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अलगाववादियों का कश्मीर में अनुच्छेद 35ए को हटाने के विरुद्ध प्रदर्शन, जनजीवन प्रभावित

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| अगस्त 5 , 2018 , 16:15 IST

अलगाववादियों ने कश्मीर में अनुच्छेद 35ए के समर्थन में रविवार को बंद का आह्रान किया है जिससे समूची घाटी में जनजीवन प्रभावित हुआ है। अनुच्छेद 35ए राज्य को विशेष शक्तियां देता है। अलगाववादी संगठन संयुक्त प्रतिरोध लीडरशिप (जेआरएल) ने अनुच्छेद 35ए को हटाने के लिए सर्वोच्च न्यायालय में दायर याचिका के विरोध में दो दिन के बंद का आह्वान किया है।

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सार्वजनिक परिवहन सड़कों से नदारद है, छिटपुट निजी वाहन ही श्रीनगर और घाटी के अन्य जगहों में सड़कों पर दिखाई दे रहे हैं। प्रशासन ने कानून एवं व्यवस्था बनाए रखने के लिए भारी सुरक्षाबलों की तैनाती की है।

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इस बंद की वजह से अमरनाथ यात्रा दो दिनों के लिए रोक दी गई है। पुलिस ने कहा कि जम्मू के भगवती नगर निवास से किसी भी तीर्थयात्री को जाने की अनुमति नहीं है। उधमपुर और रामबन में विशेष जांच चौकी स्थापित की गई हैं ताकि तीर्थयात्रियों का आना-जाना जम्मू-श्रीनगर राजमार्ग पर न हो पाए जो इन दोनों जिलों से गुजरता है। प्रशासन ने कहा कि हालांकि कश्मीर घाटी में बालटाल और पहलगाम आधार शिविरों में ठहरे तीर्थयात्री अपनी यात्रा जारी रखेंगे।

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प्रदर्शनकारियों ने जो बैनर ले रखे थे, उन पर 35ए व 370 के संरक्षण से संबंधित नारे दर्ज थे। कश्मीर चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष जावेद अहमद टेंगा रैली का नेतृत्व कर रहे थे। उन्होंने कहा कि कश्मीरी अनुच्छेद 35ए व 370 को बचाने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ेंगे।

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गौरतलब है कि अनुच्छेद 35ए को हटाने के विरुद्ध छह अगस्त को सर्वोच्च न्यायालय में सुनवाई होनी है। इसके खिलाफ कश्मीर में विरोध जताया जा रहा है। अलगाववादी संगठनों ने पांच और छह अगस्त को कश्मीर बंद का आह्वान किया है। व्यापारिक संगठनों ने बंद के साथ छह अगस्त को संयुक्त राष्ट्र कार्यालय चलो का भी एलान किया है।

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क्या है अनुच्छेद 35ए-:

अनुच्छेद 35ए को लेकर जम्मू-कश्मीर में लंबे समय से विरोध है। इस अनुच्छेद के जरिये वहां की सरकार और लोगों को विशेष अधिकार प्राप्त है कि वहां का स्थायी निवासी कैसे तय होगा। इसके तहत वहां की सरकार को ये अधिकार मिल जाता है कि वो आजादी के वक्त दूसरी जगहों से आए लोगों और देश के अन्य क्षेत्र के लोगों को किस तरह की सहूलियतें दे या नहीं दे। यह अनुच्छेद 14 मई 1954 से जम्मू-कश्मीर में लागू है। तब राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद थे। उनके ही आदेश पर ही यह अनुच्छेद पारित हुआ था।

क्यों है अनुच्छेद 35ए का विरोध-:

बताते चलें कि अनुच्छेद 35ए, धारा 370 का ही एक हिस्सा है। इसकी वजह से दूसरे राज्य के नागरिक जम्मू-कश्मीर में संपत्ति नहीं खरीद सकते। महिलाओं में इस अनुच्छेद का खासा विरोध है। अगर जम्मू-कश्मीर की किसी महिला की दूसरे राज्य में शादी हो जाती है तो उसके सारे अधिकार खत्म हो जाते हैं। साथ ही उसके बच्चों के अधिकार भी खत्म हो जाते हैं।


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