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BCCI की दलील से सुप्रीम कोर्ट सहमत, एक राज्य-एक वोट का फॉर्मूला नामंजूर

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| अगस्त 9 , 2018 , 16:15 IST

सर्वोच्च न्यायालय ने गुरुवार को भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) के नए संविधान को मंजूरी दे दी। इसके साथ ही न्यायालय ने रेलवे, ट्राई सर्विसेज और भारतीय विश्वविद्यालयों के संघ के लिए पूर्ण स्थाई सदस्यता दी है।

बीसीसीआई के संविधान को मामूली फेरबदल के साथ मान्यता दे दी है। साथ ही 'एक राज्य-एक वोट' में बदलाव के साथ मुंबई, सौराष्ट्र, वडोदरा तथा विदर्भ के क्रिकेट संघों के बोर्ड को पूर्ण सदस्यता प्रदान की।

यह फैसला सुनाते हुए मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ ने पूर्व के आदेश को संशोधित करते हुए सौराष्ट्र, वडोदरा, मुंबई और विदर्भ क्रिकेट संघ एसोसिएशनों के वोटिंग अधिकारों को भी बहाल कर दिया। 

न्यायालय ने इन क्रिकेट निकायों के ऐतिहासिक अस्तित्व और योगदान का भी हवाला दिया।न्यायाधीश डी.वाई. चंद्रचूड ने कहा कि प्रत्येक पदाधिकारी को लगातार दो पदों के बाद उपशमन अवधि से गुजरना होगा।

उच्चतम न्यायालय ने तमिलनाडु के रजिस्ट्रार ऑफ सोसायटीज से बीसीसीआई के स्वीकृत संविधान को चार हफ्ते के भीतर अपने रिकार्ड में लेने का निर्देश दिया। उच्चतम न्यायालय ने राज्य क्रिकेट संघों को आगाह किया कि इन सभी आदेश का पालन ना करने पर कार्रवाई होगी।

आदेश नहीं माना तो होगी कार्रवाई -: 

पीठ ने देशभर के राज्य क्रिकेट संघों को 30 दिन में बीसीसीआई के संविधान को स्वीकार करने का निर्देश दिया। साथ ही चेतावनी दी कि आदेश का पालन नहीं करने पर उनके खिलाफ कार्रवाई होगी। सुप्रीम कोर्ट ने बीसीसीआई के पदाधिकारियों के कूलिंग-ऑफ पीरियड पर भी राहत दी है।

अब हर कार्यकाल के बाद 3 साल के कूलिंग-ऑफ पीरियड को लगातार 2 कार्यकाल के बाद अनिवार्य किया गया है। यानी अब लगातार दो कार्यकाल पर रहने वाला पदाधिकारी अगले छह साल तक क्रिकेट संघ में कोई पद नहीं ले सकेगा। लोढ़ा समिति ने सिफारिश की थी कि 3 साल के कार्यकाल के बाद सदस्यों के लिए कूलिंग-ऑफ पीरियड होना चाहिए।

70 साल उम्र की अधिकतम सीमा, सरकारी अधिकारी और मंत्री वाली अयोग्यता बनी रहेगी। शीर्ष अदालत ने 5 जुलाई की सुनवाई के दौरान कहा था कि जब तक बीसीसीआई के मसौदा संविधान पर आखिरी फैसला नहीं सुनाया जाता तब तक सभी राज्यों के क्रिकेट संघ चुनाव नहीं करा सकते। 


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