोप लगाया है। 15 अक्टूबर को सीबीआई ने अस्थाना के खिलाफ रिश्वतखोरी के आरोप में केस दर्ज किया। खास बात यह है कि FIR में अस्थाना पर सतीश बाबू सना से 3 करोड़ रुपये रिश्वत लेने का आरोप लगाया गया है। FIR के 4 दिन बाद अस्थाना ने सीवीसी को खत लिखकर वर्मा पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए। बाद में अस्थाना FIR को रद्द करने के लिए दिल्ली हाई कोर्ट पहुंचे। हाई कोर्ट ने फिलहाल उनकी गिरफ्तारी और मामले में आगे की कार्रवाई पर रोक लगा दी है।


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