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श्राद्ध में पितरों को खुश करना चाहते हैं तो बिल्कुल न करें ये काम...

icon कुलदीप सिंह | 0
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| सितंबर 5 , 2017 , 17:20 IST

पितृपक्ष इस शुक्रवार यानी 6 सितंबर से शुरु हो रहे हैं। पितृपक्ष को श्राद्ध भी कहा जाता है। आश्विन कृष्ण पक्ष प्रतिपदा से अमावस्या तक के काल को ही श्राद्ध कहते हैं। पितृपक्ष 15 दिनों तक चलता है लेकिन इस साल चतुर्थी तिथि और पंचमी तिथि 9 सितंबर को होने की वजह से पितृपक्ष के एक दिन कम हो गए हैं। इस बार यह सिर्फ 14 दिनों का होगा।

जानिए क्यो मनाया जाता है पितृपक्ष

शास्त्रों में कहा गया है कि भाद्र शुक्ल पूर्णिमा के दिन यमराज सभी जीवात्माओं को मुक्त कर देते हैं। बंधन मुक्त होने के बाद आत्माएं पृथ्वी लोक पर आ जाती हैं और जिस परिवार से उनका संबंध रहा है उस परिवार के बीच सूक्ष्म रूप से मौजूद रहते हैं। इन 15 दिनों में परिवार के लोगों के द्वारा जो श्राद्ध का अन्न, जल दान दिया जाता है उन्हें ग्रहण करके आत्माएं संतुष्ट होती हैं और फिर पितृपक्ष समाप्त होने पर वापस जिस लोक से आए होते हैं वहां चले जाते हैं।

Pitra-paksha

जानिये, कब-कब है कौन सा श्राद्ध

6 सितंबर - प्रतिपदा का श्राद्ध

7 सितंबर - द्वितीया का श्राद्ध

8 सितंबर - तृतीया का श्राद्ध

9 सितंबर - चतुर्थी का श्राद्ध

10 सितंबर - पंचमी (भरणी) का श्राद्ध

11 सितंबर - अनुदया षष्ठी का श्राद्ध

12 सितंबर - सप्तमी का श्राद्ध

13 सितंबर - अष्टमी का श्राद्ध

14 सितंबर - नवमी

स्त्रियों का श्राद्ध

15 सितंबर - दशमी का श्राद्ध

16 सितंबर - एकादशी (इंद्रा एकादशी)

17 सितंबर - द्वादशी (संन्यासी, वैष्णव, यति का श्राद्ध)

18 सितंबर - त्रयोदशी व चतुर्दशी का श्राद्ध (शास्त्रादि से मृत व्यक्तियों का श्राद्ध)

19 सितंबर - अमावस्या श्राद्ध (सर्वपैत्री) व पितृ विसर्जन

जानिए पितृपक्ष में क्या-क्या नहीं करना चाहिए

श्राद्ध पक्ष में अगर कोई भोजन पानी मांगने आए तो उसे खाली हाथ नहीं जाने दें। कहते हैं प‌ितर कसी भी रूप में अपने परिजनों के बीच में आते हैं और उनसे अन्न पानी की चाहत रखते हैं। गाय, कुत्ता, ब‌िल्ली, कौआ इन्हें श्राद्ध पक्ष में मारना नहीं चाह‌िए, बल्क‌ि इन्हें खाना देना चाह‌िए। मांसहारी भोजन जैसे मांस, मछली, अंडा के सेवन से परहेज करना चाह‌िए। शराब और नशीली चीजों से बचें। परिवार में आपसी कलह से बचें।

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ये काम भी नहीं करने चाहिए

ब्रह्मचर्य का पालन करें, इन द‌िनों स्‍त्री पुरुष संबंध से बचना चाह‌िए। नाखून, बाल एवं दाढ़ी मूंछ नहीं बनाना चाह‌िए। क्योंक‌ि श्राद्ध पक्ष प‌ितरों को याद करने का समय होता है। यह एक तरह से शोक व्यक्त करने का तरीका है। प‌ितृपक्ष के दौरान जो भी भोजन बनाएं उसमें से एक ह‌िस्स प‌ितरों के नाम से न‌िकालकर गाय या कुत्ते को ख‌िला दें। भौत‌िक सुख के साधन जैसे स्वर्ण आभूषण, नए वस्‍त्र, वाहन इन द‌िनों खरीदना अच्छा नहीं माना गया है। क्योंक‌ि यह शोक काल होता है।

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कुलदीप सिंह

Executive Editor - News World India. Follow me on twitter - @KuldeepSingBais

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