बिज़नेस

गहरा रहा आर्थिक संकट: बैंकों का NPA 8 लाख करोड़, 51 हजार MW के पावर प्‍लांट बंद

सतीश वर्मा, न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
338
| अक्टूबर 30 , 2017 , 14:07 IST

लगभग 8 लाख करोड़ रुपए के एनपीए से जूझ रहे बैंकों के लिए अच्‍छी खबर नहीं है। पावर सेक्‍टर को दिया गया लगभग 4 लाख करोड़ रुपए का कर्जा एनपीए हो सकता है। इसकी बड़ी वजह यह है कि लगभग 51 हजार मेगावाट कैपेसिटी के पावर प्‍लांट बंद पड़े हैं। इतना ही नहीं, 23 हजार मेगावाट के ऐसे प्‍लांट भी हैं, जो अंडर कंस्‍ट्रक्‍शन हैं और अगले पांच साल में इंस्‍टॉल हो जाएंगे, लेकिन वर्तमान हालात को देखते हुए इन प्‍लांट के भी चालू होने की संभावना कम है।

Power 1

क्‍यों बंद पड़े हैं प्‍लांट

हाल ही में, रिसर्च फर्म क्रिसिल द्वारा जारी ईयर बुक के मुताबिक, पिछले दो साल के दौरान डोमेस्टिक कोल सप्‍लाई में तो सुधार हुआ है। बावजूद इसके कई प्राइवेट पावर प्‍लांट्स को कोयले की कमी का सामना करना पड़ रहा है। इसके अलावा, कई ऐसे प्‍लांट्स भी हैं, जिनके साथ डिस्‍कॉम्‍स (बिजली वितरण कंपनियां) या तो पावर परचेज एग्रीमेंट (पीपीए) नहीं कर रही हैं या पहले से किया गया पीपीए खत्‍म कर दिया है। कोयले की तरह ही गैस की अनुपलब्‍धता भी पावर प्‍लांट्स के न चलने का कारण बना हुए हैं।

कितना होगा असर

रिपोर्ट बताती है कि थर्मल और गैस से चलने वाले लगभग 51 हजार मेगावाट कैपेसिटी के पावर प्‍लांट बंद पड़े हैं। इनमें से 30 हजार मेगावाट कैपेसिटी के पावर प्‍लांट बंद पड़े हैं। इनमें से 30 हजार मेगावाट कैपेसिटी के प्‍लांट केवल पीपीए और फ्यूल के कारण बंद पड़े है, जबकि 21 मेगावाट कैपेसिटी के प्‍लांट बंद होने का कारण कानूनों में हुए फेरबदल बताया गया है।

क्‍यों नहीं हो रहे पीपीए

दरअसल, डिस्कॉम्स की माली हालत ठीक नहीं है, इसलिए वे पीपीए साइन नहीं कर रहे हैं दूसरा पिछले दो साल के दौरान सोलर और विंड पावर की कीमतों में काफी कमी आई है। इस कारण राज्‍यों की डिस्‍कॉम्‍स थर्मल पावर की बजाय सोलर व विंड पावर परचेज करने पर ज्‍यादा फोकस कर रही है। हाल ही में आंध्र प्रदेश, गुजरात और कर्नाटक की सरकारी डिस्‍कॉम्‍स ने थर्मल पावर प्‍लांट्स से लैटर ऑफ अवार्ड (एलओए) कैंसिल करने को कहा है, क्‍योंकि थर्मल के मुकाबले सोलर व विंड पावर सस्‍ती पड़ रही है।

5 साल में और बिगड़ सकते हैं हालात

रिपोर्ट बताती है कि लगभग 23000 मेगावाट के पावर प्लांट अंडर कंस्ट्रक्शन हैं। जो अगले 5 साल में ऑनलाइन हो जाएंगे, लेकिन हालात नहीं सुधरे तो ये प्लांट भी प्रोडक्शन शुरू नहीं कर पाएंगे और लगभग 1 लाख 30 हजार करोड़ रुपये का इन्वेस्टमेंट प्रभावित होगा। जो एनपीए की राशि को और अधिक बढ़ा देगा।

Power 2

क्यों है कोयले की दिक्कत

जानकार बताते हैं कि दो साल में डोमेस्टिक कोल की सप्लाई तो बढ़ी है, लेकिन पिछले कुछ साल के दौरान जितने भी प्लांट बने हैं, उनमें से अधिकतर इमोर्टेड कोल से चलते हैं। उनमें ऐसी तकनीक का इस्तेमाल किया गया है कि वे केवल इम्पोर्टेड कोल से ही चल सकते हैं, लेकिन इम्पोर्टेड कोल की कीमत लगातार बढ़ रही है, इसलिए इस कोयले की सप्लाई कम हो रही है। वहीं कोल इंडिया के अधिकारी बताते हैं कि हाइड्रो और न्यूक्लिअर पॉवर प्लांट का प्रोडक्शन कम होने के के कारण थर्मल पर दबाव बढ़ा है, जिस कारण कोल प्रोडक्शन अधिक होने के बावजूद सभी थर्मल प्लांट को कोयले की पूरी सप्लाई नहीं हो पा रही है।

 

 

 

 


कमेंट करें