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लीक से हटकर बनी फिल्म है पसंद तो जरूर देखें मनोज बाजपेयी की 'रुख'

icon अमितेष युवराज सिंह | 0
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| अक्टूबर 27 , 2017 , 14:21 IST

मनोज बाजपेयी की फिल्म ‘रुख’ आज बॉक्स ऑफिस पर रिलीज हो गई है। मनोज बाजपेई, स्मिता तांबे और आदर्श गौरव स्टारर फिल्म ‘रुख’ एक मिस्ट्री ड्रामा मूवी है। फिल्म से निर्देशक अतानु मुखर्जी अपना डायरेक्टोरियल डेब्यू कर रहे हैं यह फिल्म दर्शकों की उसी क्लास की कसौटी पर ही खरा उतरने का दम रखती है जो सिनेमाहॉल में मुबइया मसाला, ऐक्शन और सिर्फ टाइमपास के मकसद से नहीं आते बल्कि ऐसी फिल्म की तलाश में थिअटर का रुख करते हैं जो अलग हो। फिल्म की स्पीड अंत तक इस कदर धीमी है कि कई बार हॉल में बैठे दर्शकों का सब्र लेने लगती है।

कहानी-

फिल्म 'रुख' की कहानी पिता और पुत्र के रिश्ते की है। पिता दिवाकर माथुर यानी मनोज बाजपेयी एक फैक्ट्री में काम कर करते हैं और उसके को-ऑनर भी होते हैं। दिवाकर का एक बेटा ध्रुव (आदर्श गौरव) होता है जिसे काफी छोटी उम्र में ही पत्नी नंदिया यानी स्मिता तांबे के साथ आपसी डिसीजन कर दिवाकर बोर्डिंग स्कूल भेज देते हैं। कुछ सालों बाद दिवाकर की एक रोड एक्सीडेंट में डेथ हो जाती है लेकिन बेटे ध्रुव को ये सिर्फ एक्सीडेंट नहीं लगता। ऐसे में ध्रुव पिता की मौत के पीछे की वजहों की छानबीन करता है तब उसे कई सारी बातें पता चलती हैं। क्या ध्रुव अपने पिता के मौत की असली वजह जान पाता है? क्या वाकई ये रोड एक्सीडेंट एक साजिश होती हैं? इन सवालों के जवाब जानने के लिए आपको ये फिल्म देखनी पड़ेगी।

डायरेक्शन-

फिल्म का डायरेक्शन और स्टोरी लाइन अच्छी है। फिल्म में लाइट और आर्ट वर्क पर काफी काम किया गया है। बात अगर कहानी की करें तो ये काफी धीरे-धीरे चलती है। सरल कहानी होने के कारण आप आसानी से पता लगा लेते हैं कि अगले पल क्या होने वाला है। इसके ऊपर ध्यान दिया जा सकता है। वहीं फिल्म का मिजाज काफी डार्क शेड है। ऐसे में ये फिल्म एक खास तबके के लिए है इसे मास शायद ही देखना पसंद करेगी।

एक्टिंग-

फिल्म में मनोज बाजपेयी ने पिता ने रूप में बहुत बढ़िया काम किया है। वहीं आदर्श गौरव और स्मिता तांबे का काम भी सराहनीय है। कुमुद मिश्रा फिल्म में मनोज के दोस्त बने हैं। देखा जाए तो फिल्म में स्टार्स की एक्टिंग और कास्टिंग अच्छी है।

म्यूजिक-

फिल्म के दोनों गाने अच्छे हैं कहानी के साथ जाते हैं। बैकग्राउंड स्कोर भी साथ-साथ चलता है और सॉन्ग 'खिड़की' बढ़िया है। अमित त्रिवेदी और बाकी सिंगर ने अच्छा काम किया है।

कमजोर कड़िया -

बेशक फिल्म एक मर्डर मिस्ट्री है लेकिन डायरेक्टर ने फिल्म को स्क्रिप्ट की डिमांड पर एक ही सिंगल ट्रैक पर पेश किया है। अतानु की कहानी और किरदारों पर तो अच्छी पकड़ है, लेकिन स्क्रिप्ट पर उन्होंने ज्यादा काम नहीं किया। यही वजह है कि फिल्म की गति बेहद धीमी है। अगर पौने दो घंटे की फिल्म में भी दर्शक कहानी और किरदारों के साथ बंध नहीं पाए तो यह कहीं न कहीं डायरेक्शन की खामी ही कहा जाएगा।

देखें या नहीं-

अगर आप डार्क शेड की सिंपल सीधी कहानियों और मनोज बाजपेयी की फिल्म के दीवाने हैं तो जरूर एक बार देख सकते हैं।


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अमितेष युवराज सिंह

लेखक न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में असिस्टेंट एग्जीक्यूटिव एडिटर हैं

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