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RSS विजयादशमी: बोले भागवत-70 साल में पहली बार दुनिया का ध्यान भारत की तरफ

सतीश वर्मा, न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| सितंबर 30 , 2017 , 09:42 IST

शनिवार को नागपुर शहर के रेशिमबाग मैदान में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने विजयादशमी उत्सव मनाया। इस मौके पर मोहन भागवत ने कहा- "कल की जो मुंबई की जो दुखद घटना हुई, उसको लेकर सबकी मन में वेदना हुई है। जीवन में ऐसी बातों का सामना करके आगे बढ़ना पड़ता है।" इस मौके पर उन्होंने डोकलाम इश्यू और दुनिया में भारत की मौजूदा स्थिति पर मोदी सरकार के काम और नीतियों की तारीफ की। उन्होंने कहा- 70 साल में पहली बार दुनिया का भारत की तरफ ध्यान गया है। सीमा पर हम जवाब दे रहे हैं। डोकलाम विवाद में भी हमने भारतीय गौरव को झुकने नहीं दिया।

विजयादशमी के मौके पर आरएसएस के आयोजन में सालों बाद लालकृष्ण आडवाणी भी मौजूद रहे। इस मौके पर केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और महाराष्ट्र के सीएम देवेंद्र फडणवीस भी मौजूद थे।

भागवत ने कहा- हालात बदले हैं कश्मीर में

भागवत ने कहा, "कश्मीर की बात करें तो 2-3 महीने पहले लग रहा था कि वहां क्या होगा। लेकिन जिस तरह वहां आतंकियों का बंदोबस्त हुआ, सेना को पूरी ताकत दे दी गई और आतंकियों की शक्तिधारा को बंद कर दिया गया। हमारा कोई शत्रु नहीं लेकिन अपने से शत्रुता रखने वालों को जवाब दिया है। बीते कई सालों में जम्मू, कश्मीर घाटी और लद्दाख में विकास हुआ ही नहीं। उनके साथ सौतेला व्यवहार किया गया। कुछ तो भारत स्वतंत्र के बाद दो देश बने- भारत-पाकिस्तान। भारत में सब प्रकार के लोग आए।

खुराफात करता रहता है पाकिस्तान

उनका यही सोचना था कि हम अपना-अपनी धर्म-मत मानेंगे। वो अभी तक भारत के नागरिक नहीं बन पाए। जो नागरिक थे, वो आज भी अधिकारों से वंचित हैं। इन समस्याओं का निदान करना पड़ेगा। हम जानते हैं कि जम्मू-कश्मीर सीमावर्ती राज्य है। पाकिस्तान वहां खुराफात करता रहता है। लोगों को घर छोड़कर जाना पड़ता है। उनका खेती करना और तमाम चीजें दूभर हो जाती हैं। वहां आज भी जैसी स्वास्थ्य सुविधाएं होनी चाहिए, वैसी पहुंची नहीं है। राज्य प्रशासन को इसकी कोशिश करनी चाहिए।

भारत को अहमियत मिली है दुनिया में

भागवत ने कहा, "हमारे यहां विदेशी आए और हमने राष्ट्र को खो दिया। लेकिन राष्ट्र की विचारधारा सतत चलती रही। जब सारी बातों जैसे सुरक्षा, अर्थव्यवस्था में संस्कृति झलकती है तो दुनिया में उस देश को मान्यता मिलती है। अब गौरव-अभिमान का भाव जगाने की थोड़ी अनुभूति होने लगी है।"


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