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डॉलर के सामने बेदम हो रहा रुपया, रिकॉर्ड निचले स्तर 72.50 के पार

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| सितंबर 10 , 2018 , 14:10 IST

डॉलर के मुकाबले रुपया रेकॉर्ड निचले स्तर पर है। अमेरिकी डॉलर के सामने रुपया इस साल 12 फीसदी कमजोर होकर 72 के पार चला गया है। सरकार इसके लिए कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि सहित बाहरी कारणों को जिम्मेदार बता रही है। हालांकि, पिछले कुछ सालों में रुपया दूसरे कई देशों की करंसी के मुकाबले काफी मजबूत हुआ है। आइए रुपये की कमजोरी और मजबूती के कारणों पर डालें नजर

रेकॉर्ड निचले स्तर पर रुपया, 72.50 के पार

डॉलर के मुकाबले रुपये में गिरावट आई है, लेकिन यह सबसे कमजोर नहीं है। यदि पिछले 5 साल का डेटा देखें तो पता चलता है कि रुपया दूसरी मुद्राओं के मुकाबले मजबूत हुआ है। हालांकि, अन्य करंसी के मुकाबले डॉलर का प्रभाव अधिक होता है, क्योंकि अधिकतर अंतरराष्ट्रीय सौदे डॉलर में ही होते हैं। इस बीच डॉलर अधिकतर देशों की करंसी के मुकाबले मजबूत हो रहा है।

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क्यों मजबूत हो रहा है डॉलर?

अमेरिका के कई घरेलू कारणों ने दूसरी कंरसी के मुकाबले डॉलर को मजबूत बनाया है। 2008 के वित्तीय संकट से उबरने के बाद अमेरिकन फेडरल रिजर्व (सेंट्रल बैंक) ने महंगी मौद्रिक नीति को खत्म कर दिया है। करंसी की सप्लाई में कमी से डिमांड बढ़ी और डॉलर मजबूत होने लगा। इसके अलावा, अमेरिकी केंद्रीय बैंक ने ब्याज दरों में वृद्धि की और यूरोपियन केंद्रीय बैंक ने कटौती की। इसका मतलब है कि डॉलर डिपॉजिट पर यूरो के मुकाबले अधिक रिटर्न मिलेगा। इस वजह से भी डॉलर की डिमांड बढ़ी।

कौन तय करता है अंतरराष्ट्रीय विनिमय दर?

यह आमतौर पर डिमांड और सप्लाई से यह तय होता है। लगभग सभी देश अपनी करंसी की वैल्यू तय करने के लिए फ्लोटिंग एक्सचेंज रेट तय करते हैं। मूल रूप से इसका मतलब है कि मुद्रा उस मूल्य के लायक है जो एक खरीदार इसके लिए भुगतान करने को तैयार है। इसका भाव बाजार की ताकतों द्वारा निर्धारित किया जाता है और आर्थिक स्थिरता, मुद्रास्फीति, विदेशी व्यापार जैसे कारकों पर निर्भर करता है।

अमेरिकी डॉलर का क्यों है इतना महत्व?

अमेरिकी डॉलर दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण करंसियों में से एक है। अंतरराष्ट्रीय लेनदेन के लिए इसका प्रयोग बहुत ज्यादा होता है। अंतरराष्ट्रीय व्यापार में इसकी भूमिका को देखते हुए अधिकतर देश विदेशी मुद्रा भंडार में डॉलर रखते हैं, इस वजह से डॉलर के विनिमय दर में वृद्धि होती है।

5 साल में ऐसा रहा है रुपये का प्रदर्शन

2013 और 2018 के आंकड़ों की तुलना करें तो रुपया ऑस्ट्रेलियन डॉलर, कैनेडियन डॉलर, मलयेशियाई रिंग्गित, ब्रिटिश पाउंड, यूरो, चाइनीज युआन के खिलाफ मजबूत हुआ है, लेकिन अमेरिकी डॉलर के अलावा सिंगापुर डॉलर, स्विस फ्रैंक के मुकाबले भी मामूली गिरावट आई है।

 


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