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सबरीमाला: फेल हुई महाबैठक, बीजेपी-कांग्रेस ने किया सर्वदलीय मीटिंग से किनारा

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| नवंबर 15 , 2018 , 16:40 IST

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद सबरीमाला मंदिर में महिलाएं प्रवेश नहीं कर पाईं हैं... क्या इस मामले का कोई मिला जुला हल निकल सकेगा। इसी बात को लेकर केरल के मुख्यमंत्री पी. विजयन की तरफ से गुरूवार को सर्वदलीय बैठक बुलाई गई थी लेकिन बीजेपी और कांग्रेस ने इस बैठक से वॉक आउट कर लिया जिसकी वजह से सर्वदलीय बैठक फेल साबित हो गई है।

कांग्रेस और बीजेपी ने सरकार से कहा कि वह सुप्रीम कोर्ट से अपने फैसले को लागू करने के लिए और वक्त मांगे। वहीं केरल सरकार सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन कराने पर अडिग है। केरल के मुख्यमंत्री पी. विजयन ने मंदिर में महिलाओं का प्रवेश सुनिश्चित करने के लिए कुछ नियम बनाने के संकेत दिए हैं। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने 28 सितंबर को दिए अपने फैसले में कहा था कि सभी उम्र की महिलाओं को सबरीमाला मंदिर में प्रवेश मिलना चाहिए।

पी. विजयन ने कहा कि राज्य सरकार कोर्ट के इस फैसले के खिलाफ कदम नहीं उठा सकती है। हम श्रद्धालुओं की आस्था का सम्मान करते हैं। हम कोर्ट के फैसले को लागू करने को लेकर बाध्य हैं।

हालांकि उच्चतम न्यायालय ने केरल के सबरीमाला मंदिर में सभी आयु-वर्ग की महिलाओं को प्रवेश की अनुमति देने के अपने फैसले पर बुधवार को रोक लगाने से इनकार कर दिया। मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष एक वकील ने न्यायालय के 28 सितंबर के फैसले पर रोक लगाने का अनुरोध किया। इस पर पीठ ने कहा कि 22 जनवरी तक इंतजार करें, जब संविधान पीठ पुनर्विचार याचिकाओं पर सुनवाई करेगी।

कड़ी सुरक्षा व्यवस्था में सबरीमाला मंदिर-:

शुक्रवार से शुरू हो रहे पर्व से पहले प्रशासन की तरफ से मंदिर को पूरी तरह किले में तब्दील करने की तैयारी है। सूबे की आधी पुलिस (करीब 21 हजार पुलिसकर्मी) सुरक्षा व्यवस्था में तैनात होगी। दो महीने के बीच चार चरणों में इनकी तैनाती होगी। जानकारी के मुताबिक पहली बार सबरीमाला मंदिर में सुरक्षा के इतने कड़े इंतजाम किए जा रहे हैं।

कोर्ट ने माना मौलिक अधिकारों का उल्लंघन-:

- 11 जुलाई 2016 को सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि महिलाओं के मंदिर में प्रवेश पर रोक का यह मामला संवैधानिक पीठ को भेजा जा सकता है। 

- सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि ऐसा इसलिए क्योंकि यह संविधान द्वारा प्रदत्त मौलिक अधिकारों के उल्लंघन का मामला है और इन अधिकारों के मुताबिक महिलाओं को प्रवेश से रोका नहीं जाना चाहिए। 

- 2017 में सुप्रीम कोर्ट ने मामला संविधान पीठ को सौंप दिया था और जुलाई, 2018 में पांच जजों की बेंच ने मामले की सुनवाई शुरू की थी। 

अभिनेत्री के दावे से हुई थी शुरुआत-:

- 2006 में मंदिर के मुख्य ज्योतिषि परप्पनगडी उन्नीकृष्णन ने कहा था कि मंदिर में स्थापित अयप्पा अपनी ताकत खो रहे हैं और वह इसलिए नाराज हैं क्योंकि मंदिर में किसी युवा महिला ने प्रवेश किया है।

- इसके बाद ही कन्नड़ ऐक्टर प्रभाकर की पत्नी जयमाला ने दावा किया था कि उन्होंने अयप्पा की मूर्ति को छुआ और उनकी वजह से अयप्पा नाराज हुए। उन्होंने कहा था कि वह प्रायश्चित करना चाहती हैं।

- अभिनेत्री जयमाला ने दावा किया था कि 1987 में अपने पति के साथ जब वह मंदिर में दर्शन करने गई थीं तो भीड़ की वजह से धक्का लगने के चलते वह गर्भगृह पहुंच गईं और भगवान अयप्पा के चरणों में गिर गईं। जयमाला का कहना था कि वहां पुजारी ने उन्हें फूल भी दिए थे।


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