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सुप्रीम कोर्ट संकट: 5 रिटायर्ड जजों का CJI को खुला खत, बोले- जुडिशरी के भीतर सुलझे विवाद

सतीश वर्मा, न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| जनवरी 14 , 2018 , 18:43 IST

सुप्रीम कोर्ट के एक पूर्व जज समेत 4 रिटायर्ड जजों ने रविवार को सीजेआई दीपक मिश्रा के नाम खुला खत लिखकर कहा कि वे सुप्रीम कोर्ट के 4 वरिष्ठ जजों के उठाए मुद्दों से सहमत हैं और इसे 'जुडिशरी के भीतर' ही सुलझाने की जरूरत है। सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज पी.बी. सावंत, दिल्ली हाई कोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस ए.पी. शाह. मद्रास हाई कोर्ट के पूर्व जज के. चंद्रू और बॉम्बे हाई कोर्ट के पूर्व जज एच. सुरेश ने सीजेआई को लिखे खुले खत को मीडिया में जारी किया। यह खुला खत सोशल मीडिया पर भी वायरल हो गया।

जस्टिस शाह ने लिखा खुला खत

जस्टिस शाह ने पीटीआई से बातचीत में इस बात की पुष्टि की कि उन्होंने और बाकी पूर्व जजों ने सीजेआई को खुला खत लिखा है। उन्होंने कहा, 'हमने खुला खत लिखा है और उसमें जिन बाकी जजों को नाम है, उन्होंने भी इसके लिए सहमति दी है।' जस्टिस शाह ने कहा कि रिटायर्ड जजों ने जिस विचार को व्यक्त किया है वह पूरी तरह सुप्रीम कोर्ट बार असोसिएशन (SCBA) की राय से मिलती है कि जब तक इस संकट का समाधान नहीं होता तब तक अहम मसलों को सीनियर जजों वाली 5 सदस्यीय संविधान पीठ में सूचीबद्ध करना चाहिए।

बेंच के रोस्टर सिस्टम पर जताई नाराजगी

जस्टिस शाह ने कहा कि शुरुआत में वह पूरी तरह मुतमइन नहीं थे कि बाकी के तीनों जजों की इसपर सहमति है या नहीं, इसी वजह से उन्होंने शुरुआत में किसी भी खत को लिखे जाने की बात से इनकार किया था। लेकिन अब बाकी के तीनों जजों ने भी अपनी सहमति दे दी है। खुले खत में चारों पूर्व जजों के हवाले से लिखा गया है, 'सुप्रीम कोर्ट के 4 सबसे वरिष्ठ जजों ने केसों के आवंटन के तरीके को लेकर, खासकर संवेदनशील मसलों के विभिन्न बेंचों में आवंटन करने के तरीके लेकर कुछ गंभीर मुद्दों पर प्रकाश डाला है।
खुले खत में आगे लिखा है, 'उन्होंने (सुप्रीम कोर्ट के चारों जज) इस पर गंभीर चिंता जाहिर की कि केसों को उचित तरीके से आवंटित नहीं किया जा रहा है और इसे मनमाने तरीके से कुछ खास बेंचों को आवंटित किए जा रहे हैं जिनमें अक्सर जूनियर जज होते हैं। इसका न्याय और कानून के शासन के प्रशासन पर बुरा असर पड़ रहा है।'

मनमाने तरीके से बेंच किया जाता है आवंटित

चारों रिटायर्ड जजों ने कहा है कि वे सुप्रीम कोर्ट के चारों वरिष्ठ जजों से सहमत हैं कि भले ही रोस्टर तय करने का अधिकार सीजेआई का है और वह केसों को अलग-अलग बेंचों को आवंटित कर सकते हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि इसे इतने 'मनमाने तरीके' से किया जाए कि 'संवेदनशील और अहम मामलों' को जूनियर जजों की कुछ चुनिंदा बेंचों को आवंटित किया जाए।
चारों रिटायर्ड जजों ने अपने खुले खत में कहा है कि मुद्दे को हल किए जाने की जरूरत है और केसों का आवंटन तार्किक, निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से हो। उन्होंने कहा कि जुडिशरी में जनता के विश्वास को बहाल करने के लिए इसे तत्काल किया जाना चाहिए। खत में आगे कहा गया है, 'जब तक यह नहीं होता, तब तक सभी संवेदनशील और अहम मामलों को चाहे वे लंबित केस हों- को इस कोर्ट के 5 वरिष्ठतम जजों की संविधान पीठ सुनवाई करे।'


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