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SC ने लगाई मोदी सरकार को फटकार, कहा- क्यों नहीं दे रहे दागी नेताओं के रिकॉर्ड

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| अगस्त 30 , 2018 , 21:28 IST

सर्वोच्च न्यायालय ने देश भर की विभिन्न अदालतों में सांसदों और राजनेताओं के खिलाफ लंबित पड़े मामलों का विवरण मुहैया कराने में विफल रहने पर गुरुवार को केंद्र को लताड़ लगाई। न्यायमूर्ति रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति नवीन सिन्हा और न्यायमूर्ति के. एम. जोसेफ की एक पीठ ने कहा, "भारत सरकार तैयार नहीं है" क्योंकि वह अदालत द्वारा मांगी गई जानकारी नहीं दे पाए।

पीठ ने कहा, "सरकार हमें कुछ आदेश पास करने के लिए बाध्य कर रही है, जो कि हम इस वक्त नहीं चाहते। भारत संघ तैयार नहीं है। हम अपना दुख व्यक्त करते हैं।" पीठ ने मामले की सुनवाई एक सप्ताह बाद के लिए सूचीबद्ध कर दी।

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सरकार द्वारा दाखिल हलफनामे में प्रत्येक फास्ट ट्रैक अदालत में लंबित पड़े मामलों की संख्या से संबंधित विशिष्ट विवरण मौजूद नहीं है।

कानून एवं न्याय मंत्रालय के एक शीर्ष अधिकारी ने हलफनामे में कहा, "यह विभाग नियमित रूप से संबंधित अदालतों में स्थानांतरित / निपटारे / लंबित मामलों के बारे में जानकारी प्रस्तुत करने के लिए संबंधित अधिकारियों के साथ मामला उठा रहा है।"

हलफनामे में केवल संपर्क की सारिणी मौजूद है जबकि इसमें सांसदों व राजनेताओं के खिलाफ लंबित मामलों की संख्या गायब है।

अदालत वकील और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नेता अश्विनी कुमार उपाध्याय की जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही है। याचिका में दोषी सांसदों पर आजीवन प्रतिबंध और आपराधिक मामलों के आरोपी सांसदों के लिए विशेष अदालतें स्थापित करने की मांग की गई है।

36 प्रतिशत सांसद और विधायक दागी होने के बावजूद हम अपनी लोकतांत्रिक व्यवस्था पर गर्व करते हैं और बड़ी शान से यह कहते हैं कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है। आम चुनाव के समय अन्य देशों के लोग हैरान होकर देखते हैं कि इतनी बड़ी जनसंख्या वाले देश में मतदान कैसे इतने शांतिपूर्वक ढंग से संपन्न हो जाते हैं, परंतु ऐसा लग रहा है कि इस लोकतंत्र में दीमक लगती जा रही है। बाहर से यह व्यवस्था भले ही ठीकठाक लगती हो, परंतु अंदर से खोखली होती जा रही है। चिंता के कई पहलू हैं।

 


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